Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Gwalior: अंबेडकर पर अंग्रेज एजेंट वाली टिप्पणी, वकील अनिल मिश्रा की क्यों नहीं हुए गिरफ्तार, जानिए पूरा मामला

MP News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में एक छोटी-सी सोशल मीडिया पोस्ट ने ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है कि राजनीति से लेकर समाज तक सब गरम हो गए हैं। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और सीनियर वकील अनिल मिश्रा ने डॉ भीमराव अंबेडकर पर ऐसी टिप्पणी की, जिसे लोग 'अपमानजनक' बता रहे हैं।

मिश्रा ने अंबेडकर को "अंग्रेजों का एजेंट" और संविधान को "जलाने लायक" बताया, जिसके बाद FIR दर्ज हुई। लेकिन सबसे बड़ा ड्रामा तब हुआ जब मिश्रा दर्जनों वकीलों के साथ खुद गिरफ्तारी देने ग्वालियर SP ऑफिस पहुंचे। पुलिस ने न सिर्फ इंकार कर दिया, बल्कि उन्हें नोटिस थमा दिया।

Gwalior Lawyer Anil Mishra not arrested for his comments on Ambedkar as a British agent

यह मामला सिर्फ एक टिप्पणी का नहीं, बल्कि डॉ अंबेडकर की विरासत, संविधान की गरिमा और सामाजिक न्याय के सवालों से जुड़ा है।आइए, इस पूरे घटनाक्रम को स्टेप बाय स्टेप समझते हैं-क्या हुआ, क्यों हुआ, और आगे क्या हो सकता है।

एक पोस्ट ने मचाया बवाल

सब कुछ 5-6 अक्टूबर को शुरू हुआ। अनिल मिश्रा, जो ग्वालियर हाईकोर्ट में बड़े-बड़े केस लड़ने वाले वकील हैं और कभी बार एसोसिएशन के चेयरमैन भी रह चुके हैं, ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की। इसमें उन्होंने डॉ. अंबेडकर पर तीखा हमला बोला। मिश्रा ने लिखा कि अंबेडकर "अंग्रेजों के एजेंट" थे और उन्होंने जो संविधान बनाया, वह "देश के लिए घातक" है। यहां तक कि उन्होंने कहा, "संविधान को जलाना चाहिए।" यह पोस्ट तुरंत वायरल हो गई।

यह पहली बार नहीं है जब मिश्रा ने ऐसी टिप्पणियां की हों। पहले भी वे हिंदू देवी-देवताओं पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ बोलते रहे हैं। लेकिन इस बार बात संविधान निर्माता पर गई, तो आग लग गई। भीम आर्मी जैसे संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, तो सड़क पर उतर आएंगे। अशोकनगर जैसे आसपास के जिलों में भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। BSP और अहिरवार समाज संगठन ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें मिश्रा पर तुरंत केस दर्ज करने की मांग की गई।

FIR दर्ज: पुलिस ने क्यों की कार्रवाई?

6 अक्टूबर की शाम को ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने कमर कस ली। विभिन्न शिकायतों पर अनिल मिश्रा के खिलाफ IPC की धारा 153A (समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाना), 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना), 505(2) (सार्वजनिक शांति भंग करने वाली अफवाहें) और IT एक्ट की धारा 66A जैसी धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली। FIR में साफ लिखा गया कि मिश्रा की पोस्ट "अंबेडकर की छवि को धूमिल करने और समाज में तनाव फैलाने वाली" है। पुलिस ने तुरंत मिश्रा को नोटिस जारी किया, जिसमें उनसे पूछा गया कि वे अपना पक्ष रखें।

लेकिन मिश्रा ने नोटिस का इंतजार नहीं किया। उन्होंने खुद को 'बेगुनाह' बताते हुए कहा, "मैंने कुछ भी ऐसा नहीं कहा जिससे कानून टूटा हो। हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां हो रही हैं, तो पुलिस क्यों चुप है?" मिश्रा का कहना था कि उनका बयान "इतिहास की सच्चाई" पर आधारित था, न कि अपमान पर। लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया, क्योंकि ग्वालियर जैसे शहर में अंबेडकर जयंती पर हमेशा तनाव रहता है।

SP ऑफिस में गिरफ्तारी का नाटक

FIR दर्ज होते ही 7 अक्टूबर की सुबह अनिल मिश्रा का असली ड्रामा शुरू हुआ। वे दर्जनों वकीलों, समर्थकों और 'रक्षक मोर्चा' के नेताओं के साथ ग्वालियर SP ऑफिस पहुंचे। हाथों में तख्तियां लिए, नारे लगाते हुए उन्होंने कहा, "मुझे गिरफ्तार कर लो, मैं खुद आ गया हूं।" मिश्रा ने मीडिया से बात की: "ये विदेशी जातंकवादी (अंबेडकर समर्थकों पर तंज) नहीं सुधरेंगे। मैं अंबेडकर के विरोध में रहूंगा।" उनके साथी वकील चिल्ला रहे थे, "अनिल भाई को छोड़ो, अन्यथा हाईकोर्ट बंद!"

SP ऑफिस में हंगामा मच गया। लेकिन पुलिस ने साफ मना कर दिया। SP प्रतीक ठाकुर ने कहा, "गिरफ्तारी का समय अभी नहीं आया। जांच चल रही है।" इसके बजाय, मिश्रा को फिर नोटिस थमा दिया गया और कहा गया कि वे स्टेशन पर हाजिर हों। मिश्रा लौटे तो नारे लगाते हुए: "जेल जाना है, तो जेल चले जाएंगे।" यह सीन सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, और लोग दो हिस्सों में बंट गए-कुछ ने मिश्रा को 'शेर' कहा, तो कुछ ने 'ड्रामा किंग'।

संविधान का असली 'निर्माता' कौन? सरल शब्दों में समझिए

अब आते हैं विवाद की जड़ पर-डॉ भीमराव अंबेडकर को "भारत के संविधान के पिता" क्यों कहा जाता है? मिश्रा जैसे लोग कहते हैं कि अंबेडकर ने अकेले संविधान नहीं लिखा, तो क्या वे 'निर्माता' नहीं? चलिए, इसे आसान भाषा में तोड़ते हैं।

भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया, और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। यह दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां हैं। संविधान सभा (1946-49) में 299 सदस्य थे, जिन्होंने 2 साल 11 महीने बहस की। लेकिन मुख्य भूमिका तीन लोगों की थी:

डॉ. भीमराव अंबेडकर: असली 'आर्किटेक्ट': अंबेडकर संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी (मसौदा समिति) के चेयरमैन थे। यह 7 सदस्यों की कमिटी थी, जिसने संविधान का फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया। अंबेडकर ने अमेरिका, ब्रिटेन, आयरलैंड जैसे देशों के संविधानों से प्रेरणा ली। उन्होंने मौलिक अधिकार, समानता, आरक्षण जैसी बातें जोड़ीं। सभा में 2,473 संशोधन आए, जिनमें से ज्यादातर को अंबेडकर ने ही डिफेंड किया। उनकी बौद्धिकता और दलित-उत्पीड़ितों के हक की लड़ाई ने उन्हें 'संविधान निर्माता' का खिताब दिलाया। बिना उनके, संविधान इतना न्यायपूर्ण न होता।

सर बेनगल नरसिंह राव (बी.एन. राव): 'प्रारंभिक ड्राफ्टर': राव संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार थे। उन्होंने 1947 में प्रारंभिक ड्राफ्ट (प्रिलिमिनरी ड्राफ्ट) तैयार किया। विभिन्न देशों के 60+ संविधानों का अध्ययन कर उन्होंने एक बेसिक फ्रेमवर्क बनाया-जैसे संघीय व्यवस्था, राष्ट्रपति की भूमिका। लेकिन यह सिर्फ 'रफ स्केच' था। ड्राफ्टिंग कमेटी ने इसे 2 साल में संशोधित किया, और अंबेडकर ने फाइनल टच दिया। राव का योगदान बड़ा था, लेकिन अंबेडकर की तरह 'चेहरा' नहीं।

संक्षेप में: राव ने 'फाउंडेशन' डाला, अंबेडकर ने 'इमारत' बनाई। इसलिए अंबेडकर को 'फादर' कहा जाता है, जैसे आर्किटेक्ट को बिल्डिंग का पिता कहते हैं। मिश्रा का दावा आधा-अधूरा है-वे राव का जिक्र कर अंबेडकर को कमतर दिखाने की कोशिश कर रहे, लेकिन इतिहास गवाह है कि अंबेडकर बिना संविधान न होता।

सामाजिक और राजनीतिक हंगामा: कौन कहां खड़ा?

यह मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं, सामाजिक तनाव का बन गया है। भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने कहा, "अंबेडकर का अपमान सहन नहीं। मिश्रा को सजा दो, वरना आंदोलन।" BSP ने ग्वालियर में रैली की योजना बनाई। दलित संगठनों ने मिश्रा के खिलाफ बहिष्कार का ऐलान किया। दूसरी तरफ, मिश्रा के समर्थक (मुख्य रूप से हिंदूवादी ग्रुप) कह रहे हैं, "यह फ्री स्पीच है। अंबेडकर पर सवाल उठाना अपराध क्यों?"

राजनीति में भी बंटवारा: कांग्रेस और AAP ने मिश्रा की निंदा की, BJP चुप्पी साधे है। ग्वालियर में तनाव बढ़ा, तो DM ने शांति समिति बुलाई। सोशल मीडिया पर बहस तेज-कुछ कह रहे "मिश्रा राष्ट्रभक्त", तो कुछ "अंबेडकर-विरोधी"।

पुलिस का स्टैंड: गिरफ्तारी क्यों नहीं?

पुलिस ने साफ कहा-जांच पूरी होने दो। SP प्रतीक ठाकुर के मुताबिक, "FIR दर्ज है, लेकिन गिरफ्तारी के लिए सबूत चाहिए। मिश्रा को नोटिस देकर बयान लिया जाएगा।" वकीलों का संगठन होने से कानूनी पेंच भी हैं। मिश्रा हाईकोर्ट में केस लड़ सकते हैं, तो पुलिस सतर्क है। लेकिन अगर तनाव बढ़ा, तो गिरफ्तारी हो सकती है।

आगे क्या? कोर्ट का फैसला तय करेगा

अनिल मिश्रा अब हाईकोर्ट जा सकते हैं, या जांच में सहयोग करेंगे। अगर कोर्ट ने गिरफ्तारी मंजूर की, तो मामला और गरमाएगा। लेकिन यह घटना बड़ा संदेश देती है-अंबेडकर की विरासत को छेड़ना आसान नहीं। संविधान सबका है, और उसकी रक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी। ग्वालियर की सड़कों पर शांति बनी रहे, यही प्रार्थना है। क्या मिश्रा माफी मांगेंगे? या आंदोलन और तेज होगा? आने वाले दिन बताएंगे।

(रिपोर्ट: LN मालवीय)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+