अशोकनगर में गजराज लोधी और परिवार की गुमशुदगी, जीतू पटवारी का बड़ा खुलासा और सरकार पर हमला
MP News: मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के मूडरा/मुंगावली क्षेत्र में गजराज लोधी, उनके भाई रघुराज लोधी, और पूरे परिवार की रहस्यमय गुमशुदगी ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले को लेकर मोहन यादव सरकार पर तीखा हमला बोला है, इसे कानून-व्यवस्था की विफलता, माफिया तंत्र, और सरकारी तानाशाही का प्रतीक बताया है।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह ने भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाई है, और गजराज लोधी की गुमशुदगी की शिकायत मुंगावली थाने में दर्ज कराई है। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन, बल्कि भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वन इंडिया हिंदी की यह विशेष रिपोर्ट लाई है इस सनसनीखेज मामले की पूरी कहानी।

गजराज लोधी और परिवार की गुमशुदगी: क्या है पूरा मामला?
10 जून 2025 को अशोकनगर जिले के मूडरा बरवाह गांव निवासी गजराज लोधी ने एक सनसनीखेज आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि राशन पर्ची विवाद के चलते सरपंच के बेटे विकास यादव और उनके पिता राजन यादव ने उनके साथ मारपीट की, उनकी मोटरसाइकिल छीन ली, और उन्हें मानव मल खिलाने की घिनौनी हरकत की। इस घटना का वीडियो गजराज ने 25 जून 2025 को जीतू पटवारी के साथ अपनी मुलाकात के दौरान साझा किया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
गजराज ने अपनी शिकायत मुंगावली थाने और जनसुनवाई में भी दर्ज कराई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जीतू पटवारी ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए अशोकनगर प्रशासन और पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया और 8 दिनों के भीतर कार्रवाई की मांग की। हालांकि, इसके बाद मामला और पेचीदा हो गया। 26 जून 2025 को गजराज ने अशोकनगर कलेक्टर को एक शपथ पत्र सौंपकर दावा किया कि उनके साथ मल खिलाने की घटना झूठी थी और यह बयान उन्होंने मानसिक परेशानी के कारण दिया था। इस शपथ पत्र में उन्होंने जीतू पटवारी पर आरोप लगाया कि उन्होंने ही इस वीडियो को वायरल करवाया।
इसके बाद, मुंगावली थाना पुलिस ने जीतू पटवारी के खिलाफ जातीय वैमनस्यता फैलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर दी। इस एफआईआर के विरोध में 8 जुलाई 2025 को कांग्रेस ने अशोकनगर में न्याय सत्याग्रह का आयोजन किया, जिसमें प्रदेश भर के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान गजराज लोधी और उनका परिवार सत्याग्रह में शामिल नहीं था, जिसने संदेह को और गहरा कर दिया।
27 जून 2025 से गजराज लोधी, उनके भाई रघुराज लोधी, और उनके परिवार के अन्य सदस्य लापता हैं। 9 जुलाई 2025 को दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह ने मूडरा गांव का दौरा किया और परिवार की गुमशुदगी की शिकायत मुंगावली थाने में दर्ज कराई।
जीतू पटवारी के गंभीर सवाल और आरोप
जीतू पटवारी ने 11 जुलाई 2025 को भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा: "14 दिन से गजराज लोधी और उनका पूरा परिवार लापता है। क्या यह अपहरण है या सुनियोजित हत्या? यदि सरकार सच्चाई नहीं छुपा रही, तो परिवार को सार्वजनिक रूप से सामने क्यों नहीं लाया जा रहा?"
पटवारी ने आगे कहा: "गजराज लोधी ने खुद बताया था कि उनके साथ मारपीट हुई, मल खिलाया गया, और धमकियां दी गईं। उनके पास वीडियो साक्ष्य थे। वह 15 दिनों तक प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के पास न्याय की गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। जब मैंने इस मामले को उठाया, तो सरकार ने मुझ पर ही एफआईआर दर्ज करवा दी। पीड़ित को अपराधी बना दिया गया। यह कैसा न्याय है?"
उन्होंने मध्य प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा: "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मध्य प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं। यहां महिलाओं से बलात्कार, आदिवासियों पर अत्याचार, किसानों की आत्महत्याएं, और माफियाओं का बोलबाला है। क्या मध्य प्रदेश माफियाओं का गढ़ बन चुका है? गजराज लोधी का मामला इस भयावह स्थिति को उजागर करता है।"
पटवारी ने यह भी सवाल किया: "क्या कोई क्रिमिनल इतना पावरफुल है कि पूरी सरकार उसे बचाने में लगी है? यदि नहीं, तो गजराज और उनका परिवार कहां है? सरकार इस सच्चाई को जनता से क्यों छुपा रही है?"
दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह की भूमिका
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए 9 जुलाई 2025 को मूडरा गांव का दौरा किया। उन्होंने पाया कि गजराज लोधी और उनका परिवार लापता है। इसके बाद, वे राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह के साथ मुंगावली थाने पहुंचे और गजराज, रघुराज, और उनकी मां की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। दिग्विजय सिंह ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा: "गजराज लोधी ने अपनी शिकायत कई बार पुलिस और प्रशासन के सामने रखी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब वह और उसका परिवार गायब है। यह पुलिस और प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है।"
जयवर्धन सिंह ने भी सरकार पर निशाना साधा और कहा:
"गजराज लोधी ने बीजेपी कार्यकर्ता पर मल खिलाने का आरोप लगाया था। जब उसे न्याय नहीं मिला, तो वह जीतू पटवारी से मिला। लेकिन बीजेपी के दबाव में जीतू पर ही झूठा केस दर्ज कर दिया गया। अब गजराज और उसका परिवार गायब है। यह सरकार की तानाशाही और माफिया संरक्षण का सबूत है।"
कई यूजर्स ने इस मामले को माफिया तंत्र और पुलिस की निष्क्रियता से जोड़ा, जबकि कुछ ने कांग्रेस पर इसे सियासी मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।
सरकार और पुलिस का रुख
अशोकनगर पुलिस ने गजराज लोधी और उनके परिवार की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कर ली है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। अशोकनगर एसपी ने कहा: "हम इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं। गजराज लोधी और उनके परिवार की तलाश के लिए टीमें गठित की गई हैं। जल्द ही स्थिति स्पष्ट होगी।"
हालांकि, जीतू पटवारी ने पुलिस की इस प्रतिक्रिया को नाकافی बताया और कहा: "14 दिन से परिवार गायब है, और पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है। यह दर्शाता है कि सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।"
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन गृह विभाग ने कहा कि "पुलिस इस मामले में पूरी गंभीरता से जांच कर रही है।"
विपक्ष की चेतावनी: आंदोलन की धमकी
जीतू पटवारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही गजराज लोधी और उनके परिवार को सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाया, तो कांग्रेस पूरे प्रदेश में आंदोलन छेड़ेगी। उन्होंने कहा: "हम इस मामले को यूं ही दबने नहीं देंगे। यह केवल गजराज लोधी का मामला नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश में माफियाओं और तानाशाही के खिलाफ एक जंग है। हम इसे विधानसभा में भी उठाएंगे और जनता के बीच ले जाएंगे।"
8 जुलाई 2025 को अशोकनगर में हुए न्याय सत्याग्रह में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एफआईआर के विरोध में प्रदर्शन किया और गिरफ्तारी दी, जिसे बाद में प्रशासन ने रिहा कर दिया। अब कांग्रेस इस मामले को और बड़ा करने की तैयारी में है।
इस घटना ने लोधी समाज में व्यापक आक्रोश पैदा किया है। लोधी समाज संगठन ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। समाजसेवी रामकिशोर लोधी ने कहा: "गजराज लोधी के साथ जो हुआ, वह सामाजिक अन्याय का प्रतीक है। यदि उनका परिवार लापता है, तो यह पूरे समाज के लिए खतरे की घंटी है।"
समाजशास्त्री डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा: "यह मामला केवल एक परिवार की गुमशुदगी तक सीमित नहीं है। यह मध्य प्रदेश में बढ़ते माफिया तंत्र, प्रशासनिक लापरवाही, और राजनीतिक दबाव का परिणाम है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सामाजिक अशांति को जन्म दे सकता है।"
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