MP News Lokayukta: सिवनी पुलिस की वर्दी पर दाग, 75 हजार की घूस लेते प्रधान आरक्षक गिरफ्तार
मध्य प्रदेश के सिवनी ज़िले में लोकायुक्त पुलिस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अब रिश्वतखोरों की खैर नहीं।
पुलिस महानिदेशक (लोकायुक्त) योगेश देशमुख के सख्त निर्देश पर जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने आज एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रधान आरक्षक मनीष कुमार पटवा को ₹75,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है।
कैसे शुरू हुआ खेल?
घटना सिवनी जिले के केवलारी थाना क्षेत्र की है। यहां नितिन पाटकर, उम्र 42 वर्ष, पेशे से सिविल ठेकेदार हैं। उन्होंने नगर परिषद केवलारी में सीसी रोड और नाली निर्माण का ठेका लिया था। लेकिन जब उन्होंने यह काम राहुल राय नाम के पेटी ठेकेदार को सौंपा, तो वहां घटिया निर्माण हुआ और पैसों में भी धोखाधड़ी सामने आई।

नितिन ने इसकी शिकायत 8 अक्टूबर को केवलारी थाने में दर्ज कराई, मगर मामला वहीं से पलट गया -
क्योंकि शिकायत दर्ज करने के एवज में ही थाने के प्रधान आरक्षक मनीष पटवा ने ₹5 लाख की रिश्वत मांग ली!
पहली किस्त ले चुका था आरक्षक
लोकायुक्त सूत्रों के मुताबिक, आरोपी प्रधान आरक्षक पहले ही शिकायतकर्ता से ₹25,000 की पहली किस्त वसूल कर चुका था। इसके बाद जब वह दूसरी किस्त ₹75,000 लेने वाला था, तभी लोकायुक्त टीम ने पूरा जाल बिछाया।
आज हुआ ट्रैप - रिश्वत लेते ही पकड़ा गया
आज दिनांक 16 अक्टूबर 2025 को जबलपुर लोकायुक्त टीम ने थाना केवलारी परिसर में ही प्रधान आरक्षक मनीष पटवा को रंगे हाथों पकड़ लिया। उसके हाथों पर रिश्वत के नोटों की फिनॉलफ्थेलिन पाउडर की परत चढ़ गई, जो जांच में नीले रंग में बदल गई - और फिर मामला साफ़ हो गया कि पुलिस की वर्दी में बैठा यह आरक्षक, वर्दी की आड़ में वसूली का धंधा चला रहा था।
लोकायुक्त की टीम में कौन-कौन थे
इस कार्रवाई की कमान निरीक्षक उमा कुशवाहा के नेतृत्व में लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने संभाली।
दल में निरीक्षक राहुल गजभिए, जितेंद्र यादव, बृजकिशोर नरवरिया और अन्य अधिकारी शामिल रहे।
अब लगेगी धाराएं, और होगी गिरफ्तारी
आरोपी प्रधान आरक्षक पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7, 13(1)(B), 13(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ और न्यायिक कार्यवाही की जा रही है।
DGP लोकायुक्त के निर्देश के बाद बढ़ी सख्ती
लोकायुक्त डीजी योगेश देशमुख ने हाल ही में सभी ज़िलों की इकाइयों को निर्देश दिए थे कि "पुलिस, प्रशासन या किसी भी सरकारी विभाग में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी जनता से पैसे की मांग करता है, तो उस पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।"
- जबलपुर लोकायुक्त की यह कार्रवाई उसी सख्ती का नतीजा है।
- अब जनता का सवाल - जब वर्दी ही बिक जाए तो भरोसा कहाँ करें?
केवलारी के लोग अब यही कह रहे हैं कि अगर एक शिकायत दर्ज कराने के लिए ठेकेदार को 5 लाख देने पड़ें,
तो फिर न्याय का क्या मतलब बचता है? लोकायुक्त की इस कार्रवाई से एक बार फिर यह संदेश गया है कि भ्रष्टाचार चाहे पुलिस में हो या राजनीति में - पकड़ में अब कोई नहीं बचने वाला।












Click it and Unblock the Notifications