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MP News: इंदौर में CM मोहन यादव से विजयवर्गीय बोले- “अच्छा हुआ प्रभार नहीं, आपके नाम से अफसर हमें चमकाते थे"

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में रविवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में हुई उच्चस्तरीय बैठक में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। राष्ट्रीय महासचिव और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से हल्के-फुल्के अंदाज में कहा - "अच्छा हुआ आपने बता दिया कि इंदौर का प्रभार आपके पास नहीं है।

गजट नोटिफिकेशन में तो लिखा है कि आप प्रभारी हैं, इसलिए आपके नाम से अधिकारी हमें चमकाते थे।" इस पर सभागार में ठहाके गूंजे और CM मुस्कुराते हुए बोले - "जिसको जो देना था, वह दे दिया। अब जो बच गया, वह मेरे पास है।"

Kailash Vijayvargiya told CM Mohan Yadav in Indore It is good that he did not take charge

यह बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। बैठक में मेट्रो प्रोजेक्ट, विकास कार्य और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा हो रही थी, लेकिन विजयवर्गीय की यह टिप्पणी बैठक का हाइलाइट बन गई। विजयवर्गीय ने मेट्रो एमडी को भी साफ हिदायत दी कि "मर्जी से प्रस्ताव न बदलें, अंडरग्राउंड रूट ही रखें।" वनइंडिया हिंदी की विशेष रिपोर्ट में जानिए बैठक का पूरा घटनाक्रम, विजयवर्गीय-CM की नोकझोंक का बैकग्राउंड, मेट्रो रूट पर हिदायत और राजनीतिक असर।

बैठक का पूरा घटनाक्रम: विकास चर्चा से हास्य तक

ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इंदौर के विकास कार्यों की समीक्षा ले रहे थे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सांसद शंकर लालवानी, विधायक और अधिकारी मौजूद थे।

विजयवर्गीय की टिप्पणी: इंदौर के प्रभारी मंत्री पद पर चर्चा के दौरान विजयवर्गीय ने हंसते हुए कहा, "हम तो हमेशा मुख्यमंत्री को ही इंदौर का प्रभारी मानते आए हैं। गजट में लिखा है आप प्रभारी हैं, इसलिए अधिकारी आपके नाम से हमें चमकाते थे। अच्छा हुआ आपने बता दिया कि प्रभार आपके पास नहीं है।"

CM का जवाब: मोहन यादव मुस्कुराते हुए बोले, "जिसको जो देना था, वह दे दिया। अब जो बच गया, वह मेरे पास है।" सभागार में हल्का हास्य का माहौल बन गया।

मेट्रो पर हिदायत: विजयवर्गीय ने मेट्रो एमडी श्रीकृष्ण चैतन्य से पूछा, "बैठक में क्या प्रस्ताव रख रहे हो?" एमडी ने कहा, "अंडरग्राउंड रूट ही।" विजयवर्गीय ने कहा, "मर्जी से न बदलना। खर्चा भी बताना।" बैठक में इंदौर मेट्रो, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, सड़क और जल निकासी पर चर्चा हुई।

प्रभारी मंत्री विवाद का बैकग्राउंड: "इंदौर छोड़ दिया"

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में कहा था, "मैं इंदौर का प्रभारी मंत्री नहीं हूं। जिलों का बंटवारा कर दिया। इंदौर खाली छोड़ दिया।" यह बयान विजयवर्गीय के पुराने प्रभाव को देखते हुए आया था। विजयवर्गीय लंबे समय से इंदौर के "अनौपचारिक बॉस" माने जाते हैं। गजट में CM को प्रभारी दिखाया गया था, लेकिन अब स्पष्ट कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि यह "पावर बैलेंस" की रणनीति है। विजयवर्गीय का हल्का तंज इसी का हिस्सा था।

मेट्रो रूट पर विजयवर्गीय की सख्ती: "अंडरग्राउंड ही रखो"

इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट पर विजयवर्गीय की पकड़ मजबूत है। उन्होंने एमडी को साफ कहा, "नया विकल्प न रखना। अंडरग्राउंड रूट ही पेश करो।" इंदौर मेट्रो फेज-1 में अंडरग्राउंड और एलिवेटेड दोनों रूट हैं। विजयवर्गीय शहर की सौंदर्यता और ट्रैफिक के लिए अंडरग्राउंड पर जोर देते हैं।

हास्य या नोकझोंक?

यह बातचीत हल्की लगती है, लेकिन गहराई में इंदौर की राजनीति का संकेत है। विजयवर्गीय इंदौर के "किंगमेकर" हैं, जबकि CM मोहन यादव OBC चेहरा। 2028 चुनाव से पहले यह "पावर शेयरिंग" का संदेश है। कांग्रेस ने तंज कसा, "BJP में अंदरूनी खींचतान।" BJP ने कहा, "यह हल्का-फुल्का मजाक था। विकास पर फोकस है।"

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