International Tiger Day 2022: इस विश्व विख्यात टाइगर रिजर्व से जंगलों में भेजे जाते हैं बाघ, बनाया रिकॉर्ड
उमरिया, 29 जुलाई। विश्व विख्यात बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के सरंक्षण के साथ-साथ प्रदेश के अलावा अन्य बाघ विहीन जंगलों में बाघों की पुनर्स्थापना का केंद्र बन गया है। बांधवगढ़ से अब तक 19 बाघों को बाघ विहीन जंगलों में भेजा गया है। बांधवगढ़ के बाघ सरंक्षण के लिए चुनौती बने जंगली हाथियों के प्रबंधन के लिए टाइगर रिजर्व बड़े बदलाव कर रहा है। बताते चलें कि 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जा रहा है।

बाघ पुनर्स्थापना का केंद्र बना बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व
मशहूर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों की सघनता और सहजता से बाघ-दर्शन के लिए दुनिया भर में विश्व विख्यात है लेकिन बांधवगढ़ की 1 और खास बात यह है कि बांधवगढ़ मध्य प्रदेश सहित अन्य बाघ विहीन जंगलों, टाइगर रिजर्वों में बाघ पुनर्स्थापना का केंद्र बन गया है। टाइगर रिजर्व में वर्ष 2009 के बाद से अब तक 19 बाघ-बाघिन अन्य टाइगर रिजर्वों और जंगलों में बाघों की पुनर्स्थापना के लिए भेजे गए हैं जिसमें 9 बाघिन एवं 10 बाघ शामिल हैं।

कई जगह भेजे गए बाघ
बांधवगढ़ से बाघ संजय टाइगर रिजर्व, नौरादेही अभ्यारण्य, मुकुंदपुर टाइगर सफारी, पन्ना टाइगर रिजर्व, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, वन विहार भोपाल के अलावा ओडिशा के सतकोसिया अभ्यारण्य भेजे गए हैं। पार्क के जानकार ने बताया कि बांधवगढ़ की इस खासियत के पीछे बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ बांधवगढ़ में बाघों के प्रजनन, आवास और रहवास के लिए अनुकूल वातावरण को जिम्मेदार मानते हैं और इसे 1 उपलब्धि के तौर पर देखते हैं।

दुनियाभर में बाघों के मामले में सबसे ज्यादा घनत्व
1526 वर्ग किलोमीटर में फैले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों के स्वच्छंद विचरण के लिए महज 426 वर्ग किलोमीटर का कोर क्षेत्र मौजूद है। शेष बफर इलाके में 105 गांव आबाद होने से बाघों के विचरण में बाधा उत्पन्न होती है और यही वजह भी है कि घनत्व में बाघ यहां दुनिया भर में सर्वाधिक हैं। पर्यटकों को यहां सहजता से बाघ के दर्शन हो जाते हैं। साल 2018 की बाघ गणना में बांधवगढ़ के 118/124 बाघों की मौजूदगी के आंकड़े मिले हैं। बेहतर सरंक्षण के कारण जानकार वर्ष 2022 की गणना में यह संख्या बढ़कर 150 से ज्यादा होने का दावा कर रहे हैं। बांधवगढ़ को पास से देखने जानने वाले लोगों का भी मानना है कि बांधवगढ़ के बाघों की बात निराली है। वन्य जीव प्रेमी बांधवगढ़ को बाघों का स्वर्ग कहते हैं।

जंगली हाथियों के कारण टाइगर कंजर्वेशन में आ रही चुनौती
बांधवगढ़ में साल 2018 के बाद जंगली हाथियों ने अपना रहवास बना लिया है। जिसके कारण पार्क प्रबंधन को टाइगर कंजर्वेशन में 1 बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा, 4 वर्षों के अंतराल में जंगली हाथियों की संख्या बढ़ती जा रही है जो अब 50 के आस-पास है लेकिन टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने जंगली हाथियों के आ जाने से बाघ प्रबंधन में हो रही कठिनाई को रोकने रणनीति में आवश्यक बदलाव किए और जंगली हाथियों के अनुकूल भोजन पानी के स्रोत, टाइगर रिजर्व के जंगलों के भीतर विकसित किये ताकि जंगली हाथी बाघ सरंक्षण को प्रभावित न कर सकें।

बांधवगढ़ के बाघों की बादशाहत बरकरार
बाघ विहीन हो चुके पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की पुनर्स्थापना में बांधवगढ टाइगर रिजर्व का अहम सहयोग रहा है। इसके अलावा संजय टाइगर रिजर्व में भी बांधवगढ के बाघ भेजकर वहां बाघों की संख्या समृद्ध करने में कारगर रहे हैं। इस समय मध्यप्रदेश के सभी बाघ विहीन जंगलों में बांधवगढ़ के बाघ- बाघों की वंशवृद्धि करने में मददगार साबित हो रहे हैं एवं प्रदेश के जंगलों में बांधवगढ़ के बाघों की बादशाहत बरकरार है।












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