भोपाल में भारत बंद कितना असर, केंद्रीय कर्मचारी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर उठाई मांगें
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बुधवार, 9 जुलाई 2025 को राष्ट्रीय स्तर पर घोषित भारत बंद के समर्थन में विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल और प्रदर्शन कर अपनी मांगों को बुलंद किया। केंद्रीय डाकघर के बाहर केंद्रीय कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और बढ़ते निजीकरण के खिलाफ नारेबाजी की, तो वहीं कोहेफिजा थाना क्षेत्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने वेतन वृद्धि, शासकीय कर्मचारी का दर्जा, और ICDS निजीकरण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया।
हालांकि, इस भारत बंद का असर भोपाल में सीमित रहा, और शहर की आवश्यक सेवाएं, यातायात, और बाजार सामान्य रूप से चलते रहे। वन इंडिया हिंदी के संवाददाता लक्ष्मी नारायण मालवीय की यह खास रिपोर्ट लाई है भोपाल के इन प्रदर्शनों की पूरी कहानी।

केंद्रीय डाकघर के बाहर कर्मचारियों का हंगामा
भोपाल के केंद्रीय डाकघर के बाहर सुबह से ही केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के बैनर और तख्तियों के साथ सैकड़ों कर्मचारी जमा हो गए। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (NMOPS) और केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के नेतृत्व में यह हड़ताल भारत बंद के समर्थन में आयोजित की गई थी। कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को दोहराया।
वन इंडिया हिंदी के संवाददाता लक्ष्मी नारायण मालवीय ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों से बात की, जिन्होंने अपनी निराशा और आक्रोश जाहिर किया। कर्मचारी नेता रामकिशोर शर्मा ने कहा, "हमारी मांग पुरानी पेंशन योजना की बहाली है। नई पेंशन योजना (NPS) कर्मचारियों के भविष्य को असुरक्षित कर रही है। रिटायरमेंट के बाद हमें बाजार के भरोसे छोड़ दिया जाता है, जो पूरी तरह अनुचित है।"
दूसरे कर्मचारी सुनीता वर्मा ने निजीकरण पर चिंता जताते हुए कहा, "डाक विभाग में निजीकरण की आड़ में हमारी नौकरियां खतरे में हैं। डाक सेवाएं जनता के लिए हैं, लेकिन सरकार इसे कॉर्पोरेट के हवाले करना चाहती है। हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं।" कर्मचारियों ने तख्तियों पर लिखे संदेशों जैसे "पुरानी पेंशन हमारा हक" और "निजीकरण बंद करो" के साथ अपनी मांगों को उजागर किया।
कोहेफिजा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का उग्र प्रदर्शन
उधर, भोपाल के कोहेफिजा थाना क्षेत्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संगठन ने सैकड़ों की संख्या में सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। ICDS (एकीकृत बाल विकास सेवा) के निजीकरण की योजना और वेतन न बढ़ाने जैसे मुद्दों पर कार्यकर्ताओं का गुस्सा साफ झलक रहा था। प्रदर्शन के दौरान "हमें शासकीय कर्मचारी का दर्जा दो" और "निजीकरण नहीं चलेगा" जैसे नारे गूंजे।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शांति बाई ने वन इंडिया हिंदी को बताया, "हम दिन-रात बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सेवा करते हैं। POSHAN ट्रैकर जैसे नए ऐप ने हमारा काम और बढ़ा दिया, लेकिन हमारा वेतन पिछले कई सालों से नहीं बढ़ा। 6,000-7,000 रुपये में आज परिवार कैसे चले?"
संगठन की नेता राधा यादव ने निजीकरण की योजना पर सवाल उठाते हुए कहा, "सरकार ICDS को निजी कंपनियों के हवाले करने की तैयारी में है। इससे न केवल हमारी नौकरियां खतरे में पड़ेंगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली सेवाएं भी प्रभावित होंगी। हम इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि पुलिस प्रशासन को व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा। कोहेफिजा थाना प्रभारी अनिल त्रिपाठी ने बताया, "हमने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी थी, लेकिन भीड़ बढ़ने पर ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होने लगी। हमने कार्यकर्ताओं से सड़क खाली करने की अपील की, और स्थिति नियंत्रण में रही।"
भारत बंद का भोपाल में सीमित असर
राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और कर्मचारी संगठनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद का भोपाल में असर सीमित रहा। शहर की आवश्यक सेवाएं जैसे कैंसर हॉस्पिटल, हमीदिया हॉस्पिटल, और रेलवे स्टेशन सामान्य रूप से कार्यरत रहे। महालक्ष्मी नगर और बैरागढ़ जैसे बाजार क्षेत्रों में दुकानें खुली रहीं, और यातायात में कोई खास रुकावट नहीं देखी गई। भोपाल रेलवे स्टेशन पर ट्रेनें समय पर चलीं, और ISBT पर बस सेवाएं भी सुचारू रहीं।
स्थानीय व्यापारी रमेश ठाकुर ने कहा, "भारत बंद की कॉल थी, लेकिन भोपाल में इसका ज्यादा असर नहीं दिखा। लोग अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त रहे।" हालांकि, कुछ सरकारी कार्यालयों जैसे डाकघर और BSNL ऑफिस में हड़ताल के कारण कामकाज प्रभावित हुआ।
प्रदर्शनकारियों की मांगें निम्नलिखित थीं:
- पुरानी पेंशन योजना की बहाली: केंद्रीय कर्मचारी नई पेंशन योजना (NPS) को रद्द कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने की मांग कर रहे हैं, जो रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन की गारंटी देती है।
- निजीकरण का विरोध: डाक विभाग, रेलवे, और ICDS जैसे सरकारी क्षेत्रों में निजीकरण की योजनाओं का पुरजोर विरोध।
- वेतन वृद्धि और शासकीय दर्जा: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये और शासकीय कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की।
- काम के बोझ में कमी: POSHAN ट्रैकर जैसे डिजिटल उपकरणों से बढ़े काम के बोझ को कम करने और तकनीकी सहायता की मांग।
प्रशासन और पुलिस की भूमिका
प्रदर्शन के दौरान भोपाल पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। केंद्रीय डाकघर और कोहेफिजा में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। भोपाल SP रामजी श्रीवास्तव ने कहा, "हमने प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अनुमति दी। शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे।"
प्रशासन ने भारत बंद के दौरान आवश्यक सेवाओं को प्रभावित न होने देने के लिए पहले से ही रणनीति तैयार की थी। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने सभी विभागों को अलर्ट रहने और आपातकालीन सेवाओं को सुचारू रखने के निर्देश दिए थे।
सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अभी तक प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, बीजेपी प्रवक्ता राहुल कोठारी ने कहा, "केंद्र सरकार कर्मचारियों और कार्यकर्ताओं के हित में कई योजनाएं चला रही है। NPS एक पारदर्शी और आधुनिक योजना है, जो कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करती है। विपक्ष इस मुद्दे को सियासी रंग देकर भटकाने की कोशिश कर रहा है।"
वहीं, कांग्रेस ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए सरकार पर हमला बोला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "केंद्र और राज्य सरकार कर्मचारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का शोषण कर रही है। पुरानी पेंशन योजना और वेतन वृद्धि उनकी मांग नहीं, उनका हक है। हम उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।"
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