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Bhopal News: मोबाइल पर रील बनाने की लत बन रही आंखों की रोशनी के लिए घातक, GMC की रिसर्च में हुआ खुलासा

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में इंग्लिश में सामने आया कि रील देखने की लत आंखों की रोशनी और नींद को बुरी तरह प्रभावित करती है।

habit of making reels on mobile is becoming fatal for eyesight, revealed in GMCs research

Bhopal News: रील देखने की लत आंखों की रोशनी और नींद को बुरी तरह से प्रभावित कर रही है। जेपी, हमीदिया सहित शहर के निजी अस्पताल के आंकड़ों से यह बात सामने आई है। इन अस्पतालों में अनिद्रा, सिर दर्द व माइग्रेन जैसी समस्याओं के साथ आने वाले 20 फीसदी मरीजों ने माना कि वे देर रात तक रील देखते हैं। इसका खुलासा गांधी मेडिकल कॉलेज जीएमसी के नेत्र विभाग के शोध में हुआ है। यह अध्यन 1 साल के दौरान 600 मरीजों पर किया गया।

मोबाइल की डिस्प्ले छीन रही आंखों की रोशनी

ओपीडी में आने वाले 67.5 फीसदी युवा जिनकी आयु 21 से 30 साल के बीच है और जिनका स्क्रीन टाइम 3 घंटे से अधिक है। उनमें सीवीएस के लक्षण देखे गए। ओपीडी में आने वाले मरीज इस बात को जानने के बाद भी गैर जरूरी समय में फोन को दूर नहीं रख पाते हैं। स्मार्टफोन कंप्यूटर लैपटॉप अब जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। मगर सही इस्तेमाल से बुरे प्रभावों से बचा जा सकता है। जरूरी है कि लोग धीरे-धीरे लत छोड़े, दोस्तों से मिले, लोगों से बात करें। 20 मिनट तक लगातार डिस्प्ले पर काम करने के बाद 20 सेकंड टाइम तक 20 फीट दूरी की चीजों को देखें।

आंखों में आती है यह समस्याएं

मोबाइल पर रील इत्यादि देखने से और अत्यधिक डिस्पले स्क्रीन पर काम करने से आंखों में सूजन, भारीपन, फोकस ना कर पाना, ड्राइनेस, खुजली, जलन, सिर, कंधे गर्दन पीठ में दर्द, सोते वक्त आंखों में चमक महसूस होना।

भोपाल एम्स में होगी सर्वाइकल कैंसर की पहचान

महिलाओं में सबसे ज्यादा होने वाले सर्वाइकल कैंसर की अब जल्द पहचान हो सकेगी इसके लिए एम्स ने कायासर्वी नामक डिवाइस बनाई है। एम्स भोपाल के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और अमेरिकन रिसर्च पार्टनर ने इसे विकसित किया है। केंद्र ने प्रोजेक्ट में 80 लाख दिए हैं। चिकित्सकों के अनुसार सर्वाइकल कैंसर एचपीवी नामक यौन संचारित वायरस से होने वाली बीमारी है। कमजोर इम्यूनिटी से जोखिम और बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए हर 5 साल में पैप स्मीयर टेस्ट और गायनेकोलॉजिकल जांच करवाते रहें।

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