Bhopal News: कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या के विरोध में हमीदिया अस्पताल के डॉक्टर भी हड़ताल पर
कोलकाता में 8 अगस्त को एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप के बाद हत्या के खिलाफ देशभर में डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी है। इस विरोध प्रदर्शन के तहत, भोपाल में एम्स और हमीदिया अस्पताल के डॉक्टर भी गुरुवार रात 12 बजे से हड़ताल पर चले गए।
प्रदेश स्तरीय हड़ताल
जूडा (Junior Doctors Association) के प्रवक्ता कुलदीप गुप्ता ने बताया कि यह हड़ताल प्रदेश स्तर की है, जिसमें प्रदेशभर से लगभग 3,000 डॉक्टर शामिल हो रहे हैं। हड़ताल के चलते हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में रोजाना एक हजार से अधिक मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। गुरुवार रात 12 बजे से 250 से अधिक जूनियर डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया है।

हड़ताल के प्रबंधन के लिए निर्देश
हड़ताल की स्थिति को संभालने के लिए भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एन सिंह ने सभी डॉक्टरों की छुट्टियां निरस्त कर दी हैं। उन्होंने मेडिकल टीचर्स को इमरजेंसी, ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर, और वार्ड में तैनात करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर मेडिकल इंटर्न को भी तैनात करने का आदेश दिया है। डीन ने सभी विभागों के प्रमुखों से इस आदेश पर अमल की रिपोर्ट भी मांगी है।
यह प्रदर्शन डॉक्टरों की सुरक्षा और सम्मान की मांग को लेकर हो रहा है और इसके चलते चिकित्सा सेवाओं में काफी दिक्कतें उत्पन्न हो रही हैं।
जूडा प्रवक्ता कुलदीप गुप्ता की जानकारी
जूडा (Junior Doctors Association) के प्रवक्ता कुलदीप गुप्ता ने बताया कि डॉक्टर सेंट्रल डॉक्टर प्रोटेक्शन एक्ट की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के डीन को हड़ताल से संबंधित लेटर सौंपा है। हड़ताल के दौरान केवल इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध रहेंगी, जबकि रूटीन और ओपीडी सेवाओं में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल जारी रहेगी।
एम्स और हमीदिया में हड़ताल की स्थिति
भोपाल एम्स के 600 से अधिक रेजिडेंट डॉक्टर भी हड़ताल पर हैं। वे कोलकाता की महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोपियों को सख्त सजा देने की मांग कर रहे हैं। हड़ताल के चलते चिकित्सा सेवाओं पर प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन नर्सिंग स्टाफ ने व्यवस्थाएं संभालने के लिए मोर्चा संभाला है ताकि मरीजों को निरंतर सेवाएं मिलती रहें।
हड़ताल का असर और व्यवस्थाएं
हड़ताल के कारण रूटीन और ओपीडी सेवाओं में बाधा उत्पन्न हो रही है, जबकि इमरजेंसी सेवाएं जारी हैं। यह कदम डॉक्टरों की सुरक्षा और उनके पेशेवर अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया है, और इसके चलते चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।












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