Bhopal News: बीजेपी नेता ने महिला एसडीओ को धमकाया, जेसीबी की चाबी निकाली; नाला बंद कराने गई थीं

भोपाल में जल संसाधन विभाग की महिला एसडीओ और उनकी टीम के साथ पूर्व पार्षद कामता पाटीदार द्वारा किए गए अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है।

एसडीओ कलियासोत डैम से निकलने वाले नाले को बंद कराने के लिए वहां पहुंची थीं, तभी पाटीदार ने गालियां देते हुए उन्हें धमकाया।

BJP leader threatened female SDO took out keys of JCB had gone to get the drain closed

वीडियो में धमकी

इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हो गया है, जिसमें पाटीदार एसडीओ से कह रहे हैं, "यहां से निकल जाओ, वरना अच्छा नहीं होगा।" उनके इस व्यवहार ने मौके पर उपस्थित टीम के सदस्यों को डरा दिया।

कार्रवाई का कदम

एसडीओ और उनकी टीम को पाटीदार की बदसलूकी के बाद सुरक्षित स्थान पर लौटना पड़ा। इसके बाद, उन्होंने थाने जाकर इस मामले की शिकायत दर्ज कराई। यह घटना न केवल महिला अधिकारियों के प्रति असम्मान दर्शाती है, बल्कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय है।

इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में किसी भी महिला को इस प्रकार के दुर्व्यवहार का सामना न करना पड़े। यह मामला स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि वे महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के प्रति कितने गंभीर हैं।

भोपाल में जल संसाधन विभाग की महिला एसडीओ रव्यनीता एन. जैन और उनकी टीम के साथ बीजेपी नेता कामता पाटीदार द्वारा धमकी और गाली गलौज करने का मामला सामने आया है। पाटीदार के खिलाफ पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने और अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है।

घटना का विवरण

यह घटना मंगलवार को पौने 4 बजे के आसपास हुई। एसडीओ जैन ने बताया कि वे कलियासोत डैम से रापड़िया की तरफ नहर में अवैध नाला बंद कराने गई थीं। यह कार्रवाई कई किसानों की शिकायत के बाद की गई थी, जो सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से पहुंची थी। बारिश के कारण पहले यह कार्य नहीं हो पाया था।

पाटीदार का हस्तक्षेप

जब एसडीओ और उनकी टीम नाले की सफाई और अतिक्रमण हटाने में जुटी थीं, तभी कामता पाटीदार वहां पहुंचे और उन्होंने गाली गलौज करते हुए टीम को धमकाया। जैन ने बताया कि पाटीदार ने न केवल उन्हें गालियां दीं, बल्कि बदसलूकी भी की।

सार्वजनिक प्रतिक्रिया

यह मामला महिलाओं के प्रति सम्मान और कार्यस्थल पर सुरक्षा के लिए गंभीर सवाल उठाता है। ऐसे में पुलिस कार्रवाई और प्रशासन की भूमिका को लेकर जनता की निगाहें हैं। यह घटना एक संकेत है कि महिलाओं को उनके कार्यस्थलों पर किस तरह के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है, और इसके खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।

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