GST पर कांग्रेस के टीएस सिंहदेव का बड़ा बयान: बताया कैसे गरीबों और मध्यम वर्ग पर दबाव, अमीरों को मिली राहत
Bhopal News: छत्तीसगढ़ सरकार के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में जीएसटी पर तीखा हमला करते हुए इसे "अमीरों की, अमीरों के द्वारा, अमीरों के लिए" करार दिया।
उन्होंने इसे "अमीरों के लिए, अमीरों द्वारा, और अमीरों के खिलाफ" करार देते हुए कहा कि वर्तमान जीएसटी प्रणाली आम आदमी के खिलाफ काम कर रही है और यह विशेष रूप से गरीबों और मध्यवर्गीय परिवारों के लिए भारी वित्तीय दबाव बना रही है।

सिंहदेव ने कहा, "जीएसटी का वर्तमान ढांचा अमीरों को और भी अमीर बना रहा है, जबकि गरीबों और मध्यवर्गीय लोगों पर इसका बोझ बढ़ता जा रहा है। जीएसटी का अधिकांश हिस्सा देश के निचले 50 प्रतिशत आय वर्ग से लिया जा रहा है, जबकि देश के शीर्ष 10 प्रतिशत अमीर लोग सिर्फ 3 से 4 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान कर रहे हैं। यह एक स्पष्ट असमानता है, जिसमें गरीबों और मध्यम वर्ग से ज्यादा कर वसूला जा रहा है।"
उन्होंने आगे कहा कि जीएसटी का सरलीकरण अत्यंत आवश्यक है। "वर्तमान में नौ अलग-अलग जीएसटी दरें हैं, जो जटिलता और भ्रम पैदा करती हैं। इसके बजाय हमें जीएसटी के स्लैब को अधिकतम दो या तीन तक सीमित करना चाहिए," श्री सिंहदेव ने सुझाव दिया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में पोपकॉर्न जैसे सामान्य उत्पाद पर तीन अलग-अलग जीएसटी दरें (5%, 12%, और 18%) लागू कर दी गईं, जो पूरी तरह से अव्यवहारिक हैं।
श्री सिंहदेव ने यह भी बताया कि सरकार को न केवल जीएसटी दरों का सरलीकरण करना चाहिए, बल्कि कर चोरी को रोकने पर भी ध्यान देना चाहिए। "कर चोरी की समस्या बड़ी है, और जीएसटी की दरों को बढ़ाने की बजाय, सरकार को कर चोरी पर काबू पाकर राजस्व बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। इससे जीएसटी की दरें कम की जा सकती हैं और आमदनी में इजाफा किया जा सकता है," उन्होंने कहा।
जीएसटी पर मुख्य बिंदु
- जीएसटी उपभोग पर आधारित कर है, और चूंकि गरीब अपनी आय का अधिकांश हिस्सा खर्च करते हैं, इसलिए उनका जीएसटी पर अधिक बोझ पड़ता है। 2021-22 में, जीएसटी संग्रह का लगभग 64% हिस्सा निचली 50% आबादी से आया, जबकि शीर्ष 10% से सिर्फ 3% ही आया।
- जीवन और स्वास्थ्य बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं पर 18% जीएसटी लगा हुआ है, जो गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए अधिक बोझ डालता है।
- मोदी सरकार ने अमीरों को टैक्स में छूट दी, जबकि गरीबों और मध्यम वर्ग से जीएसटी में वृद्धि की।
- जीएसटी की दरों की जटिलता और भ्रम ने उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के लिए इसे समझना और पालन करना कठिन बना दिया है।
- जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (DGGI) द्वारा उजागर किए गए आंकड़े बताते हैं कि जीएसटी चोरी की समस्या गंभीर है, और इसका वसूली दर केवल 12% है।












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