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MP News: मध्य प्रदेश में भाजपा कार्यकर्ताओं की बल्ले-बल्ले, अब मंत्री खुद पार्टी दफ्तर में बैठेंगे, जानिए कैसे

मध्य प्रदेश में भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए दिवाली एक बार फिर आ गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने एक अनोखा फैसला लिया है - अब प्रदेश के सभी मंत्री हर रोज 2 घंटे पार्टी कार्यालय में बैठेंगे और कार्यकर्ताओं की फरियाद सीधे सुनेंगे। इस व्यवस्था की शुरुआत आज से ही हो गई है।

भाजपा प्रदेश मुख्यालय (पंडित दीनदयाल परिसर) में अलग-अलग दिनों में अलग-अलग मंत्री बैठेंगे। कार्यकर्ता को अब मंत्री के बंगले या सचिवालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे - सीधे पार्टी दफ्तर में उसकी बात सुनी जाएगी और काम धड़ाधड़ होगा।

BJP workers are in trouble in MP now ministers will sit in party office themselves Rakesh Singh

इस नई व्यवस्था का ऐलान करते हुए प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा, "हम सबकी मूल पहचान भाजपा कार्यकर्ता की है। मंत्री बनना या विधायक बनना तो समय-समय पर बदलता रहता है। कार्यकर्ता जब अपनी बात सही मंच तक पहुंचाता है, तो उसके भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जी ने यही सोचकर यह व्यवस्था शुरू की है कि कार्यकर्ता की जन-समस्याओं का त्वरित निराकरण हो और संगठन और सरकार के बीच सीधा सेतु बने।"

कैसे काम करेगी नई व्यवस्था? पूरा शेड्यूल तैयार

  • प्रदेश मुख्यालय में 25 से अधिक मंत्रियों के लिए अलग-अलग दिन और समय निर्धारित कर दिया गया है।
  • हर मंत्री सप्ताह में कम से कम एक दिन (कई दो दिन) सुबह 11 बजे से 1 बजे तक या शाम 4 से 6 बजे तक दफ्तर में बैठेगा।
  • कार्यकर्ता बिना अपॉइंटमेंट के आ सकता है - पहले आओ, पहले पाओ।
  • मंत्री मौके पर ही संबंधित विभाग के अधिकारियों को फोन करेंगे या नोट लिखकर काम करवाएंगे।
  • जिला स्तर पर भी इसी तर्ज पर व्यवस्था बनाने की तैयारी है - जिला भाजपा कार्यालय में जिले के प्रभारी मंत्री या स्थानीय मंत्री बैठेंगे।

पहले दिन आज खुद कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह और गृह मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दफ्तर में बैठकर कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। देखते ही देखते लाइन लग गई। एक कार्यकर्ता ने बताया, "पहले मंत्री जी के बंगले पर घंटों इंतजार करना पड़ता था। आज 10 मिनट में बात हो गई और काम का ऑर्डर भी हो गया।"

कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर, सोशल मीडिया पर वायरल

दूसरे ने लिखा - "मोदी जी ने देश को कार्यकर्ता से जोड़ा, मोहन जी ने प्रदेश को। अब कार्यकर्ता की सुनवाई सीधे मंत्री से!"

क्यों जरूरी थी यह व्यवस्था?

भाजपा के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि 2023 विधानसभा चुनाव के बाद कई जिलों में कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी। उनका कहना था कि मंत्री और विधायक उनसे मिलते ही नहीं, फाइलें सचिवालय में अटक जाती हैं। कई कार्यकर्ता कांग्रेस में चले गए थे। इसकी समीक्षा में मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पाया कि संगठन और सरकार के बीच संवाद का अभाव है।

राकेश सिंह ने कहा, "कई बार कार्यकर्ता छोटी-छोटी जन-समस्याएं लेकर आते हैं - ट्रांसफर, राशन कार्ड, पेंशन, सड़क, बिजली। पहले इन्हें निपटाने में महीनों लग जाते थे। अब मंत्री खुद दफ्तर में बैठकर सुनेंगे तो काम तुरंत होगा।"

जिला स्तर पर भी शुरू होगा मॉडल

प्रदेश नेतृत्व ने निर्देश दिए हैं कि सभी 55 जिलों में यही व्यवस्था लागू की जाए। जिला भाजपा अध्यक्ष और प्रभारी मंत्री मिलकर शेड्यूल बनाएंगे। छोटे जिलों में हफ्ते में एक दिन, बड़े जिलों में दो दिन मंत्री दफ्तर में बैठेंगे।

कांग्रेस का तंज - "अब कार्यकर्ता भी लाइन में लगेंगे"

कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने चुटकी ली, "भाजपा को अब पता चला कि कार्यकर्ता नाराज हैं। मंत्री दफ्तर में बैठेंगे तो अच्छा है, लेकिन पहले जो कार्यकर्ता कांग्रेस में चले गए, उन्हें वापस लाएं।"

वहीं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, "यह देश में पहली बार हो रहा है कि मंत्री पार्टी दफ्तर में बैठकर कार्यकर्ताओं की सुन रहे हैं। यह मोहन यादव जी का कार्यकर्ता प्रेम है।"

कार्यकर्ता अब भाजपा की असली ताकत बनेगा

मोहन यादव सरकार का यह कदम मध्य प्रदेश भाजपा को 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कार्यकर्ता को लगेगा कि उसकी बात सीधे मंत्री तक पहुंच रही है, और सरकार उसकी है। अब देखना यह है कि यह व्यवस्था कितनी कारगर साबित होती है और कार्यकर्ताओं की समस्याएं वाकई धड़ाधड़ निपटती हैं या नहीं।

वनइंडिया हिंदी इस नई व्यवस्था की हर अपडेट लाता रहेगा। आपके जिले में मंत्री कब बैठेंगे? कमेंट में बताएं - जय भाजपा, जय कार्यकर्ता!

(रिपोर्ट: वनइंडिया हिंदी, भोपाल ब्यूरो)

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