Madhya Pradesh Honey Trap: श्वेता जैन की थी परमाणु ठिकानों तक घुसपैठ, पढ़ें चौंकाने वाला खुलासा

भोपाल। मध्य प्रदेश हनी ट्रैप केस में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नेता, अफसरों और रसूखदार लोगों को हुस्न के जाल फांसने वाली एक महिला आरोपी की घुसपैठ देश के अत्यंत संवदेनशील परमाणु ठिकानों तक भी थी।

केन्द्रीय उपक्रमों में सप्लाई किया सामान

केन्द्रीय उपक्रमों में सप्लाई किया सामान

दोपहर मेट्रो समाचार पत्र की खबर के मुताबिक मध्य प्रदेश हनी ट्रैप की आरोपी महिला का दायरा ब्लैकमेल करके सिर्फ पैसे हड़पने तक ही सीमित नहीं था बल्कि उन्होंने अपने रूपजाल में केन्द्रीय उपक्रमों के आला अधिकारियों को फांसकर अपने उत्पादों की सप्लाई ऐसे प्रतिष्ठानों में की है, जहां पर केन्द्रीय गुप्तचर ब्यूरो की हरी झंडी के बिना परिंदा भी पर नहीं मार सकता।

आरोपी श्वेता जैन की थी एट एल्थी नामक प्रोडक्ट कंपनी

आरोपी श्वेता जैन की थी एट एल्थी नामक प्रोडक्ट कंपनी

इस तरह के तमाम सौंदों के दस्तावेज अपने पास मौजूद होने का दावा करने वाले दोपहर मेट्रो के अनुसार केन्द्र सरकार के संज्ञान में यह मामला आने के बाद गुपचुप तरीके से उच्च स्तरीय पड़ताल चल रही है। मध्य प्रदेश हनी ट्रैप केस की आरोपी श्वेता जैन ने पांच साल भोपाल में ठिकाना बनाने के बाद एट एल्थी नामक प्रोडक्ट कंपनी भी खोल रखी थी, जिसके कार्यालय के पते के रूप में उसके आवास जास्मिन दर्ज है।

इन परमाणु बिजली संयंत्रों को माल की सप्लाई

इन परमाणु बिजली संयंत्रों को माल की सप्लाई

दूसरा पता एच-2 शास्त्री नगर जवाहर चौक के पास वाला भी दर्ज है। यह कंपनी बूप टेप, माइका टेप, सिंगल साइडेड क्लोथ टेप, सरफेस प्रोटेक्शन टेप आदि की सप्लाई करती है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि श्वेता विजय जैन की इस कंपनी ने न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन आफ इंडिया में घुसपैठ करके भार​त के तारापुर और कुडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्रों को माल की सप्लाई की है।

न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन के चेयरमैन पर संदेह

न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन के चेयरमैन पर संदेह

केन्द्रीय जांच एजेंसी के राडार पर न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन के चेयरमैन और एमडी एके शर्मा भी हैं, जिनकी इलेक्ट्रोनिक इंजीनियरिंग की शिक्षा दीक्षा भोपाल के मौलाना आजाद टेक्नालाजी संस्थान में हुई है। संदेश यही है कि शर्मा के जरिए ही श्वेता ने अपने उत्पाद न्यूक्लियर संयंत्रों में खपाए। एट एल्थी ने 13 जुलाई 2017 से 26 फरवरी 2019 के बीच नौ बार टेप की सप्लाई की है। केन्द्र सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए यह पड़ताल करा रही है कि इस कंपनी को सप्लाई आर्डर करने के पूर्व केन्द्रीय गुप्तचर ब्यूरो से क्लीयरेंस ली गई थी या नहीं। यदि ली तो यह हरी झंडी किसने दी।

रेलवे बोर्ड भी कटघरे में

रेलवे बोर्ड भी कटघरे में

श्वेता विजय जैन की कंपनी ने दिल्ली में अपने पंख फैलाते हुए कोटेशन के आधार पर रेलवे में सप्लाई की। 30 नवंबर 2017 से लेकर 17 जनवरी 2019 तक उसकी कंपनी को छह आर्डर दक्षिण मध्य रेलवे से मिले हैं। दिल्ली में रेलवे मुख्यालय से कंपनी और उसकी कर्ताधर्ता श्वेता जैन के कनेक्शन जोड़ने में भोपाल में मंडल रेल अधीक्षक रह चुके एक अफसर का भी हाथ है, जो अब बड़े ओहदे पर दिल्ली में है। रेलवे बोर्ड के शीर्षस्थ अफसर एक श्वेता की पहुंच उसी के जरिए बनी।

क्या है मध्य प्रदेश हनी ट्रैप केस

क्या है मध्य प्रदेश हनी ट्रैप केस

नेताओं, अफसरों और रसूखदारों को हुस्न के जाल में फंसाकर उनके अश्लील वीडियो बनाने के बाद ब्लैकमेल करने का पूरा मामला मध्य प्रदेश हनी ट्रैप केस है। अन्य की तरह की तरह इंदौर नगर निगम का इंजीनियर हरभजन सिंह भी गिरोह के जाल में फंसा और अश्लील वीडियो बनवा बैठा। गिरोह ने उससे अश्लील वीडियो के बदल तीन करोड़ रुपए मांगे। हरभजन सिंह ने इंदौर के पलासिया पुलिस थाने में शिकायत दी, जिस पर पुलिस ने 18 सितम्बर को भोपाल से 3 और 19 सितम्बर को इंदौर से 2 महिलाओं को पकड़ा तब से आए दिन हनी ट्रैप केस में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। फिलहाल पांचों महिला आरोपी 14 अक्टूबर 2019 तक के लिए जेल में हैं।

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