MP News: भोपाल में पहली बार राजकीय सम्मान के साथ देहदान, स्व रमा चौदा की स्मृति में एक प्रेरणादायी कदम
MP News: 22 अगस्त 2025 को भोपाल में एक ऐतिहासिक घटना घटी, जब स्व रमा चौदा (79 वर्ष) का देहदान गांधी मेडिकल कॉलेज में राजकीय सम्मान के साथ संपन्न हुआ। यह मध्य प्रदेश में अपनी तरह का पहला अवसर था, जब किसी देहदानी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस प्रक्रिया में किरण फाउंडेशन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके सहयोग से रमा चौदा के परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा किया।

रमा चौदा के पुत्र राजेश गुप्ता, जो नेशनल अस्पताल भोपाल के मेडिकल संचालक हैं, ने अपनी मां की इच्छा का सम्मान करते हुए उनका देहदान गांधी मेडिकल कॉलेज को समर्पित किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश पुलिस ने पूरे विधि-विधान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया, जिसने इस पल को और भी गरिमामय बना दिया। गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ कविता एन सिंह और डॉ संदीप ने इस प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न करने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की श्रद्धांजलि
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने स्व. रमा चौदा को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, "देहदान सबसे बड़ा दान है। यह मानव जीवन को सेवा के माध्यम से अमर बना देता है। स्व. रमा चौदा का यह निर्णय न केवल चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए अनुपम योगदान है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।"
शुक्ल ने मध्य प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि सरकार ऐसे प्रेरणादायी कार्यों को सम्मान देने के लिए संकल्पित है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह पहल समाज में देहदान और अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

गांधी मेडिकल कॉलेज की भूमिका
गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ कविता एन सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, "स्व. रमा चौदा का देहदान चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए एक अनमोल योगदान है। यह पहल न केवल हमारे मेडिकल छात्रों को बेहतर प्रशिक्षण प्रदान करेगी, बल्कि समाज में देहदान जैसे पुण्य कार्यों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगी।" उन्होंने बताया कि कॉलेज ने इस प्रक्रिया को पूरी गरिमा और सम्मान के साथ संपन्न किया, जिसमें मध्य प्रदेश पुलिस और किरण फाउंडेशन का सहयोग सराहनीय रहा।
डॉ संदीप ने बताया कि देहदान से प्राप्त शरीर चिकित्सा छात्रों को मानव शरीर की संरचना और कार्यप्रणाली को समझने में मदद करते हैं, जो उनकी पढ़ाई और भविष्य के चिकित्सा अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्य समाज में वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हैं।
मध्य प्रदेश सरकार की पहल
मध्य प्रदेश सरकार ने हाल के वर्षों में देहदान और अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। 1 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की थी कि अंगदान और देहदान करने वालों को उनके अंतिम संस्कार के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। यह नीति न केवल दानदाताओं को सम्मान देने के लिए है, बल्कि समाज में इस तरह के कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए भी है।
स्व. रमा चौदा का देहदान इस नीति के तहत भोपाल में पहला उदाहरण है, जिसने इसे ऐतिहासिक बना दिया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा, "हमारी सरकार का लक्ष्य है कि देहदान और अंगदान को सामाजिक स्वीकार्यता मिले। यह न केवल चिकित्सा क्षेत्र में योगदान देता है, बल्कि यह मानवता की सेवा का सबसे बड़ा उदाहरण है।"
रमा चौदा: एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व
स्व. रमा चौदा (79 वर्ष) भोपाल के एक सम्मानित परिवार से थीं। उनके पुत्र राजेश गुप्ता, जो नेशनल अस्पताल के मेडिकल संचालक हैं, ने बताया कि उनकी मां ने हमेशा सामाजिक कार्यों और मानवता की सेवा में विश्वास रखा। उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा में देहदान की इच्छा व्यक्त की थी, ताकि उनकी मृत्यु के बाद भी समाज को योगदान मिल सके।
इस अवसर पर किरण फाउंडेशन ने रमा चौदा के परिवार का सहयोग किया और इस प्रक्रिया को सुगम बनाया। फाउंडेशन के एक प्रतिनिधि ने कहा, "हमारा उद्देश्य देहदान और अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाना है। स्व. रमा चौदा का यह कदम समाज के लिए एक मिसाल है।"
सामाजिक और सियासी प्रतिक्रियाएं
इस घटना ने सोशल मीडिया और समाज में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। X पर कई यूजर्स ने इस पहल की सराहना की। एक यूजर ने ट्वीट किया, "भोपाल में पहली बार देहदान को राजकीय सम्मान मिला। यह मध्य प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है। स्व. रमा चौदा की आत्मा को शांति मिले।"
वहीं, कुछ लोगों ने इसे सामाजिक जागरूकता के लिए एक क्रांतिकारी कदम बताया। एक अन्य यूजर ने लिखा, "उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और मध्य प्रदेश सरकार ने देहदान को सम्मान देकर एक नई मिसाल कायम की है। यह चिकित्सा शिक्षा और समाज दोनों के लिए प्रेरणादायी है।"
विपक्षी दलों ने भी इस पहल की सराहना की, लेकिन कुछ नेताओं ने इसे और व्यापक स्तर पर लागू करने की मांग की। एक कांग्रेस नेता ने कहा, "यह एक सराहनीय कदम है, लेकिन सरकार को चाहिए कि देहदान और अंगदान के लिए पूरे प्रदेश में जागरूकता अभियान चलाए जाएं।"
देहदान का महत्व
देहदान चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान है। इससे मेडिकल छात्रों को मानव शरीर की जटिलताओं को समझने और सर्जरी जैसे कौशलों को विकसित करने में मदद मिलती है। मध्य प्रदेश में देहदान की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिसमें मेडिकल कॉलेजों में जागरूकता अभियान और सरल प्रक्रियाएं शामिल हैं।
डॉ कविता सिंह ने बताया कि गांधी मेडिकल कॉलेज में हर साल औसतन 10-15 देहदान होते हैं, लेकिन राजकीय सम्मान के साथ यह पहला अवसर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल अन्य लोगों को भी देहदान के लिए प्रेरित करेगी।












Click it and Unblock the Notifications