MP विधानसभा 2023: चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस ने बनाई रणनीति, हारने वाली सीटों पर होंगे 3 सर्वे
मध्यप्रदेश में इसी साल विधानसभा चुनाव होना है, ऐसे में कांग्रेस ने पिछले चुनाव से सबक लेते हुए इस बार उम्मीदवार चयन को लेकर रणनीति बनाना शुरू कर दिया।

मध्यप्रदेश कांग्रेस जिन सीटों पर लगातार 3 या उससे अधिक चुनाव हारी है, उन सीटों पर उम्मीदवार चयन के लिए सर्वे की तीन अलग-अलग रिपोर्ट तैयार करवाने की कवायद कांग्रेस में तेज हो गई है। यह सर्वे एआईसीसी से लेकर प्रदेश कांग्रेस और PCC चीफ कमलनाथ अलग-अलग करवाएंगे। इस सर्वे के आधार पर ही उम्मीदवार का चयन और चुनाव जीतने की रणनीति पर काम होगा।
प्रदेश कांग्रेस अब जल्द ही उम्मीदवार चयन को लेकर अपनी तैयारी शुरू करने जा रही है। पार्टी पहली बार उन सीटों पर फोकस कर रही है जिन पर वे लगातार हारती रही है। प्रदेश की ऐसी लगभग 65 सीटें हैं, जो कांग्रेसी या उससे अधिक बार लगातार हारती रही है।
इन सीटों पर फोकस किए जाने की रणनीति सोमवार को कांग्रेस की पॉलीटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में बनी थी। इस कमेटी की बैठक के बाद यह तय हुआ कि AICC के साथ ही प्रदेश कांग्रेस की ओर से इन सीटों पर उम्मीदवार चयन को लेकर सर्वे कराया जाएगा। इस दो सर्वे के साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ भी अपना सर्वे करवाएंगे।
ऐसे नेता को बनाया जाएगा उम्मीदवार
इन तीन सर्वे के बाद जो भी उम्मीदवार सबसे बेहतर पार्टी और उसके दिग्गज नेताओं के साथ ही स्थानीय नेताओं एवं संगठन की पसंद होगा, उसे उम्मीदवार बनाया जा सकता है। पहले चरण में इन सीटों के सर्वे के बाद दूसरे चरण में बाकी की बची हुई सीटों पर भी इसी तर्ज पर सर्वे हो सकता है। हालांकि बची हुई सीटों में 95 सीटों पर कांग्रेस के विधायक है। ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस अपने अधिकतर सिटिंग विधायकों को फिर से टिकट देगी। इसके लिए उन्हें अभी से अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय होने के निर्देश कमलनाथ की ओर से मिल चुके हैं।
कांग्रेस और बीजेपी दोनों में ही टिकट के लिए नेताओं की लगी कतार
मध्यप्रदेश में साल के आखिरी में विधानसभा चुनाव होना है, ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस पार्टी से टिकट के लिए नेताओं की लाइन लगी हुई है। जिन्हें टिकट नहीं मिलेगा, वो बागी भी हो सकते है। कांग्रेस पार्टी संभावित बगावत को देखते हुए ज्यादा चिंतित हो गई है, इसीलिए यह सर्वे की रणनीति तैयार की जा रही है। वहीं सत्ताधारी दल बीजेपी 2018 की तरह 2023 में भी ना फंस जाए, इसलिए RSS और पार्टी के सीनियर नेता अंदरूनी रूप से सर्वे का काम करा रहे हैं।












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