अंबेडकर प्रतिमा विवाद: शिवाजी चौराहा यात्रा रोके जाने पर तनाव, दामोदर यादव का सरकार पर बड़ा आरोप
MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज एक बड़ा सामाजिक-राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जहां ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने का संकल्प और मजबूत हुआ।
आजाद समाज पार्टी (भीम आर्मी) के मंडल पदाधिकारी दामोदर यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम हर हाल में बाबा साहब की मूर्ति ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में स्थापित करेंगे। यह हमारा अटल और अटूट संकल्प है। किसी भी दबाव में हम पीछे नहीं हटेंगे।"

यह विवाद मई 2025 से चला आ रहा है, जब ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ परिसर में अंबेडकर जी की प्रतिमा लगाने की मांग पर वकीलों के दो गुटों में टकराव हुआ था। एक पक्ष इसे संविधान के सम्मान से जोड़ता है, जबकि दूसरे पक्ष ने परिसर की 'पवित्रता' और 'परंपरा' का हवाला देकर विरोध किया। तब से यह मुद्दा सड़कों, अदालतों और राजनीति तक पहुंच गया है।
आज का कार्यक्रम और तनावपूर्ण घटनाक्रम
भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता, बाबा साहब के अनुयायी, दलित-बहुजन संगठन के पदाधिकारी और आमजन शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मनुवादी सोच के खिलाफ एकजुटता दिखाना और ग्वालियर हाईकोर्ट में प्रतिमा स्थापना की मांग को तेज करना था।
कार्यक्रम के दौरान दामोदर यादव ने बताया कि मोहन यादव सरकार द्वारा पहले से तय कार्यक्रम के तहत बाबा साहब अंबेडकर जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शिवाजी चौराहा तक शांतिपूर्ण यात्रा निकालने की योजना थी। हजारों लोग जुटे थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने यात्रा को शिवाजी महाराज की प्रतिमा तक पहुंचने से रोक दिया। इससे माहौल तनावपूर्ण हो गया और जमकर हंगामा हुआ।
दामोदर यादव ने पुलिस और प्रशासन के साथ तीखी बहस की। उन्होंने कड़ा आरोप लगाते हुए कहा, "यह सिर्फ बाबा साहब का नहीं, बल्कि छत्रपति शिवाजी महाराज का भी अपमान है। सरकार जानबूझकर जनभावनाओं को कुचलने का प्रयास कर रही है। शिवाजी चौराहा तक जाने से रोकना संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है।"
संकल्प और आगे की रणनीति
दामोदर यादव ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से जारी रहेगा। उन्होंने कहा, "हम किसी भी दबाव में नहीं झुकेंगे। यदि सरकार नहीं मानती, तो हम और मजबूती से आगे बढ़ेंगे। दीक्षा भूमि नागपुर से लेकर भोपाल तक का यह संकल्प अब अटूट हो चुका है।"
उन्होंने मांग की कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में बाबा साहब की प्रतिमा स्थापित की जाए, क्योंकि वे संविधान के निर्माता हैं और न्यायालय संविधान की रक्षा करते हैं। "अगर अन्य राज्यों में अंबेडकर जी की प्रतिमा न्यायालयों में है, तो मध्य प्रदेश में क्यों नहीं?" उन्होंने सवाल उठाया।
विवाद की पृष्ठभूमि
- मई 2025: ग्वालियर हाईकोर्ट में प्रतिमा लगाने की मांग पर वकीलों में टकराव, पुलिस हस्तक्षेप।
- अक्टूबर 2025: वकील अनिल मिश्रा की कथित टिप्पणी पर तनाव, सोशल मीडिया पोस्ट हटाए गए, ग्वालियर में प्रतिबंधात्मक आदेश।
- जनवरी 2026: दामोदर यादव ने कई बार चेतावनी दी, 14 मार्च तक समयसीमा तय की।
- वर्तमान: भोपाल कार्यक्रम में यात्रा रोके जाने से नया विवाद, पुलिस-कार्यकर्ताओं में बहस।
सीएम मोहन यादव सरकार ने पहले कहा था कि चीफ जस्टिस द्वारा गठित कमेटी का फैसला अंतिम होगा और सरकार उसका समर्थन करेगी। लेकिन कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार देरी कर रही है और जनभावनाओं की अनदेखी कर रही है।
सामाजिक संगठनों का समर्थन
कार्यक्रम में विभिन्न दलित-बहुजन संगठनों, भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकजुटता जताई। कई वक्ताओं ने कहा कि यह सिर्फ प्रतिमा का मुद्दा नहीं, बल्कि संविधान के सम्मान और सामाजिक न्याय का सवाल है।
दामोदर यादव ने अंत में अपील की, "बाबा साहब का संविधान हमें समानता, स्वतंत्रता और न्याय देता है। हम उसी संविधान के तहत शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग पूरी करवाएंगे।" यह मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में गरमा रहा है। आने वाले दिनों में और बड़े आंदोलन की आशंका है। सरकार और हाईकोर्ट से क्या फैसला आता है, यह देखना होगा।












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