MP News: NRC को लेकर क्यों बोले डिप्टी CM– घबराने की जरूरत नहीं: मुफ्ती-ए-आजम की अपील से गर्माया मुद्दा
MP News: मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर अचानक एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बार बहस की वजह बना मुस्लिम समुदाय के धार्मिक गुरु मुफ्ती-ए-आजम डॉ मौलाना मुशाहिद रजा का एक खुला खत, जिसमें उन्होंने समाज के लोगों से अपने दस्तावेज़ तैयार रखने की अपील की।
इस पत्र के सार्वजनिक होते ही मामला सियासी रंग लेने लगा और अब राज्य के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। राजेंद्र शुक्ला ने साफ तौर पर कहा है कि "NRC को लेकर अभी तक कोई गाइडलाइन या आधिकारिक निर्देश जारी नहीं हुए हैं। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।" उन्होंने यह भी कहा कि सरकार फिलहाल इस दिशा में कोई तात्कालिक कदम नहीं उठा रही है और अफवाहों से बचना चाहिए।

मुफ्ती-ए-आजम की अपील: दस्तावेज तैयार रखें
मध्य प्रदेश के मुफ्ती-ए-आजम डॉ. मौलाना मुशाहिद रजा ने 15 जुलाई 2025 को एक पत्र जारी कर मुस्लिम समुदाय से आग्रह किया कि वे अपने सभी नागरिकता और पहचान संबंधी दस्तावेज, जैसे जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट, और बैंक KYC, को तैयार और दुरुस्त रखें। उनके पत्र में लिखा था, "हमारे मुल्क हिंदुस्तान में एनआरसी की पड़ताल बहुत जोरों पर चल रही है, जिसका हल्ला पहले भी हो चुका है। एनआरसी, सीएए, और एनपीआर के मुद्दों को लेकर भाजपा हुकूमत बहुत उत्सुकता से गौर-फिक्र कर रही है।"
मौलाना ने यह भी सलाह दी कि बिजली बिल, जन्म तारीख, और अन्य कागजात में नाम की स्पेलिंग सही होनी चाहिए और पुराने दस्तावेजों को संभालकर रखा जाए। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे अपने दोस्तों, रिश्तेदारों, और पड़ोसियों की भी मदद करें ताकि सभी के दस्तावेज पूर्ण और सही हों। मौलाना ने जोर देकर कहा कि यह अपील डराने के लिए नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करने के लिए है, क्योंकि "आज नहीं तो कल, हमें दस्तावेज दिखाने ही होंगे।"
जब मुफ्ती-ए-आजम से इस पत्र के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने पुष्टि की कि यह पत्र उन्होंने प्रदेश और विशेष रूप से जबलपुर के मुस्लिम समुदाय के लिए लिखा था। उन्होंने कहा कि सरकार पहले भी एनआरसी लागू करने की बात कह चुकी है, और यह जरूरी है कि लोग समय रहते अपने कागजात तैयार रखें, क्योंकि ये दस्तावेज एक दिन में तैयार नहीं होते।
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला का बयान
मौलाना की इस अपील के बाद मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "एनआरसी को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक गाइडलाइन या निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। किसी को भी पैनिक होने की जरूरत नहीं है।" शुक्ला ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी समुदाय को परेशान करने की मंशा नहीं रखती और सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है। उनका यह बयान मौलाना की अपील के बाद उत्पन्न हुए तनाव को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
राजेंद्र शुक्ला, जो बीजेपी के विंध्य क्षेत्र के कद्दावर ब्राह्मण चेहरा हैं और रीवा से विधायक हैं, ने इस बयान से यह संदेश देने की कोशिश की है कि एनआरसी का मुद्दा अभी प्रारंभिक चरण में है और इससे किसी को डरने की जरूरत नहीं है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: सरकार पर भरोसा नहीं
कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया ने मुफ्ती-ए-आजम की अपील का समर्थन करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "अल्पसंख्यकों सहित किसी भी वर्ग को इस सरकार पर भरोसा नहीं है। पता नहीं यह सरकार कब कौन-सा कदम उठा ले। तानाशाह से कब लड़ना पड़ जाए, जुल्मी का जुल्म कब सहना पड़ जाए, कोई नहीं जानता। इसीलिए मुफ्ती-ए-आजम ने यह अपील की है।"
घनघोरिया ने यह भी कहा कि एनआरसी और सीएए जैसे मुद्दों पर सरकार की नीति अस्पष्ट है, जिसके कारण लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल है। उन्होंने मुफ्ती की अपील को जायज ठहराते हुए कहा कि यह लोगों को समय रहते तैयार रहने की सलाह है, ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी न हो।
मौलाना चांद कादरी का दृष्टिकोण: जागरूकता है मकसद
मौलाना चांद कादरी ने मुफ्ती-ए-आजम की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य डर फैलाना नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय को जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि कई मुस्लिम परिवार, विशेष रूप से ग्रामीण और गरीब क्षेत्रों में, अपने दस्तावेजों को लेकर लापरवाह हैं। कई लोगों का नाम वोटर लिस्ट में भी नहीं है। कादरी ने कहा, "जब तक डराया नहीं जाएगा, लोग दस्तावेज इकट्ठा नहीं करेंगे। मुफ्ती-ए-आजम का मकसद लोगों को समय रहते तैयार करना है।"
उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर भरोसा रखते हैं और मानते हैं कि एनआरसी लागू होने पर भी भारत से किसी को निकाला नहीं जाएगा। उनका कहना था कि यह अपील केवल यह सुनिश्चित करने के लिए है कि लोग अपने दस्तावेजों को लेकर सतर्क रहें।
सियासी और सामाजिक हलचल
मुफ्ती-ए-आजम की अपील और डिप्टी सीएम के बयान ने मध्य प्रदेश में सियासी हलचल पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। कुछ लोग मुफ्ती की अपील को जागरूकता का कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे अनावश्यक डर फैलाने की कोशिश बता रहे हैं।
एक एक्स यूजर ने लिखा, "मुफ्ती-ए-आजम की अपील सही है। सरकार की मंशा भले साफ हो, लेकिन दस्तावेज तैयार रखना हर नागरिक का कर्तव्य है।" वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, "यह अपील मुस्लिम समुदाय में डर पैदा करने की कोशिश है। सरकार ने अभी तक एनआरसी लागू करने की कोई घोषणा नहीं की है।"
एनआरसी का इतिहास और मध्य प्रदेश का संदर्भ
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का मुद्दा भारत में पहली बार असम में लागू होने के बाद से चर्चा में रहा है। असम में 2019 में एनआरसी लागू की गई थी, जिसके तहत नागरिकों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने थे। इस प्रक्रिया में कई लोग, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय, परेशानियों का सामना कर चुके हैं। मध्य प्रदेश में एनआरसी लागू होने की चर्चा समय-समय पर सामने आती रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
मध्य प्रदेश सरकार ने पहले भी नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और एनआरसी के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। हालांकि, मुफ्ती-ए-आजम की अपील ने इस मुद्दे को फिर से गर्म कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अपील उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो अपने दस्तावेजों को लेकर लापरवाह हैं, लेकिन साथ ही यह अल्पसंख्यक समुदाय में असुरक्षा की भावना को भी बढ़ा सकती है।
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