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MP News: पंचायत CEO राजेश सोनी को 20,000 रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा, क्या है ट्रांसफर बाजार की सच्चाई? जानिए

मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में भ्रष्टाचार का 'ट्रांसफर बाजार' कितना काला है, इसका ताजा खुलासा आज देवास जिले के टोंक खुर्द जनपद पंचायत कार्यालय से हुआ। मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) राजेश सोनी को लोकायुक्त उज्जैन इकाई ने 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के 'जीरो टॉलरेंस' के सख्त निर्देशों पर हुई, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नया संदेश दे रही है।

शिकायतकर्ता कृष्णपाल सिंह, एक साधारण रोजगार सहायक, ने ग्राम पंचायत नावदा में अपने तबादले के बदले 'डिमांड' का राज खोला। 29 सितंबर को शिकायत दर्ज, सत्यापन, और आज 10 अक्टूबर को 'ट्रैप'-यह कहानी न सिर्फ एक अधिकारी की गिरफ्तारी की है, बल्कि ग्रामीण विकास की रीढ़ बने पंचायती राज व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार की अमानवीय सच्चाई को उजागर करती है।

Lokayukta in Ujjain District Panchayat CEO Rajesh Soni caught red-handed taking a bribe of Rs 20 000

भ्रष्टाचार का 'ट्रांसफर बाजार': ग्रामीण MP में क्यों है यह 'खेल'?

सबसे पहले, समझें कि यह 'ट्रांसफर बाजार' क्या बला है। मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में जनपद पंचायतें विकास का केंद्र हैं-सड़कें, स्कूल, पानी, रोजगार योजनाएं सब इन्हीं से चलती हैं। रोजगार सहायक जैसे कर्मचारी मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत गांवों में काम बांटते हैं। लेकिन CEO जैसे अधिकारी इनका 'ट्रांसफर' कंट्रोल करते हैं। सरल शब्दों में: अगर कोई कर्मचारी 'अपना' न हो, तो ट्रांसफर के नाम पर रिश्वत मांगते हैं-'पैसे दो, तो घर जैसा गांव मिलेगा; न दो, तो जंगल भेज देंगे।'

यह मामला देवास जिले के टोंक खुर्द का है, जहां कृष्णपाल सिंह (उम्र 35 वर्ष, पिता भोपाल सिंह, निवासी सोनसर तहसील) एक मेहनती रोजगार सहायक हैं। वे ग्राम पंचायत नावदा में तैनात थे, जहां मनरेगा के तहत मजदूरों को 100 दिन का काम दिलाने का जिम्मा था। लेकिन CEO राजेश सोनी ने 'ट्रांसफर' का लालच दिखाया-'20,000 दो, तो अच्छा गांव; न दो, तो दूर का जंगल।' कृष्णपाल ने इंकार किया, तो दबाव बढ़ा।

यह न सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी है, बल्कि MP के 300+ जनपद पंचायतों में चल रहे 'ब्लैकमेल गेम' की। 2025 में लोकायुक्त को ऐसे 150+ शिकायतें मिल चुकी हैं, जिनमें 40% ट्रांसफर से जुड़ीं। क्या आप जानते हैं? एक ट्रांसफर पर औसतन 10,000-50,000 की 'फीस' लगती है-यह गरीब मजदूरों का पैसा चूसने का तरीका है!

पूरा मामला: 29 सितंबर से 10 अक्टूबर तक का 'ट्रैप थ्रिलर'

29 सितंबर 2025: शिकायत का 'क्लाइमेक्स बिल्ड-अप'

कृष्णपाल सिंह उज्जैन लोकायुक्त कार्यालय पहुंचे। पुलिस अधीक्षक श्री आनंद यादव के सामने उन्होंने लिखित शिकायत दी: "CEO राजेश सोनी ट्रांसफर के बदले 20,000 मांग रहे। नावदा पंचायत में मेरा काम अच्छा है, लेकिन वे ब्लैकमेल कर रहे।" यादव ने तुरंत निरीक्षक दीपक सेजवार को सत्यापन का जिम्मा सौंपा। कृष्णपाल ने बताया, "सोनी ने फोन पर कहा-'पैसे दो, तो ट्रांसफर कैंसल; न दो, तो जंगल भेज दूंगा।' मैंने रिकॉर्डिंग की, लेकिन डर से नहीं दी।"

30 सितंबर-9 अक्टूबर: सत्यापन का 'सस्पेंस चेज'

निरीक्षक सेजवार ने गुप्त जांच शुरू की। कृष्णपाल से गुप्त मीटिंग करवाई-सोनी ने फिर डिमांड दोहराई: "20,000 फाइनल, कल ऑफिस आना।" सत्यापन में शिकायत '100% सही' पाई गई। महानिदेशक योगेश देशमुख को रिपोर्ट भेजी, जिन्होंने 'तुरंत ट्रैप' का आदेश दिया। टीम ने रिहर्सल की-कृष्णपाल को 'ट्रैप मनी' (20,000 रुपये, केमिकल से चिह्नित) दिए। सोनी को शक न हो, इसलिए कृष्णपाल ने 'सामान्य मीटिंग' का बहाना बनाया। यह 10 दिनों का 'कैट एंड माउस गेम' था!

10 अक्टूबर 2025 (आज): 'ट्रैप का धमाकेदार क्लाइमेक्स'

सुबह 11 बजे जनपद पंचायत कार्यालय टोंक खुर्द। कृष्णपाल सोनी के चैंबर में घुसे। "सर, ट्रांसफर के पैसे लाया," कहकर 20,000 का लिफाफा थमाया। सोनी ने लिफाफा लिया, मुस्कुराए-"अच्छा किया, ट्रांसफर कैंसल।" तभी बाहर छिपी लोकायुक्त टीम ने धावा बोला! उप पुलिस अधीक्षक राजेश पाठक ने चैंबर का दरवाजा तोड़ा, निरीक्षक दीपक सेजवार ने सोनी के हाथों पर 'फिनाइलोलाइन टेस्ट' किया-हाथ काले पड़ गए, रिश्वत साबित! सोनी घबरा गया, भागने की कोशिश की, लेकिन श्याम शर्मा, उमेश जाटवा, संदीप कदम और रमेश डाबर ने घेर लिया। कार्यवाही जारी-सोनी को हिरासत में लिया, मोबाइल-डॉक्यूमेंट्स जब्त।

यह ट्रैप उज्जैन लोकायुक्त की 2025 की 60वीं सफल कार्रवाई है। सोनी (उम्र 45 वर्ष, 15 साल का अनुभव) अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (धारा 7) के तहत फंसे-3-7 साल जेल + जुर्माना।

लोकायुक्त टीम: 'साइलेंट हीरोज' का 'सुपरहीरो' ऑपरेशन

  • उप पुलिस अधीक्षक राजेश पाठक: ऑपरेशन हेड, जिन्होंने 'घेराबंदी' की रणनीति बनाई।
  • निरीक्षक दीपक सेजवार: सत्यापन एक्सपर्ट, जिन्होंने कृष्णपाल की रिकॉर्डिंग से 'सबूत' जुटाए।
  • टीम मेंबर: श्याम शर्मा (गवाह), उमेश जाटवा (सुरक्षा), संदीप कदम (रिकॉर्डिंग), रमेश डाबर (लॉजिस्टिक्स)।

पाठक ने कहा, "यह छोटी रिश्वत बड़ी साजिश का हिस्सा थी। सोनी जैसे अफसर ग्रामीण विकास को खोखला कर रहे।" देशमुख का संदेश: "हर शिकायत पर एक्शन-भ्रष्टाचार का अंतिम सांस!"

कृष्णपाल सिंह की हिम्मत: 'आम आदमी' का 'हीरो' मोमेंट

कृष्णपाल सिंह की कहानी सबसे रोचक है। सोनसर गांव का रहने वाला, वह मनरेगा में 100 मजदूरों का भरण-पोषण करता है। "CEO ने कहा-ट्रांसफर से परिवार बर्बाद। मैंने सोचा, अगर चुप रहा तो कितने सहायक प्रभावित होंगे?" उन्होंने शिकायत की, और आज 'हीरो' बन गए। परिवार ने कहा, "डर था, लेकिन न्याय का विश्वास।" यह हिम्मत MP के लाखों कर्मचारियों को प्रेरित करेगी।

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