MP News: इंदौर में कड़ाके की ठंड से राहत, कलेक्टर का बड़ा फैसला, कक्षा 1 से 8वीं तक के स्कूल 3 दिन बंद
इंदौर जिले में शीतलहर और कड़ाके की ठंड के बीच बच्चों को बड़ी राहत मिली है। लगातार गिरते तापमान और घने कोहरे को देखते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने जिले के सभी शासकीय, अशासकीय और सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक के विद्यार्थियों के लिए तीन दिन का अवकाश घोषित कर दिया है।
यह अवकाश 6, 7 और 8 जनवरी 2026 तक प्रभावी रहेगा। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, क्योंकि ठंड और कोहरे के कारण उन्हें स्कूल आने-जाने में गंभीर परेशानी हो रही थी।

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कक्षा 9वीं से 12वीं तक के स्कूल खुले रहेंगे, लेकिन उनके संचालन समय में बदलाव किया गया है। अब इन कक्षाओं की पढ़ाई सुबह 10 बजे से शुरू होगी। कलेक्टर ने कहा कि शीतलहर के चलते छोटे बच्चों में सर्दी, खांसी, बुखार और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के छात्रों के लिए अवकाश आवश्यक था।
तापमान 5 डिग्री तक, कोहरे से जनजीवन प्रभावित
मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में न्यूनतम तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। सुबह के समय घना कोहरा छाया रहता है, जिससे विजिबिलिटी कई इलाकों में 50 से 100 मीटर तक सिमट जाती है। ठंडी हवाओं और उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण ठंड का असर और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह शीतलहर का दौर अभी 10 से 15 दिन तक जारी रह सकता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, ऐसे में ठंड में स्कूल जाना उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। ठंडी हवा और कोहरे के संपर्क में आने से बच्चों में निमोनिया, ब्रोंकाइटिस और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
अभिभावकों ने ली राहत की सांस, फैसले का स्वागत
कलेक्टर के इस फैसले से अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। कई माता-पिता ने कहा कि सुबह-सुबह बच्चों को कड़ाके की ठंड और कोहरे में स्कूल भेजना बेहद मुश्किल हो गया था। सोशल मीडिया पर भी कलेक्टर के निर्णय की जमकर सराहना हो रही है। एक अभिभावक ने कहा, "सुबह कोहरा इतना घना होता है कि रास्ता तक नजर नहीं आता। बच्चों की सुरक्षा सबसे जरूरी है, यह फैसला समय पर लिया गया है।"
शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया: "बच्चों की सेहत सर्वोपरि"
शिक्षक संगठनों ने भी प्रशासन के इस कदम को सही ठहराया है। शिक्षकों का कहना है कि पढ़ाई जरूरी है, लेकिन बच्चों की सेहत उससे कहीं ज्यादा अहम है। कुछ शिक्षक संगठनों ने यह भी सुझाव दिया है कि यदि ठंड का प्रकोप और बढ़ता है, तो कक्षा 9 से 12वीं तक के छात्रों के लिए भी अवकाश या ऑनलाइन कक्षाओं पर विचार किया जाना चाहिए।
अन्य जिलों में भी असर, कई जगह स्कूल बंद
मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी ठंड का असर साफ नजर आ रहा है। ग्वालियर-चंबल संभाग के कई जिलों में पहले से ही स्कूलों में अवकाश घोषित किया जा चुका है। भोपाल और उज्जैन में भी प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। रायसेन, विदिशा और आसपास के कुछ जिलों में प्राथमिक स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है।
ठंड में एहतियात जरूरी
इंदौर कलेक्टर का यह फैसला बच्चों की सुरक्षा और सेहत को प्राथमिकता देने वाला कदम माना जा रहा है। अगले कुछ दिन ठंड और कोहरे का असर बना रह सकता है, ऐसे में अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रशासन ने अपील की है कि लोग मौसम विभाग के अलर्ट पर ध्यान दें और बच्चों-बुजुर्गों का विशेष ख्याल रखें। वनइंडिया हिंदी आगे भी मौसम और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।












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