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MP News: जानिए कौन हैं ‘कंबल वाले बाबा’ और क्यों पड़ा इनके शिविर पर छापा — जब्त हुई कई तरह की दवाइयां

MP News kambal Wala Baba: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के चंदनगांव के पास 'कंबल वाले बाबा' के आयोजित स्वास्थ्य शिविर पर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने शुक्रवार (7 नवंबर 2025) रात को छापा मारा। बाबा, जो गुजरात के रहने वाले गणेश यादव हैं, लकवा सहित कई असाध्य बीमारियों का इलाज काले कंबल ओढ़ाकर करने का दावा कर रहे थे।

छापे में चूर्ण, तेल और अन्य दवाओं की बिक्री पर रोक लग गई, और नमूने लैब भेजे गए। शिविर जारी रहा, लेकिन दवाओं का विक्रय बंद हो गया। बाबा के दरबार में भीड़ लगी रही, लेकिन कार्रवाई से सवाल उठे - क्या यह चमत्कार है या धोखाधड़ी?

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कंबल वाले बाबा का नाम गुजरात से राजस्थान, बिहार तक फैला है, जहां वे कैंसर, शुगर, लकवा जैसी बीमारियों का 'तत्काल इलाज' का दावा करते हैं। लेकिन कई जगह विवादों में फंसे। आइए, जानते हैं इस छापे की पूरी कहानी - बाबा का इतिहास से लेकर कार्रवाई का कारण, जब्त माल और भविष्य की जांच तक।

छिंदवाड़ा शिविर पर छापा: कंबल ओढ़ाकर इलाज, 1200 रुपये में चूर्ण-तेल

छिंदवाड़ा जिले के चंदनगांव के पास आयोजित इस शिविर में गुजरात निवासी गणेश यादव उर्फ 'कंबल वाले बाबा' काले कंबल घुमाकर लकवा, कैंसर, शुगर जैसी बीमारियों का इलाज करने का दावा कर रहे थे। शिविर में सैकड़ों मरीज पहुंचे, जिन्हें कंबल ओढ़ाने के बाद मालिश की जाती, और 1200 रुपये में चूर्ण व तेल बेचा जाता। सीएमएचओ डॉ. नरेश गुन्नाड़े ने बताया, "सूचना मिली कि बिना लाइसेंस के दवाएं बेची जा रही हैं। पुलिस के साथ रात 8 बजे छापा मारा।"

टीम ने मौके से चूर्ण, तेल और अन्य सामग्री जब्त की। बाबा ने दावा किया, "यह चमत्कारिक इलाज है, कोई दवा नहीं।" लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने ड्रग एक्ट के तहत नमूने लैब भेजे। गुन्नाड़े ने कहा, "बिना अनुमति दवा बेचना अपराध है। शिविर जारी रहेगा, लेकिन विक्रय बंद।" शनिवार को शिविर में भीड़ लगी रही, लेकिन दवाओं का स्टॉल बंद था। स्थानीयों ने कहा, "बाबा के इलाज से कई ठीक हुए, लेकिन सच्चाई जांच हो।"

'कंबल वाले बाबा' कौन हैं? गुजरात से चमत्कार का दावा, राजस्थान-बिहार तक विवाद

'कंबल वाले बाबा' यानी गणेश भाई गुर्जर (उम्र 50 वर्ष) गुजरात के रहने वाले हैं। वे काले कंबल घुमाकर असाध्य रोगों का इलाज करने का दावा करते हैं। उनका तरीका: मरीज को कंबल ओढ़ाना, मंत्र फूंकना, मालिश, फिर चूर्ण-तेल बेचना। गुजरात से शुरू हुआ यह 'चमत्कार' राजस्थान (राजसमंद, पाली), बिहार (गया), मध्य प्रदेश तक फैला। 2023 में राजसमंद में 15 दिन का शिविर लगाया, जहां हजारों पहुंचे। बाबा कहते हैं, "कंबल में शक्ति है, 5-7 दिन में असर।"

लेकिन विवादों से घिरे:

  • राजस्थान (2022): पाली के मांडा गांव में शिविर पर ग्रामीणों का विरोध - गंदगी, भीड़। बाबा को हटाना पड़ा।
  • बिहार (2025): गया में स्वास्थ्य शिविर में 500 रुपये की फीस का आरोप। बाबा ने इनकार किया, आयोजकों पर डाला।
  • अन्य: कई मौतों के बाद जांच, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। बाबा का दावा: "मैं पैसा नहीं लेता, आयोजक लेते हैं।"

छिंदवाड़ा शिविर 5 नवंबर से शुरू, 10 दिनों का। मरीजों ने कहा, "कंबल ओढ़ने से आराम मिला।" लेकिन डॉक्टरों ने चेतावनी दी, "यह अंधविश्वास है, वैज्ञानिक इलाज लें।"

छापे का कारण: बिना लाइसेंस दवा बिक्री, कैंसर-लकवा का झूठा इलाज - स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता
कार्रवाई की सूचना स्थानीय स्तर पर मिली। डॉ. गुन्नाड़े ने कहा, "बाबा कैंसर, लकवा का इलाज दावा कर रहे थे, लेकिन दवाएं बिना लाइसेंस।" जब्त माल: 50 लीटर तेल, 100 किलो चूर्ण। नमूने भोपाल लैब भेजे। ड्रग इंस्पेक्टर ने कहा, "मिलावट साबित हुई तो FIR।" शिविर आयोजकों पर 5000 रुपये जुर्माना संभव। बाबा ने कहा, "यह चमत्कार है, दवा नहीं।"

मध्य प्रदेश में ऐसे शिविरों पर नजर: 2024 में 20 छापे, 5 FIR। स्वास्थ्य विभाग ने हेल्पलाइन शुरू की।
प्रभाव और चेतावनी: मरीजों का अंधविश्वास, स्वास्थ्य जोखिम - डॉक्टरों की सलाह
शिविर में सैकड़ों मरीज - लकवा, शुगर। एक मरीज ने कहा, "पैसे बर्बाद हुए, लेकिन विश्वास था।" डॉक्टरों ने चेतावनी दी, "कंबल से लकवा नहीं ठीक होता। वैज्ञानिक इलाज लें।" MP में ऐसे बाबाओं से 20% मरीज प्रभावित।

चमत्कार या धोखा? छापा से जागरूकता

छिंदवाड़ा छापा कंबल वाले बाबा के दावों पर सवाल खड़े करता है। चूर्ण-तेल जब्त - जांच से सच्चाई सामने आएगी। सरकार को ऐसे शिविरों पर सख्ती करनी होगी। मरीज सतर्क रहें - विज्ञान पर भरोसा। क्या बाबा का जादू टूटेगा? समय बताएगा।

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