“बेटी विधर्मी के साथ जाए तो टांगें तोड़ दो” — साध्वी प्रज्ञा का विवादित बयान कैसे हुआ वायरल, जानिए पूरा मामला
भोपाल की पूर्व लोकसभा सांसद और भाजपा की दिग्गज नेता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर एक बार फिर अपने तीखे और विवादास्पद बयानों के कारण सुर्खियों में छा गई हैं। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बेटियों के संस्कार और 'लव जिहाद' जैसे मुद्दों पर जो कहा, वह न सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, बल्कि राजनीतिक दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों के बीच भी तीखी बहस छेड़ दी है।
उनका यह बयान महिलाओं के अधिकारों, धार्मिक सहिष्णुता और पारिवारिक हिंसा के संवेदनशील मुद्दों को छूता है, जिसकी वजह से यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। आइए, इस बयान की पूरी कथा, प्रतिक्रियाओं और इसके गहरे निहितार्थों को समझते हैं।

बयान का पूरा संदर्भ: क्या कहा प्रज्ञा ने?
18 अक्टूबर 2025 को भोपाल में विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े एक कार्यक्रम में साध्वी प्रज्ञा ने महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा। उनके शब्दों में भाव यह था कि माता-पिता को अपनी बेटियों को शुरू से ही संस्कार सिखाने चाहिए। लेकिन अगर बेटी 'संस्कारों' से भटक जाए और किसी 'विधर्मी' (अर्थात् गैर-हिंदू) के साथ संबंध बनाने या भागने की कोशिश करे, तो माता-पिता को सख्त कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा: "अगर आपकी लड़की आपकी बात नहीं मानती, किसी विधर्मी के साथ जाने की कोशिश करती है, तो उसकी टांगे तोड़ देने में भी पीछे मत हटना।"
आगे उन्होंने जोड़ा: "बेटियों को शुरू से संस्कार सिखाने चाहिए, लेकिन अगर वो 'बातों से नहीं मानतीं' तो माता-पिता को उन्हें 'ताड़ना' (सख्ती) यानी सख्ती से समझाना चाहिए। अगर अपनी संतान के भले के लिए मारना-पीटना भी पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए।"
प्रज्ञा ने भावुक अंदाज में कहा कि जब बेटी पैदा होती है, तो माता-पिता उसे लक्ष्मी-सरस्वती का रूप मानते हैं। लेकिन बड़ी होकर अगर वह 'विधर्मी बनने' या घर से भागने की सोच ले, तो उसे रोकना जरूरी है। "ऐसी लड़कियों पर नजर रखो, अगर वे संस्कारों को नहीं मानतीं, घर से भागने की सोचती हैं, तो उन्हें रोकने के लिए हर कदम उठाओ - प्यार से, समझाकर, डांटकर या जरूरत पड़े तो सजा देकर।" यह बयान एक वीडियो के रूप में तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गया, जहां लाखों व्यूज और हजारों कमेंट्स आ चुके हैं।
सोशल मीडिया पर तूफान: समर्थन से लेकर आलोचना तक
सोशल मीडिया पर यह बयान एक विभाजनकारी मुद्दा बन गया है। एक तरफ हिंदुत्व समर्थक इसे 'बेटियों की रक्षा' का संदेश बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ महिलावादी संगठन और विपक्षी दल इसे 'हिंसा को बढ़ावा देने वाला' और 'सांप्रदायिक जहर' करार दे रहे हैं।
समर्थन की आवाजें: कई यूजर्स ने इसे 'सच्चाई' का नाम देते हुए शेयर किया। उदाहरण के लिए, एक पोस्ट में लिखा गया: "आखिरकार कोई तो बोल रहा है सच्चाई! लव जिहाद के खिलाफ ये जरूरी है।" VHP से जुड़े अकाउंट्स ने इसे 'हिंदू बेटियों की सुरक्षा' का प्रतीक बताया।
आलोचना का सैलाब: ज्यादातर प्रतिक्रियाएं नकारात्मक हैं। एक वायरल पोस्ट में कहा गया: "प्रज्ञा ठाकुर का जहर: बेटी को 'विधर्मी' से मिले तो टांगें तोड़ो! सांप्रदायिक नफरत या 'संस्कृति रक्षा'? BJP चुप क्यों?" महिलावादी कार्यकर्ताओं ने इसे 'घरेलू हिंसा को वैध ठहराने वाला' बताया, जबकि मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने 'विधर्मी' शब्द को निशाना बनाते हुए सांप्रदायिकता का आरोप लगाया। एक पोस्ट में लिखा: "ये बयान लड़कियों को डराने वाली सलाह है। महिलाओं का हक़ चाहिए!"
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: भाजपा की खामोशी, विपक्ष का हमला
राजनीतिक गलियारों में भी हलचल है। भाजपा ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, जो खुद में एक मुद्दा बन गया है। पार्टी के कुछ नेता इसे 'व्यक्तिगत राय' बता रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इसे 'गंभीर' बताते हुए जांच की मांग की है।
विपक्ष का रुख: कांग्रेस ने इसे 'महिलाओं के खिलाफ अपराध' करार दिया। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट किया: "प्रज्ञा ठाकुर जैसे बयान भाजपा की मानसिकता दिखाते हैं। बेटियों को संस्कार नहीं, हिंसा सिखा रही हैं।" AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे 'हेट स्पीच' कहा और कानूनी कार्रवाई की मांग की।
भाजपा का बचाव: पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा: "साध्वी जी का बयान बेटियों की सुरक्षा के संदर्भ में था, न कि हिंसा को बढ़ावा देने वाला।" लेकिन यह बचाव कमजोर सा लग रहा है, क्योंकि प्रज्ञा के पिछले विवाद (जैसे गोडसे को 'देशभक्त' कहना या कोविड में गौमूत्र का प्रचार) को फिर से उछाला जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय: हिंसा या सुरक्षा?
महिलावादी दृष्टिकोण: नेशनल कमीशन फॉर वुमन (NCW) की पूर्व सदस्यों ने कहा कि यह बयान 'घरेलू हिंसा अधिनियम 2005' का उल्लंघन करता है। एक विशेषज्ञ ने बताया: "बेटियों को 'मार-पीट' से नियंत्रित करने की सलाह महिलाओं के स्वायत्तता के अधिकारों का हनन है।"
सांप्रदायिकता का खतरा: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि 'विधर्मी' शब्द सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकता है, खासकर मध्य प्रदेश जैसे संवेदनशील राज्य में जहां लव जिहाद के केस अक्सर राजनीतिक हथियार बनते हैं।
सुरक्षा का पक्ष: समर्थक तर्क देते हैं कि यह 'लव जिहाद' के खिलाफ जागरूकता है, जहां कई केसों में बेटियां धोखे से फंसती हैं। लेकिन आंकड़ों से साफ है कि NCRB के अनुसार, 2024 में घरेलू हिंसा के 4 लाख से ज्यादा केस दर्ज हुए, जिनमें अधिकांश पारिवारिक विवाद से जुड़े।












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