72 घंटे बाद भूमिगत समाधि से बाहर आए पुरुषोत्तम आनंद महाराज, कहा- मां दुर्गा से मिली अपार शक्ति
भोपाल में भूमिगत समाधि लेने वाले भद्रकाली बिजासन मंदिर के महाराज स्वामी पुरुषोत्तम 3 अक्टूबर को पूरी तरह से स्वस्थ बाहर निकले। महाराज को जमीन के अंदर से बाहर निकलते देखने के लिए मंदिर के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई थी।
भोपाल, 4 अक्टूबर। तीन दिनों तक भूमिगत समाधि लेने वाले भद्रकाली बिजासन मंदिर के महाराज स्वामी पुरुषोत्तम 3 अक्टूबर को पूरी तरह से स्वस्थ बाहर निकले। महाराज को जमीन के अंदर से बाहर निकलते देखने के लिए मंदिर के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई थी। भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बाद जब तप स्थल से मंदिर के संतों ने महाराज की समाधि से लकड़ी के पटिए हटाना शुरू किया तो लोगों की महाराज को देखने की उत्सुकता और बढ़ने लगी। जब सारे पटिए हटा लिए गए तो महाराज गड्ढे में सुरक्षित मिले और इस तरह उनकी भूमिगत समाधि सफल रही।
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पूरी तरह सुरक्षित है महाराज
बता दे 1 अक्टूबर की सुबह 10 बजे स्वामी पुरुषोत्तम आनंद महाराज ने 7 फीट गहरे 5 चौडे गड्ढे में भूमिगत समाधि ली थी। प्रशासन के समझाने के बाद भी नाराज नहीं माने और उन्होंने समाधि ले ली थी। उन्होंने कहा था कि वे 3 दिन की समाधि के बाद घर आएंगे और ऐसा ही हुआ 3 अक्टूबर को महाराज तब इस स्थल के गड्ढे से बाहर आए तो पूरी तरह सुरक्षित निकले। इसके बाद मंदिर चारों ओर महाराज के जयकारों की गूंज है।

किस प्रकार ली थी भूमिगत समाधि
नमहाराज ने भूमिगत समाधि लेने के लिए 7 फीट गहरा गड्ढा खुदवाया था। इसके बाद बाबा 1 अक्टूबर को गड्ढे के अंदर बैठे थे। जिसके ऊपर लकड़ी के पटिए को रखकर उनको ढक दिया गया था। पटिये के ऊपर एक लाल कलर का कपड़ा बिछाया गया था। फिर उसके ऊपर मिट्टी डाल दी गई थी। 3 अक्टूबर को सबसे पहले मिट्टी हटाई गई, फिर लाल कपड़ा उठाया गया और फिर चार पटिए हटाए गए। तब महाराज की झलक देखने को मिली। 12 घंटे के अंदर ध्यान मुद्रा में बैठे हुए थे। उनकी झलक पाते ही उनके भक्त जयकारे के नारे लगाने लगे। भक्तों ने उन पर पुष्पा की वर्षा भी की। महाराज में बैठे बैठे सभी का हाथ जोड़कर अभिवादन किया इसके बाद महाराज सबसे पहले माता बिजासन मंदिर के दरबार में गए और उनका आशीर्वाद लिया।

समाधि से बाहर आने के बाद क्या बोले महाराज
समाधि से बाहर आने के बाद महाराज ने बताया कि समाधि किस समय जब वे गड्डी के अंदर थे तो उन्हें माता की कृपा से असीम शक्तियां प्राप्त हुई। उनके हृदय और मस्तिष्क पर सिर्फ माताजी का ही प्रभाव था। उन्होंने बताया कि इस दौरान माताजी ने साक्षात्कार उन्हें दर्शन दिए और उनसे कहा कि तुमने मेरे वचन का पालन किया है तुझे स्वर्ग लोक की यात्रा कराती हूं। हालांकि महाराज ने समाधि लेने से पहले ही बातचीत में बताया था कि समाधि के दौरान भगवान और भक्त एक दूसरे के निकट हो जाते हैं। इसलिए मैं भूमिका समाधि ले रहे थे।

प्रशासन ने नहीं दी थी अनुमति उसके बाद भी ली भू-समाधि
अग्नि से स्नान करने वाले और जल समाधि लेने वाले पुरुषोत्तम आनंद महाराज ने राजधानी भोपाल में प्रशासन के समझाने के बाद भूमिगत समाधि ले ली थी। हालांकि उन्हें प्रशासन ने भूमिगत समाधि लेने से मना कर दिया था उन्होंने इसके लिए अनुमति मांगी थी। लेकिन प्रशासन ने उन्हें अनुमति नहीं दी थी। पुलिस अधिकारी ने कई बार उनसे विनती की कि आप समाधि ना लें। इसके बावजूद महाराज ने भूमिगत समाधि ले ली थी।
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