MP News: मध्य प्रदेश में खाद संकट, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का खुलासा, सरकार पर उठाए गंभीर सवाल
मध्य प्रदेश में खाद की किल्लत ने किसानों को सड़कों पर ला दिया है, लेकिन समाधान की बजाय उन्हें पुलिस की लाठियां झेलनी पड़ रही हैं। भोपाल में मीडिया से चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस गंभीर मुद्दे को जोर-शोर से उठाया।
केंद्र सरकार के आंकड़ों और मासिक बुलेटिन का हवाला देते हुए उन्होंने साफ किया कि मध्य प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं थी, फिर भी किसानों को लंबी कतारों और लाठीचार्ज का सामना करना पड़ रहा है। यह संकट खाद की उपलब्धता का नहीं, बल्कि राज्य सरकार की मैनेजमेंट और वितरण व्यवस्था की नाकामी का परिणाम है।

सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा अध्यक्ष पर सीधा हमला बोला, सवाल उठाया कि "तीनों मिलकर भी किसानों की समस्या क्यों नहीं सुलझा पा रहे?"
प्रदेश की अर्थव्यवस्था में 45% से अधिक योगदान देने वाले किसानों की इस दुर्दशा ने न केवल सामाजिक तनाव बढ़ाया है, बल्कि सरकार की नीतियों और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े किए हैं। यह खबर खाद संकट, लाठीचार्ज की घटनाओं, सरकारी आंकड़ों और विपक्ष के आरोपों का गहराई से विश्लेषण करती है।
खाद संकट और लाठीचार्ज: किसानों की पीड़ा का दर्दनाक चेहरा
मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन के बीच यूरिया और डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) की भारी कमी ने किसानों को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है। लंबी कतारों में घंटों इंतजार के बाद भी खाद न मिलने से आक्रोश बढ़ रहा है। लेकिन सबसे ज्यादा चिंता की बात है पुलिस का रवैया, जो किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने के लिए लाठियां चला रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उमंग सिंघार ने दो प्रमुख घटनाओं का जिक्र किया:
भिंड (8 सितंबर 2025): व्रहत्कार सहकारी संस्था में खाद वितरण केंद्र पर सैकड़ों किसान सुबह 4 बजे से कतार में थे। टोकन व्यवस्था में गड़बड़ी और खाद की सीमित मात्रा के चलते हंगामा हुआ। पुलिस ने बिना चेतावनी के लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें 3-4 किसान घायल हो गए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में किसानों की चीखें और लाठियों की बौछार साफ देखी जा सकती है।
रीवा (2 सितंबर 2025): करहिया मंडी में खाद के लिए 24 घंटे से अधिक समय तक कतार में खड़े किसानों पर देर रात पुलिस ने लाठीचार्ज किया। कांग्रेस ने इस घटना का वीडियो शेयर कर कहा, "पहले बिस्किट दिए, फिर लाठियां भांजीं।" यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सरकार की आलोचना का कारण बनी।
इनके अलावा, सतना, मऊगंज, गुना, छिंदवाड़ा और मैहर जैसे जिलों में भी किसानों ने खाद की कमी के खिलाफ प्रदर्शन किए। सतना में तो कांग्रेस नेता आशुतोष द्विवेदी ने मुख्यमंत्री को खून से पत्र लिखकर अपनी पीड़ा जाहिर की। मऊगंज में 500 से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए, जबकि मैहर में किसानों ने एसडीएम कार्यालय पर तोड़फोड़ तक की।
मई-जून 2025 बुलेटिन: मध्य प्रदेश में डीएपी और यूरिया की उपलब्धता खपत से अधिक रही।
सिंघार ने तर्क दिया कि जब आंकड़े खाद की पर्याप्तता दिखाते हैं, तो किसानों को कतारों और लाठियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है? उन्होंने इसे वितरण और मैनेजमेंट की घोर नाकामी करार दिया। "यह कमी नहीं, बल्कि सरकार की अक्षमता है। टोकन सिस्टम में गड़बड़ी, कालाबाजारी और विभागों में तालमेल की कमी ने किसानों को संकट में डाल दिया।"
मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था: किसान रीढ़, फिर उपेक्षा क्यों?
उमंग सिंघार ने जोर देकर कहा कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान 45% से अधिक है। खाद की मांग और खपत के मामले में राज्य देश में दूसरे स्थान पर है। फिर भी, खरीफ और रबी सीजन में हर बार खाद की किल्लत क्यों? उन्होंने बताया कि मक्का और धान की खेती में वृद्धि (2025-26 में मक्का का रकबा 20.8 लाख हेक्टेयर और धान 36.32 लाख हेक्टेयर) के कारण यूरिया की मांग बढ़ी है। लेकिन सरकार ने इसकी पहले से योजना क्यों नहीं बनाई?
सिंघार ने कहा, "किसान हमारी धरती का भगवान है। उनके पसीने से अन्न उगता है। लेकिन जब वही किसान खाद, पानी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए तरस जाए, तो यह सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।"
केंद्र और भाजपा नेतृत्व पर सवाल: ₹1.50 लाख करोड़ का बजट, फिर भी नाकामी?
नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र और राज्य के भाजपा नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि रासायनिक और उर्वरक मंत्रालय का ₹1.50 लाख करोड़ से अधिक का वार्षिक बजट और इसकी जिम्मेदारी भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के पास होने के बावजूद, किसानों तक खाद नहीं पहुंच रही। "मोहन यादव, शिवराज सिंह चौहान और जे.पी. नड्डा-तीनों मिलकर भी किसानों की समस्या हल नहीं कर पा रहे, या फिर इनके बीच तालमेल की भारी कमी है।"
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "जब शिवराज अपने गृह जिले विदिशा में नकली खाद-बीज माफियाओं को नहीं रोक पाए, तो पूरे देश के किसानों की रक्षा कैसे करेंगे?" मुख्यमंत्री मोहन यादव पर भी सवाल उठा कि यूके-जर्मनी दौरे के बाद रात में खाद वितरण की बैठक बुलाने के बावजूद कोई राहत क्यों नहीं मिली?
उमंग सिंघार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की चार बड़ी नाकामियों को उजागर किया:
- मांग निर्धारण में लापरवाही:
- खरीफ और रबी सीजन के लिए कोई वैज्ञानिक आकलन नहीं हुआ।
- जिला और ब्लॉक स्तर पर वास्तविक मांग का डेटा जुटाने में विफलता।
- केंद्र के सामने जोनल कॉन्फ्रेंस में मांग प्रस्तुत करने की प्रक्रिया अपारदर्शी रही।
- तीन विभाग, एक जिम्मेदारी, फिर भी असफलता:
- कृषक कल्याण एवं कृषि विकास विभाग: खाद वितरण की निगरानी में नाकाम।
- सहकारिता विभाग: खाद की खरीद, भंडारण और वितरण में गड़बड़ी।
- मप्र एग्रो इंडस्ट्रीज डवलपमेंट कॉरपोरेशन: खाद की आपूर्ति में देरी और कालाबाजारी की शिकायतें।
कालाबाजारी पर नकेल नहीं:
खाद को 'Essential Commodities Act, 1955' और 'Fertilizer Control Order, 1985' के तहत नियंत्रित किया जाता है, लेकिन कालाबाजारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं। निजी दुकानों पर यूरिया ₹1200 प्रति बैग और डीएपी ₹2200 प्रति बैग तक बिक रहा है, जबकि सरकारी दरें क्रमशः ₹266 और ₹1350 हैं।
कृषि मंत्री की गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी:
कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने कहा कि "खाद वितरण मेरा विषय नहीं है।" यह बयान उनकी अक्षमता और किसानों के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।
नेता प्रतिपक्ष का वक्तव्य: "लाठी नहीं, समाधान चाहिए"
उमंग सिंघार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक अपील की: "आज लाठी चल रही है किसानों पर, कल यही किसान वोट से हिसाब चुकाएंगे। दिक्कत खाद की कमी में नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार की प्लानिंग और मैनेजमेंट की नाकामी में है।" उन्होंने मांग की कि:
- लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर तत्काल कार्रवाई हो।
- कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
- खाद वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए टोकन सिस्टम को डिजिटल और निगरानी योग्य बनाया जाए।
- केंद्र और राज्य सरकार संयुक्त रूप से आपातकालीन खाद आपूर्ति सुनिश्चित करें।












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