25 जनवरी से आमजनों के लिए खुलेगा लोकभवन, गणतंत्र दिवस पर भोपालवासियों को मिलेगा ऐतिहासिक तोहफा
Bhopal News: राजधानी भोपाल के आम नागरिकों के लिए यह खबर किसी उत्सव से कम नहीं है। लोकतंत्र के महापर्व गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल के निर्देशानुसार लोकभवन (राजभवन) को 25 जनवरी से आमजनों के लिए खोलने का निर्णय लिया गया है।
अब वह भवन, जहां से प्रदेश की संवैधानिक और लोकतांत्रिक गतिविधियों का संचालन होता है, तीन दिनों तक जनता के लिए खुला रहेगा।

25 से 27 जनवरी तक होगा लोकभवन भ्रमण, जानिए पूरा शेड्यूल
राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि नागरिक 25 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक निर्धारित समय में लोकभवन का भ्रमण कर सकेंगे।
घूमने का समय इस प्रकार रहेगा:
- 25 जनवरी 2026: दोपहर 2 बजे से शाम 8 बजे तक
- 26 जनवरी 2026 (गणतंत्र दिवस): सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक
- 27 जनवरी 2026: दोपहर 2 बजे से शाम 8 बजे तक
पार्किंग और प्रवेश-निकास की पूरी व्यवस्था
- कुशाभाऊ ठाकरे सभागार परिसर में होगी पार्किंग
- लोकभवन भ्रमण के लिए आने वाले नागरिकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है।
- वाहन पार्किंग: कुशाभाऊ ठाकरे सभागार परिसर
- प्रवेश: गेट नंबर-1
- निकास: गेट नंबर-4
पूरे भ्रमण मार्ग को इस तरह तैयार किया गया है कि आमजन लोकभवन की ऐतिहासिक संरचना, भव्य सजावट और प्रदर्शनी का सहज और सुरक्षित रूप से अवलोकन कर सकें।
प्रदर्शनी, संस्कृति और लोकतंत्र की झलक
लोकभवन बनेगा ज्ञान और गौरव का केंद्र
इस अवसर पर लोकभवन परिसर में कई विशेष आयोजन भी किए जाएंगे-
- केंद्रीय संचार ब्यूरो की विशेष प्रदर्शनी
- "वीबी-जी रामजी योजना"
- "वंदे भारत थीम" पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी
- सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
तीनों दिन केंद्रीय संचार ब्यूरो के सांस्कृतिक दलों द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जो देश की एकता और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाएंगी।
"राजभवन से लोकभवन" विशेष प्रदर्शनी
मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा "राजभवन से लोकभवन" विषय पर विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें लोकभवन का इतिहास, संवैधानिक भूमिका, लोकतांत्रिक यात्रा और प्रशासनिक महत्व को रोचक दृश्य माध्यमों और लघु फिल्मों के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा। जनता और लोकतंत्र के बीच सेतु बनेगा लोकभवन।
पारदर्शिता और सहभागिता की मिसाल
लोकभवन को आमजनों के लिए खोलना केवल एक भ्रमण कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह लोकतंत्र की पारदर्शिता और जनता की भागीदारी का प्रतीक है। यह अवसर नागरिकों को यह समझने का मौका देगा कि प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था कैसे कार्य करती है और लोकभवन केवल एक प्रशासनिक इमारत नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का जीवंत केंद्र है।
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