Bhopal MP News: मध्य प्रदेश में फिर गूंजेगी आंदोलन की हुंकार, क्षत्रिय करणी सेना का सरकार को अल्टीमेटम
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में क्षत्रिय करणी सेना ने एक बार फिर बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है। रविवार, 7 सितंबर 2025 को भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष इंदल सिंह राणा और प्रदेश उपाध्यक्ष आशु सिंह ने सरकार के सामने 10 सूत्रीय मांगें रखीं और साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अब समाज सिर्फ ज्ञापन सौंपने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 25 नवंबर 2025 को भोपाल में महा आंदोलन के जरिए अपनी मांगें मनवाने के लिए सड़कों पर उतरेगा।
प्रदेश अध्यक्ष इंदल सिंह राणा ने पत्रकार वार्ता में कहा, "आर्थिक आधार पर आरक्षण हमारा मूल मुद्दा रहा है। जब तक सरकार इस पर ठोस निर्णय नहीं लेती, हम मैदान नहीं छोड़ेंगे। यह लड़ाई केवल क्षत्रिय समाज की नहीं, बल्कि किसानों, जवानों, और युवाओं के भविष्य की है। हमारी मांगें सभी वर्गों के हित में हैं।" प्रदेश उपाध्यक्ष आशु सिंह ने जोड़ा, "मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को हमारा अल्टीमेटम है। अगर हमारी मांगें 25 नवंबर तक नहीं मानी गईं, तो भोपाल की सड़कों पर लाखों लोग उतरेंगे।"

पत्रकार वार्ता में क्या हुआ?
भोपाल के प्रेस क्लब में आयोजित इस पत्रकार वार्ता में क्षत्रिय करणी सेना के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे। इंदल सिंह राणा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, "हमने बार-बार सरकार को अपनी मांगों के बारे में अवगत कराया, लेकिन हर बार हमें सिर्फ आश्वासन मिले। अब समय आ गया है कि हम सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करें।" उन्होंने 10 सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत किया, जिसमें सामाजिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक मुद्दों को शामिल किया गया।
आशु सिंह ने कहा, "हमारी मांगें केवल क्षत्रिय समाज तक सीमित नहीं हैं। हम चाहते हैं कि हरदा कांड जैसे मामलों में दोषियों को सजा मिले, किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम मिले, और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें। हमारी संस्कृति और इतिहास की रक्षा भी हमारी प्राथमिकता है।"
क्षत्रिय करणी सेना की 10 सूत्रीय मांगें
हरदा कांड में सख्त कार्रवाई: हरदा में हुए पटाखा फैक्ट्री विस्फोट (2024) में दोषी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
EWS आरक्षण में वृद्धि: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षण को 10% से बढ़ाकर 20% किया जाए और प्रक्रिया को ऑनलाइन सरल बनाया जाए।
अग्निवीर योजना समाप्त: केंद्र सरकार की अग्निवीर योजना को खत्म कर पुरानी स्थायी सेना भर्ती प्रक्रिया बहाल की जाए।
गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा: गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देकर कठोर कानून बनाए जाएँ और गौशालाओं में सुधार के लिए बजट बढ़ाया जाए।
क्षत्रिय समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व: क्षत्रिय समाज को उनकी जनसंख्या के अनुपात में विधानसभा और लोकसभा में टिकट दिए जाएं।
किसानों के लिए MSP का कानूनी दर्जा: सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा दिया जाए और फसल नुकसान की भरपाई समय पर हो।
इतिहास और संस्कृति की रक्षा: महापुरुषों के अपमान पर रोक लगे, भोजशाला सर्वेक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक हो, और इतिहास की किताबों में विकृतियों को सुधारा जाए।
आर्थिक आधार पर आरक्षण: जातिगत आरक्षण की समीक्षा हो और आरक्षण का आधार केवल आर्थिक स्थिति हो।
एट्रोसिटी एक्ट में सुधार: SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम में संशोधन किया जाए, ताकि बिना जांच के गिरफ्तारी न हो और दोष सिद्ध होने पर ही कार्रवाई हो।
मठ-मंदिरों की जमीन: मठ-मंदिरों की जमीन को उनके नाम दर्ज किया जाए और अवैध कब्जों को हटाया जाए।
आंदोलन की तैयारी: 25 नवंबर को भोपाल में महा आंदोलन
क्षत्रिय करणी सेना ने ऐलान किया है कि 25 नवंबर 2025 को भोपाल के जंबूरी मैदान में एक महा आंदोलन आयोजित किया जाएगा। इस आंदोलन में मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, और छत्तीसगढ़ से भी कार्यकर्ता शामिल होंगे। इंदल सिंह राणा ने कहा, "हमारा यह आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ होगा। हम सरकार को अपनी मांगें मनवाने के लिए मजबूर करेंगे।"
संगठन ने पहले भी 2023 में भोपाल में 21 सूत्रीय मांगों को लेकर बड़े आंदोलन किए थे, जिनमें आर्थिक आधार पर आरक्षण, एट्रोसिटी एक्ट में सुधार, और गौ रक्षा जैसे मुद्दे शामिल थे। उस समय भी करणी सेना ने जंबूरी मैदान में हजारों कार्यकर्ताओं को एकत्रित कर अपनी ताकत दिखाई थी। इस बार संगठन का दावा है कि यह आंदोलन और भी बड़ा होगा।
आरक्षण, अग्निवीर योजना, और गौ रक्षा
आर्थिक आधार पर आरक्षण क्षत्रिय करणी सेना का सबसे प्रमुख मुद्दा रहा है। इंदल सिंह राणा ने कहा, "जातिगत आरक्षण ने समाज को बाँटने का काम किया है। हम चाहते हैं कि आरक्षण केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर हो, ताकि गरीब सवर्णों को भी अवसर मिले।" उन्होंने EWS आरक्षण को 20% करने और प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग को दोहराया।
अग्निवीर योजना को लेकर भी संगठन ने कड़ा रुख अपनाया है। आशु सिंह ने कहा, "अग्निवीर योजना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। हम चाहते हैं कि पुरानी स्थायी भर्ती प्रणाली बहाल हो, ताकि जवानों को सम्मान और स्थिरता मिले।"
गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग भी संगठन का पुराना एजेंडा रहा है। राणा ने कहा, "गौ माता हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। हम चाहते हैं कि गौशालाओं के लिए बजट बढ़े और गोबर-गोमूत्र की खरीद के लिए सरकारी व्यवस्था हो।"
हरदा कांड और राजनीतिक प्रतिनिधित्व
हरदा कांड (2024 में हरदा में हुए पटाखा फैक्ट्री विस्फोट) में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग ने इस आंदोलन को और तीव्र किया है। इंदल सिंह राणा ने कहा, "हरदा कांड में कई निर्दोष लोग मारे गए। दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।"
साथ ही, संगठन ने क्षत्रिय समाज को उनकी जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग की है। आशु सिंह ने कहा, "मध्य प्रदेश में क्षत्रिय समाज की जनसंख्या लगभग 15% है। हम चाहते हैं कि BJP और कांग्रेस दोनों पार्टियां विधानसभा और लोकसभा चुनाव में क्षत्रिय उम्मीदवारों को उचित हिस्सेदारी दें।"
इतिहास और संस्कृति की रक्षा
करणी सेना ने इतिहास और संस्कृति की रक्षा को भी अपनी मांगों का हिस्सा बनाया है। भोजशाला सर्वेक्षण की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और महापुरुषों के अपमान पर रोक लगाने की मांग जोर-शोर से उठाई गई। राणा ने कहा, "हमारी संस्कृति और इतिहास को विकृत करने की कोशिशें हो रही हैं। भोजशाला का सच सामने आना चाहिए। हम चाहते हैं कि स्कूलों की किताबों में सही इतिहास पढ़ाया जाए।"
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश सरकार ने अभी तक इस पत्रकार वार्ता और मांगों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, SP भोपाल राकेश सिंह ने कहा, "हम आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी भी तरह की अशांति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के कार्यालय से एक अनौपचारिक बयान में कहा गया कि सरकार सभी समुदायों की मांगों पर विचार करती है और उचित समय पर जवाब देगी।
करणी सेना का इतिहास और पिछले आंदोलन
क्षत्रिय करणी सेना इससे पहले भी मध्य प्रदेश में कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व कर चुकी है। 2023 में भोपाल के जंबूरी मैदान में संगठन ने 21 सूत्रीय मांगों को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन किया था, जिसमें आर्थिक आधार पर आरक्षण, एट्रोसिटी एक्ट में सुधार, और गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग शामिल थी। उस समय संगठन के तत्कालीन अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुर ने भूख हड़ताल शुरू की थी, जिसने सरकार पर दबाव बनाया था।
2023 में ही करणी सेना ने 100 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा की थी, जिसने BJP और कांग्रेस की सियासत में खलबली मचा दी थी। इस बार भी संगठन का दावा है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे एक नई राष्ट्रीय पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।












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