भाजपा के अभेद्य किले को कैसे जीतने में सफल होगी कांग्रेस? जानिए गोविंदपुरा विधानसभा सीट का समीकरण

राजधानी भोपाल की गोविंदपुरा विधानसभा सीट कांग्रेस के लिए जीतना किसी चुनौती से कम नहीं है। कांग्रेस 46 साल से इस सीट को जीतने की कोशिश में लगी हुई है, लेकिन उसे अब तक सफलता प्राप्त नहीं हुई है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस भाजपा की अभेद्य किले को जीतने में सफल होगी या नाकाम? जानिए इस सीट के सियासी समीकरण।

गोविंदपुरा विधानसभा सीट के बारे में विस्तार से जानिए

भोपाल के गोविंदपुरा विधानसभा सीट का गठन 1967 में हुआ था। कांग्रेस ने 1967 में स्थित पर कब्जा जमाया था। केएल प्रधान 1967 में कांग्रेस के टिकट पर यहां से विधायक चुने गए थे। इसके बाद 1972 के चुनाव में कांग्रेस के मोहनलाल स्थान ने जहां से जीत दर्ज की थी। साल 1977 में इस सीट को भाजपा ने अपने नाम कर लिया। भाजपा के लक्ष्मी नारायण शर्मा ने जनता पार्टी से चुनाव जीता था।

Know the equation of Govindpura assembly seat in Madhya Pradesh assembly elections 2023

इसके बाद 1980 में बाबूलाल गोविंदपुरा विधानसभा सीट से चुनाव जीते और इसके बाद से लगातार 40 साल तक भाजपा के बाबूलाल गौर यहां से विधायक रहे। ऐसा लगने लगा कि गोविंदपुरा विधानसभा सीट और बाबूलाल गौर एक-दूसरे के पर्याय बन गए। गौर यहां से 2013 तक जीते रहे। उन्होंने 1980, 1985, 1990, 1993, 1998, 2003, 2008 और 2013 का चुनाव इस सीट से जीता था।

बता दे 2013 के बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में बाबूलाल गौर की बहू और भोपाल की पूर्व महापौर कृष्णा गौर गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ी और विधायक बनी। भाजपा की इस सबसे सुरक्षित सीट पर सेंध लगाने पीसीसी चीफ कमलनाथ और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह कई सभाएं कर चुके हैं, लेकिन यहां से स्थानीय प्रत्याशी की मांग कांग्रेस के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है।

गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र की समस्याएं

गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में सड़कों की समस्या बनी हुई है। इंडस्ट्रियल एरिया होने के बावजूद यहां पर रोजगार की बड़ी समस्या बनी हुई है। सौंदर्य करण के नाम पर क्षेत्र में विकास तो किया गया। लेकिन मेंटेनेंस का ध्यान नहीं रखा जाता है। इन्हीं सब मुद्दों को लेकर कांग्रेस भाजपा पर हमलावर है।

2018 का चुनाव परिणाम

साल 2018 के विधानसभा चुनाव में भोपाल की गोविंदपुरा विधानसभा सीट से 20 लोगों ने नामांकन पर्चा दाखिल किया था। जिसमें कृष्णा गौर को 1 लाख 25 हजार 487 वोट प्राप्त हुए जबकि कांग्रेस के गिरीश शर्मा को 79,128 वोट मिले थे। इस तरह कृष्णा गौर ने एक बड़े मार्जिन से जीत दर्ज की थी। हालांकि अब गिरीश शर्मा भी सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद भाजपा में शामिल हो गए है। ऐसे में कांग्रेस से कई वरिष्ठ नेता इस सीट से अपनी दावेदारी जाता रहे है।

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