कोयला आवंटन रद्द होने से प्राकृतिक जीवनदान!
भोपाल। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 214 कोयला आवंटन रद्द करने के फैसले से उन कम्पनियों की खदानें भी रद हो गई हैं जिनके खिलाफ कई वर्षों से मध्य प्रदेश के ग्रामीण लोग आंदोलन कर रहे थे। मध्य प्रदेश के महान जंगल क्षेत्र में एस्सार और हिंडाल्कों के कॉल ब्लॉक्स मौजूद हैं। जो रद्द होने वाले आवंटनों में शामिल हैं। इस निर्णय को प्राकृतिक जीवनदान के तौर पर भी देखा जा रहा है। अगर यह कोयला खनन लगातार जारी रहता तो करीब पांच लाख पेड़ कट जाना तय था। जिससे आम जिंदगी भी प्रभावित होती।

ग्रीन पीस के अविनाश चंचल ने बताया कि महान जंगल क्षेत्र में कोयला खदान रद्द होने से आंदोलन कर रहे उन हजारों ग्रामीणों के चेहरे पर खुसी दौड़ गई है जो प्रदूषण और खत्म हो रहे जंगल के खिलाफ लगातार विरोध कर रहे थे। गौरतलब है कि महान जंगल क्षेत्र में कोयला खदान होने से आस-पास ग्रामीण लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रही थी। चंचल ने बताया कि महान जंगल के आस-पास के गांवों में रहने वाले लोग का दैनिक जीवन काफी हद तक जंगल पर ही निर्भर है।
सरकार के पास अब दो विकल्प
ग्रीनपीस की जलवायु और ऊर्जा कैंपेनर विनुता गोपाल ने कहा यह ऐतिहासिक फैसला है जो भारत में सस्ते कोयले के युग के अंत का संकेत है। आज के फैसले ने कोयले के गंदे रहस्य पर से पर्दा हटाते हुए यह संकेत दिया है कि इस तरह की मिलीभगत का अंत होना ही चाहिए। अब सरकार के पास बुनियादी रुप से दो ही पसंद है या तो वो लोगों के पक्ष में, ग्रीन आर्थिक मॉडल को विकसित करे या फिर एक भ्रष्ट, महंगा और गंदे ऊर्जा स्रोत के साथ रहना चाहे।
महान वन क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खदान से करीब पाँच लाख पेड़ और हजारों लोगों के उपर विस्थापित होने का खतरा मंडरा रहा था। इस खदान के खिलाफ ग्रीनपीस और महान संघर्ष समिति लंबे अरसे से आंदोलन कर रही थी।
प्राचीन जंगल हो रहा था खत्म
विनुता गोपाल ने कहा महान देश के सबसे प्राचीन साल जंगलों में से एक है। महान में खनन का मतलब है जैवविविधता और जीविका का खत्म हो जाना। सरकार को कॉल ब्लॉक के आंवटन के मानदंड और जंगल के भीतर फैले कोल ब्लॉक को आवंटित करने के निर्णय की समिक्षा करनी चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि नये सिरे से आवंटित होने वाले कोल ब्लॉक से पहले सभी पर्यावरण कानून और वन अधिकार कानून का पालन किया जाये।












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