एम्स भोपाल में फ्री में लगाई जाएगी सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन, पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर 262 टीके
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर (डॉ) अजय सिंह के प्रयासों से अब एम्स भोपाल सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। देश में हर वर्ष लगभग 13 लाख महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित होती हैं, जिसमें से लगभग 80,000 महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की वजह से मौत हो जाती है।
सर्वाइकल कैंसर के सबसे अधिक मामले मध्य प्रदेश में पाए जाते हैं। विश्वनाथ केयर फाउंडेशन ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए 262 टीके एम्स भोपाल को प्रदान किए हैं। एम्स भोपाल पहले आओ पहले पाओ के आधार पर 131 बच्चियों को यह वैक्सीन मुफ्त में लगाएगा।

9 से 14 साल की लड़कियों में 6 महीने के अंतराल पर दो डोज वैक्सीन लगाने के पश्चात सर्वाइकल कैंसर का खतरा लगभग पूरी तरह से टल जाता है। यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि बाजार में यह टीका लगभग ₹4000 में मिलता है। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर (डॉ) अजय सिंह प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहते हैं।

क्या होता है सर्वाइकल कैंसर
भारत में महिलाओं के बीच सबसे आम कैंसर में से एक सर्वाइकल कैंसर है। यह कैंसर का बचाव और इलाज दोनों संभव हैं, लेकिन महिलाओं में इसके प्रति जागरुकता कम होने के कारण, डॉक्टरों को सही समय पर जानकारी नहीं मिलती और इलाज मिलाना मुश्किल हो जाता है। आंकड़े बताते हैं कि 2019 में भारत में 45,000 से अधिक महिलाओं की मौत सर्वाइकल कैंसर से हुई थी।
कैंसर में, शरीर की कोशिकाएं असामान्य और अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। यह कैंसर उस अंग के नाम से जाना जाता है, जहां वह शुरू होता है। इस कारण, जब कैंसर आपके गर्भाशय के निचले भाग में शुरू होता है, तो उसे सर्वाइकल कैंसर या गर्भाशय ग्रीवा कैंसर कहा जाता है।
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय (यूट्रस) के सबसे नीचे के भाग का घातक ट्यूमर होता है, जो गर्भाशय के निचले भाग से शुरू होता है और उपरी वेजाइना तक जुड़ता है, जिसे गर्भाशय ग्रीवा कहते हैं। ज्यादातर सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के संक्रमण के कारण होता है।
HPV वायरस का एक समूह है, जिसमें 100 से ज्यादा प्रकार हैं, और लगभग 30 प्रकार लैंगिक क्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें से 14 कैंसर पैदा करने वाले हैं, जिन्हें हाई रिस्क एचपीवी के श्रेणी में रखा गया है। इस वायरस के दो प्रकार 70 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर और सर्वाइकल घावों का कारण बनते हैं। इस वायरस को लिंग, गुदा, योनी और ऑरोफरीनक्स के कैंसर के सबूत भी प्राप्त हैं।
किन महिलाओं को होता है खतरा
एचपीवी से संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से यह वायरस फैलता है। साथ ही, जो महिलाएं एक से अधिक पार्टनर के साथ यौन संबंध बना चुकी हैं या जो कम उम्र में यौन संबंध बना चुकी हैं, उनमें सर्वाइकल कैंसर का खतरा अधिक होता है।जो महिलाएं तीन या तीन से अधिक बच्चों को जन्म दे चुकी हैं, उनमें इस कैंसर का जोखिम अधिक होता है। ज्यादा समय तक गर्भ निरोधक गोलियों का प्रयोग करने से भी कैंसर के जोखिम को बढ़ावा मिलता है।












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