MP News: किसानों के लिए बड़ी खबर, मध्य प्रदेश ने गेहूं-धान खरीदी बंद की, अब FCI करेगा सीधे खरीद, जानिए कैसे
मध्य प्रदेश के लाखों किसानों के लिए एक झटका लगने वाला फैसला आ गया है। प्रदेश सरकार ने गेहूं और धान की सरकारी खरीदी से हाथ पीछे खींच लिया है। नागरिक आपूर्ति निगम (नान) पर चढ़े 77,000 करोड़ रुपये के विशालकाय कर्ज का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर सीधे खरीदी की अपील की है।
अब अगले सत्र (2025-26) से भारतीय खाद्य निगम (FCI) किसानों से सीधे गेहूं और धान खरीदेगा। सरकार का दावा है कि इससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिलेगा और कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन विशेषज्ञों और किसान संगठनों का कहना है कि FCI के सख्त गुणवत्ता मानदंडों से बड़ी संख्या में उपज रिजेक्ट हो सकती है।

नतीजा? किसान अपनी मेहनत की कमाई औने-पौने दामों पर निजी व्यापारियों के हवाले करने को मजबूर हो जाएंगे। यह फैसला न केवल राज्य की खरीदी व्यवस्था को बदल देगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डालेगा। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं - पत्र से लेकर प्रभाव तक, और किसानों की चिंताएं।
कर्ज का बोझ: नान पर 77,000 करोड़ का कर्ज, सरकार ने क्यों छोड़ा खरीदी का जिम्मा?
मध्य प्रदेश में धान-गेहूं खरीदी की विकेंद्रीकृत व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है। राज्य सरकार (नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से) किसानों से MSP पर अनाज खरीदती है, फिर FCI को बेचती है। लेकिन 2025-26 सत्र के लिए यह सिस्टम बदलने वाला है। 3 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी को पत्र लिखा। पत्र में कहा गया, "नान पर 77,000 करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ चुका है। लगातार बढ़ते राजस्व घाटे से राज्य की अर्थव्यवस्था पर दबाव है। केंद्र FCI के माध्यम से सीधे खरीदी करे, ताकि MSP सुनिश्चित हो।"
सरकार के अनुसार, नान का कर्ज 2020 से तेजी से बढ़ा। 2023-24 में धान खरीदी पर 10,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा। कुल मिलाकर, राज्य का राजकोषीय घाटा 3.5% से ऊपर पहुंच गया। वित्त विभाग के एक अधिकारी ने बताया, "खरीदी से लाभ कम, लेकिन सब्सिडी और स्टोरेज का खर्च ज्यादा। केंद्र से सीधी खरीदी से राज्य का बोझ कम होगा।" यह पत्र 2025-26 रबी (गेहूं) और खरीफ (धान) सत्र के लिए है। यदि केंद्र मान लेता है, तो नान की भूमिका खत्म हो जाएगी।
मुख्यमंत्री यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "यह फैसला किसानों के हित में है। MSP 2,425 रुपये (गेहूं) और 2,300 रुपये (धान) मिलेगा। व्यवस्था बदलने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।" लेकिन विपक्ष ने हमला बोला। कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा, "यह किसान विरोधी कदम है। भाजपा ने MSP बढ़ाने का वादा किया, लेकिन अब जिम्मेदारी केंद्र पर डाल दी।"
वर्तमान व्यवस्था का अंत: विकेंद्रीकृत से केंद्रीकृत खरीदी - क्या बदलेगा सिस्टम?
मध्य प्रदेश में खरीदी का सिस्टम 2007 से विकेंद्रीकृत है। राज्य नान के जरिए खरीदता है, FCI लेता है। 2024-25 में 45 लाख MT धान और 48 लाख MT गेहूं खरीदा गया, जिससे 6 लाख किसानों को लाभ हुआ। लेकिन कर्ज से परेशान नान अब पीछे हट रहा है।
नई व्यवस्था:
FCI सीधी खरीदी: केंद्र के खाद्य निगम मंडियों में कैंप लगाएगा। किसान सीधे FCI को बेचेंगे।
लाभ: राज्य को कर्ज से मुक्ति, MSP गारंटी।
समयसीमा: 2025-26 खरीफ (जुलाई) से लागू, यदि केंद्र सहमत।
केंद्र की प्रतिक्रिया: प्रहलाद जोशी ने कहा, "मध्य प्रदेश का अनुरोध विचाराधीन। FCI तैयार है, लेकिन लॉजिस्टिक्स चेक करेंगे।"
यह बदलाव पंजाब-हरियाणा जैसे राज्यों की केंद्रीकृत व्यवस्था से मिलता-जुलता है। लेकिन मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में FCI सेंटर्स कम हैं, जो समस्या पैदा कर सकता है।
किसानों की चिंता: FCI के सख्त मानक, रिजेक्शन का खतरा - औने-पौने दामों पर बेचना पड़ेगा
सरकार दावा करती है कि कोई असर नहीं, लेकिन किसान संगठन चिंतित हैं। भारतीय किसान संघ (BKS) के प्रदेश अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह ने कहा, "FCI के गुणवत्ता मानक सख्त हैं - नमी 14% से अधिक पर रिजेक्ट। नान में छूट मिलती थी, FCI में नहीं। 30-40% उपज रिजेक्ट हो सकती है।"
विशेषज्ञों का मत:
- रिजेक्शन रेट: FCI में 20-25% अनाज खारिज होता है। मध्य प्रदेश में नान में यह 5-10% था।
- व्यापारी बाजार: रिजेक्ट अनाज निजी व्यापारियों को 1,500-1,800 रुपये/क्विंटल में बेचना पड़ेगा, जबकि MSP 2,300-2,425 है।
- लॉजिस्टिक्स: FCI सेंटर्स शहरों तक सीमित। ग्रामीण किसानों को 50-100 किमी यात्रा करनी पड़ेगी।
- उदाहरण: 2023 में पंजाब में FCI ने 15% गेहूं रिजेक्ट किया, किसानों को नुकसान हुआ।
- किसान नेता अनिल यादव ने कहा, "धान में बोनस (3100 रुपये) का वादा था, लेकिन कर्ज के नाम पर सब खत्म। FCI से MSP मिलेगा या नहीं, संदेह है।" 2024-25 में धान खरीदी 2 दिसंबर से शुरू हुई, 45 लाख MT लक्ष्य। लेकिन 2025-26 में FCI का दबदबा।
- आंकड़ों में नुकसान: कर्ज का इतिहास, खरीदी का बोझ
नान का कर्ज:
- 2020: 40,000 करोड़।
- 2024: 77,000 करोड़ (खरीदी सब्सिडी से)।
- वार्षिक खरीदी: 90 लाख MT अनाज, 20,000 करोड़ खर्च।
किसानों पर प्रभाव:
- 6 लाख किसान प्रभावित।
- निजी बाजार में दाम: गेहूं 1,800-2,000, धान 1,500-1,800।
- संभावित नुकसान: 5,000 करोड़ (रिजेक्शन से)।
विपक्ष और किसान संगठनों का विरोध: 'किसान विरोधी नीति', MSP वादे तोड़ना
कांग्रेस ने राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी। जीतू पटवारी ने कहा, "भाजपा ने 2,700 (गेहूं) और 3,100 (धान) का वादा किया, लेकिन कर्ज के बहाने केंद्र पर डाल दिया।" BKS ने धरना की घोषणा की। सरकार ने सफाई दी, "MSP मिलेगा, व्यवस्था बेहतर।"
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