भैंस पालने वालों की होगी बल्ले-बल्ले, खास तकनीक से जन्मेंगी फीमेल बफैलो कॉफ,मुर्रा नस्ल में होगा सुधार
मध्यप्रदेश में पशुपालन करने वाले किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। मवेशियों की नर संतानों को पैदा होने से रोकने के लिए एक खास तकनीक विकसित की जा रही है।

मध्यप्रदेश में भैंस पालन करने वाले किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। मवेशियों की नर संतानों को पैदा होने से रोकने के लिए एक खास तकनीक विकसित की जा रही है। दरअसल मध्यप्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम ऑफ भोपाल मदर बुल फॉर्म में गायों के बाद देसी भैंसों की नस्ल सुधार को लेकर काम कर रहा है। इस सुधार के बाद पशुपालक दूध उत्पादन बढ़ा सकेंगे। जानिए कैसे दूसरी श्वेत क्रांति प्रदेश में आने वाली है...

सेक्स सार्टेड सीमन से 50 हजार स्ट्रा तैयार
ब्राजील की तर्ज पर अब कुटकुट विकास निगम भैंसों में सेक्स सार्टेड सीमन की तकनीक का प्रयोग करेगा। इसके जरिए भैस फीमेल कॉफ (बढ़िया) को जन्म देगी। इससे पशु पालन करने वाले किसानों को दूध उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी और प्रदेश में भी दूध का उत्पादन बढ़ेगा। निगम के एमडी डॉक्टर एमबीबीएस भदौरिया ने बताया कि मदर बुल फॉर्म स्थित लैब मुर्रा नस्ल के बफेलो बुल से सेक्स सार्टेड सीमन से 50 हजार स्ट्रा तैयार किया जा रहा है। नस्ल सुधार के प्रोजेक्ट में केवल तीन देसी नस्ल की भैंसों को शामिल किया गया। जिसमें मुर्रा, जबाराबादी और भदावरी प्रजाति की भैंस शामिल है। बताया कि पहले चरण में केवल मुर्रा बफेलो भूल के सीमन का सेक्स सार्टेड किया जाएगा।

20 लीटर तक दूध देंगी भैंस
निगम के एमडी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश अब दूसरी श्वेत क्रांति की तैयारी कर रहा है। ब्राजील ने भारत से देसी नस्ल के पशुओं को ले जाकर नचले सुधारते हुए दूध उत्पादकता को बढ़ाया है वहां गाय का 20 से 54 लीटर दूध देने का रिकॉर्ड दर्ज है अब कुटकुट विकास निगम भी उसी की तर्ज पर नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत ऐसा करने जा रहा है। पहले चरण में मुर्रा भैंस की नस्ल को सुधारा जा रहा है। अभी मुर्रा भैंस 1 दिन में 8 से10 लीटर दूध देती है। अपग्रेड नस्ल की मुर्रा भैंस 18 से 20 लीटर दूध दे सकेगी।

गायों के बाद अब भैंसों पर होगा प्रयोग
कुक्कुट विकास निगम के एमडी एमबीबीएस भदौरिया का कहना है कि गायों के सफल प्रोजेक्ट के बाद अब भैंसों की नस्ल को सुधारने के लिए सेक्स सार्टेड का प्रयोग किया जाएगा। सेक्स सार्टेड सीमन तकनीक का उपयोग करके भैंस पालने वाला किसान कृतिम गर्भाधान कर सकेगा इस तकनीक के प्रयोग से केवल फीमेल कॉफ को पैदा करके पशुपालक दूध उत्पादकता के चक्र को रेगुलेट कर सकता है और अपने दूध का उत्पादन बढ़ा सकता है।

मुर्रा किस प्रदेश की नस्ल
निगम के पशुपालन विभाग के डॉ आनंद सिंह कुशवाह ने बताया कि मुर्रा भैंस विशुद्ध हरियाणवी प्रजाति की है। इसको तैयार करने में 35 साल से अधिक का समय लगा। अब न केवल इसकी नस्ल को और इसकी अवर्णित भैंस प्रजाति एवं ग्रेडेड मुर्रा (शंकर प्रजाति) की भैंस नस्ल को भी सुधारा जा रहा है।
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