एट्रोसिटी के हर केस की होगी स्टडी, पोर्टल बनाकर दर्ज करेंगे जानकारी, स्थाई समाधान निकालने का प्रयास
Bhopal SC-ST News: मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विरोध होने वाले हर अपराध की विवेचना के साथ केस स्टडी भी की जाएगी। यानी हरकेश का विश्लेषण किया जाएगा। इसके जरिए यह पता किया जाएगा कि f.i.r. में दर्द जानकारी में घटना का जो कारण बताया गया है। वही मूल कारण है या इसका कारण कोई अन्य है।
इसकी स्टडी करने के बाद हर अपराध की जानकारी एक पोर्टल में दर्ज की जाएगी इसके जरिए विवाद का स्थाई समाधान निकालने का प्रयास होगा। इस संबंध में पोर्टल तैयार करने का काम स्टेट क्राईम रिकॉर्ड ब्यूरो कर रहा है।

झूठे पाए जाते हैं कई मामले
मध्यप्रदेश में कई बार एट्रोसिटी एक्ट के दुरुपयोग की शिकायतें भी पुलिस के पास आती हैं। इन शिकायतों की जांच के बाद यह पाया गया कि कुछ मामलों में जो कारण f.i.r. में बताया गया वह नहीं है विवाद का कारण कुछ और ही है। कई बार पुरानी रंजिश तो, कई बार जमीन के विवाद में मूल विवाद को छोड़कर एट्रोसिटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज करवा दिया जाता है। पुलिस चाहती है कि इस तरह के मामलों के स्थाई तौर पर हल निकाला जाए, ताकि विवाद की स्थिति ना बनें।
केस की स्टडी करने के बाद कराया जाएगा समाधान
किसी भी विशेष प्रकरण से अपराध हो रहे हैं तो इसका पता कर आसानी से निपटारा किया जा सकेगा। इस संबंध में पुलिस नीतिगत निर्णय के जरिए भी इन्हें सुलझाने का प्रयास करेगी। अन्य विभागों की मदद के जरिए भी इस तरह के विवादों का स्थाई समाधान करने के प्रयास किए जाएंगे। पोर्टल से प्रदेश में अपराधों की एक जैसी वजह वाले मामलों को भी पता करना आसान हो जाएगा।












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