Bhopal AIIMS में भ्रष्टाचार का मामला: आउटसोर्सिंग कंपनी पर पैसे मांगने का आरोप, FIR दर्ज, कर्मचारी बर्खास्त
MP Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) एक बार फिर विवादों में है। दैनिक भास्कर (DB स्टार) में 7 और 14 जुलाई 2025 को प्रकाशित खबरों के अनुसार, AIIMS भोपाल में आउटसोर्सिंग मैनपावर भर्ती के दौरान एक आउटसोर्सिंग एजेंसी और उसके कुछ कर्मचारियों पर पैसे मांगने का गंभीर आरोप लगा है।
इस मामले ने न सिर्फ संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि पारदर्शिता और ईमानदारी को लेकर भी चर्चा छेड़ दी है। AIIMS भोपाल ने तुरंत एक्शन लेते हुए FIR दर्ज कराई, आरोपी कर्मचारी को बर्खास्त किया, और आउटसोर्सिंग एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह मामला इतना आसान है, जितना दिख रहा है?

क्या है पूरा मामला?
दैनिक भास्कर (DB स्टार) में 7 और 14 जुलाई 2025 को छपी खबरों के अनुसार, AIIMS भोपाल में आउटसोर्सिंग मैनपावर भर्ती के दौरान एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के प्रतिनिधि और उनके द्वारा नियुक्त कुछ कर्मचारियों पर पैसे मांगने का आरोप लगा है। यह मामला तब सामने आया, जब कुछ लोगों ने शिकायत की कि भर्ती प्रक्रिया में रिश्वत मांगी जा रही थी। यह खबर सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई, जिसके बाद लोगों ने AIIMS भोपाल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
AIIMS भोपाल ने इस मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत कार्रवाई शुरू की। संस्थान ने स्पष्ट किया कि आउटसोर्सिंग भर्ती प्रक्रिया में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती, और यह पूरी प्रक्रिया अनुबंधित एजेंसी द्वारा संचालित होती है। फिर भी, मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान ने कड़े कदम उठाए।
AIIMS भोपाल की कार्रवाई: FIR, कर्मचारी बर्खास्त, और नोटिस
- FIR दर्ज: संस्थान ने बागसेवनिया थाना में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। पुलिस ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के प्रतिनिधि और आरोपी कर्मचारी के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।
- कर्मचारी बर्खास्त: जिस कर्मचारी पर पैसे मांगने का आरोप था, उसे तत्काल कार्यमुक्त (बर्खास्त) कर दिया गया।
- कारण बताओ नोटिस: संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसमें उनसे जवाब मांगा गया है।
- सख्त निर्देश: AIIMS ने सभी आउटसोर्सिंग एजेंसियों को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
- AIIMS भोपाल के प्रवक्ता ने कहा, "हम भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करते हैं। इस मामले में तुरंत कार्रवाई की गई है, और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी कोई शिकायत न आए।"
आउटसोर्सिंग प्रक्रिया: AIIMS की क्या है भूमिका?
AIIMS भोपाल ने साफ किया कि आउटसोर्सिंग मैनपावर भर्ती की पूरी प्रक्रिया अनुबंधित एजेंसी द्वारा की जाती है। इसमें नियुक्ति, पात्रता जांच, अनुभव प्रमाण-पत्र, वेतन भुगतान, और वैधानिक अनुपालन की जिम्मेदारी पूरी तरह एजेंसी की होती है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, AIIMS केवल पुलिस सत्यापन जैसे कुछ रिकॉर्ड रखता है, जबकि बाकी दस्तावेज एजेंसी के पास रहते हैं।
संस्थान ने यह भी कहा कि वह पारदर्शिता और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। अगर जांच में और कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी उठ चुके हैं भ्रष्टाचार के सवाल
यह पहली बार नहीं है जब AIIMS भोपाल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। जून 2025 में दैनिक भास्कर ने खबर दी थी कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक जांच टीम ने AIIMS भोपाल का दौरा किया था। यह जांच HLL लाइफकेयर लिमिटेड के साथ हुए समझौते और दवाओं की खरीद में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद शुरू की गई थी। भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने आरोप लगाया था कि AIIMS भोपाल में Gemcitabine (कैंसर की दवा) को 2100 रुपये प्रति इंजेक्शन की कीमत पर खरीदा गया, जबकि AIIMS रायपुर में यही दवा 425 रुपये में खरीदी गई।
इसके अलावा, 9 जुलाई 2025 को मेडिकल डायलॉग्स ने खबर दी थी कि AIIMS भोपाल के चार विभागों के छह सीनियर डॉक्टरों ने प्रशासनिक खामियों की वजह से इस्तीफा दे दिया। इन घटनाओं ने AIIMS भोपाल की कार्यप्रणाली पर पहले से ही सवाल उठाए थे।
पुलिस जांच: क्या खुलेगा राज?
बागसेवनिया थाना पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है। थाना प्रभारी राकेश शर्मा ने बताया, "हमने आउटसोर्सिंग एजेंसी के प्रतिनिधि और कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज की है। शिकायतकर्ताओं के बयान लिए जा रहे हैं, और जल्द ही इस मामले में कुछ बड़े खुलासे हो सकते हैं।"
पुलिस CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, और शिकायतकर्ताओं के बयानों की जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, आउटसोर्सिंग एजेंसी के कुछ कर्मचारियों ने नौकरी के बदले पैसे मांगने का रैकेट चला रखा था।
क्या हो सकते हैं अगले कदम?
- पुलिस जांच: बागसेवनिया थाना को जल्द से जल्द जांच पूरी कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
- उच्चस्तरीय जांच: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय या लोकायुक्त से इस मामले की गहन जांच कराई जाए।
- आउटसोर्सिंग नियमों में बदलाव: AIIMS भोपाल को आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर और सख्त निगरानी रखनी चाहिए।
- जागरूकता अभियान: कर्मचारियों और शिकायतकर्ताओं के लिए हेल्पलाइन शुरू की जाए, ताकि भ्रष्टाचार की शिकायतें आसानी से दर्ज हो सकें।
- कानून विशेषज्ञ डॉ. अनिल शर्मा ने कहा, "यह मामला गंभीर है। आउटसोर्सिंग एजेंसियों की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त नियम बनने चाहिए। AIIMS को अपनी निगरानी प्रणाली को और मजबूत करना होगा।"












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