दतिया में पूर्व BSP नेता को बंधक बनाकर पीटा, जबरन लगवाए ‘मायावती–चंद्रशेखर जिंदाबाद’ के नारे
Datia News: मध्य प्रदेश के दतिया जिले से सामने आई एक सनसनीखेज घटना ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि राजनीतिक हिंसा और सोशल मीडिया के दुरुपयोग की गंभीर तस्वीर भी उजागर कर दी है।
दतिया विधानसभा से चुनाव लड़ चुके पूर्व बसपा नेता लोकेंद्र अहिरवार को कथित तौर पर बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा गया, उनके कपड़े उतरवाए गए और उनसे जबरन मायावती व चंद्रशेखर आज़ाद के समर्थन में नारे लगवाए गए। इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।

20 जनवरी की रात की बताई जा रही घटना
पीड़ित लोकेंद्र अहिरवार के मुताबिक यह घटना 20 जनवरी (मंगलवार) की है। उन्हें पार्टी करने के बहाने मंडी बड़ौनी क्षेत्र से ले जाकर एक डेरे पर रोका गया। वहां पहले से मौजूद राजा अहिरवार, ठाकुरदास अहिरवार, राजदीप अहिरवार सहित अन्य युवकों ने उनसे राजनीतिक गतिविधियों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर पूछताछ शुरू की।
चार घंटे तक बंधक बनाकर मारपीट
लोकेंद्र का आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें जबरन बंधक बना लिया गया और करीब चार घंटे तक लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा गया। उनके शरीर पर कई जगह गंभीर चोटें आईं। इतना ही नहीं, आरोपियों ने उन्हें हथियार दिखाकर डराया और अपमानित करते हुए कपड़े उतरवाए।
जबरन वीडियो बनवाया, सोशल मीडिया पर कराया वायरल
पीड़ित का कहना है कि मारपीट के दौरान उनसे जबरन नारे लगवाए गए और पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया गया। आरोप है कि वीडियो को पीड़ित के ही मोबाइल फोन से सोशल मीडिया पर पोस्ट करवाया गया, ताकि उन्हें सार्वजनिक रूप से बदनाम किया जा सके। पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।
पैसों की मांग और धमकी
लोकेंद्र अहिरवार ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने उनसे पैसों की मांग की और कहा कि अगर रकम नहीं दी गई या पुलिस के पास गए तो वीडियो और ज्यादा वायरल कर दिया जाएगा।
पिता के पहुंचते ही फरार हुए आरोपी
कुछ समय बाद जब लोकेंद्र के पिता बेनीप्रसाद अहिरवार और एक अन्य व्यक्ति मौके पर पहुंचे तो आरोपी वहां से फरार हो गए। जाते-जाते उन्होंने एक बार फिर पुलिस में शिकायत न करने की धमकी दी।
चुनावी हार के बाद बढ़ी रंजिश
लोकेंद्र अहिरवार ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2023 में दतिया विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। चुनाव हारने के बाद पार्टी ने उन्हें जिला अध्यक्ष पद से हटा दिया था। इसके बाद वे सोशल मीडिया पर बसपा और कुछ दलित संगठनों के विरोध में सक्रिय हो गए थे, जिससे राजनीतिक रंजिश और गहरी हो गई।
वायरल वीडियो ने मचाया हड़कंप
सोशल मीडिया पर वायरल दो वीडियो में से एक में लोकेंद्र हाथ जोड़ते हुए नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरे वीडियो में आरोपी हंसते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद जिले की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।
पुलिस की कार्रवाई
पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। एक आरोपी को हिरासत में लिया गया है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि "मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि राजनीतिक असहिष्णुता, दलित राजनीति और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई बड़े सवाल खड़े करती है। अब देखना यह होगा कि दतिया पुलिस इस हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करती है।












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