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MP News: राजगढ़ में कांग्रेस नेता का विवादित बयान, "लाड़ली बहनें बोरियों में भर देंगे", बीजेपी का तीखा हमला

ladli behna yojana: राजगढ़ जिले में कांग्रेस के नवनियुक्त जिला अध्यक्ष प्रियव्रत सिंह के स्वागत समारोह में दिया गया एक बयान सियासत का बड़ा मुद्दा बन गया है। जिला पंचायत सदस्य और जिला कृषि समिति के अध्यक्ष यशवंत गुर्जर ने मंच से कहा-
"अबकी बार हम एक साथ जीतेंगे। लाड़ली बहनें, सबको बोरियों में भर देंगे।"

यह बयान मुख्यमंत्री मोहन यादव की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना पर सीधा तंज माना गया है, जिसे प्रदेश की लाखों महिलाएं लाभ ले रही हैं। बयान का वीडियो 20 अगस्त को वायरल होते ही कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गईं।

Controversial statement of Congress leader in Rajgarh MP BJP will fill their ladli bhena in sacks

स्वागत समारोह में विवाद का आगाज

20 अगस्त 2025 को राजगढ़ में कांग्रेस के नवनियुक्त जिला अध्यक्ष प्रियव्रत सिंह के स्वागत समारोह का आयोजन किया गया था। यह प्रियव्रत सिंह की जिला अध्यक्ष के रूप में पहली आधिकारिक उपस्थिति थी। इस समारोह में जिला पंचायत सदस्य और जिला कृषि समिति के अध्यक्ष यशवंत गुर्जर ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एक ऐसा बयान दे दिया, जिसने सियासी हलकों में भूचाल ला दिया। उन्होंने मंच से कहा, "अबकी बार हम एक साथ जीतेंगे। लाड़ली बहनें, सबको बोरियों में भर देंगे।" यशवंत गुर्जर का यह बयान मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'लाड़ली बहना योजना' और उसका लाभ लेने वाली महिलाओं के प्रति अपमानजनक माना गया।

उनके इस बयान का वीडियो गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में यशवंत गुर्जर के साथ मंच पर बैठे प्रियव्रत सिंह और अन्य कांग्रेसी नेता हंसते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसने इस मामले को और तूल दे दिया।

बीजेपी का तीखा पलटवार

यशवंत गुर्जर के बयान पर बीजेपी ने तुरंत पलटवार किया। बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा, "मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चल रही लाड़ली बहना योजना ने मध्य प्रदेश की बहनों को आर्थिक मजबूती और सामाजिक सम्मान दिया है। लेकिन कांग्रेस नेता यशवंत गुर्जर जैसे लोग लाड़ली बहनों को 'बोरियों में भरने' की बात कर उनकी भावनाओं का अपमान कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यशवंत गुर्जर की पत्नी स्वयं इस योजना का लाभ ले रही हैं। यह कांग्रेस की दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।"

बीजेपी ने इस बयान को कांग्रेस की महिला-विरोधी सोच का प्रतीक बताया और कहा कि यह बयान न केवल लाड़ली बहना योजना का अपमान है, बल्कि यह प्रदेश की लाखों महिलाओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। बीजेपी ने दावा किया कि यह घटना कांग्रेस की हताशा को दर्शाती है, जो लाड़ली बहना योजना की लोकप्रियता को देखकर बौखला गई है।

यशवंत गुर्जर का दावा: प्रियव्रत के नेतृत्व में जीत

यशवंत गुर्जर ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि प्रियव्रत सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस राजगढ़ की सभी सीटों पर जीत हासिल करेगी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के दौरान जिले से 18 नेताओं के नाम जिला अध्यक्ष पद के लिए सामने आए थे। लेकिन पर्यवेक्षक ने अंततः प्रियव्रत सिंह का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को सुझाया। गुर्जर ने दावा किया कि राहुल गांधी ने स्वयं प्रियव्रत सिंह को फोन कर जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। इस दावे ने प्रियव्रत सिंह की नियुक्ति को और महत्वपूर्ण बना दिया, लेकिन उनके विवादित बयान ने इस समारोह की चमक को फीका कर दिया।

लाड़ली बहना योजना: बीजेपी का गौरव, कांग्रेस की मुसीबत

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में शुरू की गई लाड़ली बहना योजना ने लाखों महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। इस योजना के तहत हर महीने पात्र महिलाओं को ₹1,250 की राशि दी जाती है, जिसे हाल ही में बढ़ाकर ₹1,500 करने की घोषणा की गई है। बीजेपी इस योजना को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानती है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि उनके सामाजिक सम्मान और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देती है।

वहीं, कांग्रेस इस योजना को बार-बार निशाना बनाती रही है। कांग्रेस नेताओं ने इसे 'चुनावी जुमला' करार दिया और दावा किया कि यह योजना सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर कर रही है। लेकिन यशवंत गुर्जर का यह बयान कांग्रेस के लिए उल्टा पड़ गया। बीजेपी ने इसे मौके के रूप में भुनाते हुए कांग्रेस पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया।

कांग्रेस की सफाई और आलोचना

यशवंत गुर्जर के बयान के बाद कांग्रेस ने इस मामले पर सफाई देने की कोशिश की। पार्टी के स्थानीय नेताओं ने दावा किया कि यशवंत का बयान गलत संदर्भ में लिया गया है और उनका इरादा महिलाओं का अपमान करना नहीं था। लेकिन इस सफाई का ज्यादा असर नहीं हुआ, क्योंकि वायरल वीडियो में यशवंत के बयान और मंच पर मौजूद नेताओं की हंसी ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दीं।

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इस बयान की कड़ी निंदा की। एक यूजर ने ट्वीट किया, "कांग्रेस का असली चेहरा सामने आ गया। लाड़ली बहनों का अपमान करने वाले नेता क्या महिलाओं का सम्मान कर पाएंगे?" वहीं, कुछ यूजर्स ने इसे कांग्रेस की हताशा का नतीजा बताया, जो बीजेपी की लोकप्रिय योजनाओं को देखकर बौखला गई है।

सियासी नफा-नुकसान

इस घटना ने राजगढ़ की सियासत को गरमा दिया है। बीजेपी इस मुद्दे को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। पार्टी ने इसे कांग्रेस की महिला-विरोधी मानसिकता का सबूत बताकर जनता के बीच प्रचार शुरू कर दिया है। दूसरी ओर, कांग्रेस इस विवाद को जल्द से जल्द दबाने की कोशिश में है। प्रियव्रत सिंह की नई जिम्मेदारी की शुरुआत ही विवादों से हो रही है, जिससे उनकी नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान कांग्रेस को आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में भारी पड़ सकता है। लाड़ली बहना योजना की लोकप्रियता को देखते हुए, महिलाओं के बीच इस बयान से नाराजगी फैल सकती है, जो बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

प्रियव्रत सिंह की नियुक्ति और राहुल गांधी का रोल

यशवंत गुर्जर ने अपने भाषण में प्रियव्रत सिंह की नियुक्ति को राहुल गांधी की पसंद बताया। उनके मुताबिक, संगठन सृजन अभियान के तहत 18 नेताओं के नाम सामने आए थे, लेकिन राहुल गांधी ने प्रियव्रत को चुना। यह दावा कांग्रेस के भीतर राहुल गांधी के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। लेकिन यशवंत के बयान ने इस नियुक्ति के उत्साह को विवादों के घेरे में ला दिया।

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