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MP News Datia: कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े का पटवारियों को दो टूक जवाब – "मैं पैसों के लिए काम नहीं करता”

Datia Collector: मध्य प्रदेश के दतिया जिले में बुधवार को उस वक्त प्रशासनिक माहौल गर्मा गया, जब सस्पेंशन के विरोध में बड़ी संख्या में पटवारी कलेक्टर कार्यालय का घेराव करने पहुंच गए।

इस दौरान कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने पटवारियों को दो टूक शब्दों में कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट कर दिया कि झुंड बनाकर दबाव बनाने की राजनीति वह किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

Collector Swapnil Wankhade s blunt reply to the Patwaris I don t work for money

"झुंड बनाकर आओगे तो भी नहीं झुकूंगा"

कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "आपको क्या लगता है कि 60-70 लोग आकर खड़े हो जाएंगे तो मैं दब जाऊंगा? ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। भगवान मेरे साथ है, माई मेरे साथ हैं।"

उन्होंने कहा कि यदि किसी पटवारी को किसी निर्णय या सस्पेंशन को लेकर आपत्ति थी, तो तीन-चार प्रतिनिधि आकर शालीनता से बात कर सकते थे। लेकिन बार-बार दर्जनों लोगों का एक साथ आना, न सिर्फ गलत है बल्कि यह प्रशासन पर जानबूझकर दबाव बनाने की कोशिश है।

कलेक्टर ने सवाल उठाया कि आखिर 15 दिनों के भीतर दूसरी बार 60-70 पटवारियों के एक साथ आने की क्या जरूरत थी? उन्होंने इसे अनुशासनहीनता और गलत परंपरा बताया।

पीएम किसान योजना और खाद वितरण पर नाराजगी

बैठक के दौरान कलेक्टर ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना और खाद वितरण व्यवस्था को लेकर भी पटवारियों को जमकर लताड़ा। उन्होंने कहा कि जब प्रशासन ने इन योजनाओं के क्रियान्वयन में सख्ती दिखाई और एडीएम ने जिम्मेदारी तय की, तभी पटवारी फिर से एकजुट होकर दबाव बनाने आ गए। कलेक्टर ने साफ कहा, "पटवारी का काम जनता की सेवा करना है, कलेक्टर पर दबाव बनाना नहीं।"

वायरल वीडियो पर दी सफाई

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर भी कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह वीडियो उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से जारी नहीं किया गया था और न ही इसे वायरल करने का उनका कोई प्रयास था। उन्होंने यह भी साफ किया कि वीडियो उनके निजी वीडियोग्राफर द्वारा रिकॉर्ड नहीं किया गया है।

"मैं पैसों के लिए काम नहीं करता"

कलेक्टर ने भावुक लहजे में कहा, "मैं पैसों के लिए काम नहीं करता। हम सब जनता के लिए काम करते हैं। जब जनता के दुख सामने आते हैं, तो गुस्सा भी आता है और कार्रवाई भी करनी पड़ती है।"

उन्होंने कहा कि रोज उनके पास ऐसे लोग आते हैं, जिनकी मां, बहन या बेटा नहीं रहा। कोई ऐसा है जिसे पांच साल से वृद्धा पेंशन नहीं मिली, क्योंकि आधार में अंगूठा नहीं लग पा रहा।
कलेक्टर ने कहा, "इन हालातों को देखिए, तब समझ आएगा कि सख्ती और नाराजगी क्यों जरूरी हो जाती है।"

पटवारियों का पक्ष

इधर, पटवारियों की ओर से यह तर्क रखा गया कि इंदरगढ़ में एक पटवारी को सस्पेंड किया गया था। इसके बाद तहसीलदार ने पत्र जारी कर संबंधित पटवारी को दतिया से मेडिकल प्रस्तुत करने को कहा, जबकि वह ग्वालियर में इलाज करा रहा था। इस पर कलेक्टर ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि संबंधित पक्ष बैठकर बातचीत करता, तो स्थिति स्पष्ट की जा सकती थी।

प्रशासन का सख्त संदेश

पूरे घटनाक्रम के दौरान कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने यह संदेश साफ कर दिया कि प्रशासनिक निर्णयों को लेकर दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी। जनता से जुड़े कामों में लापरवाही या अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

दतिया में पटवारियों और प्रशासन के बीच यह टकराव अब चर्चा का विषय बना हुआ है, वहीं कलेक्टर के सख्त तेवरों को कई लोग प्रशासनिक दृढ़ता के रूप में देख रहे हैं।

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