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MP News: भांडेर तहसील में रिश्वत का आरोप, तहसीलदार पर घिरे सवाल, जानिए कैसे 50+ सीमांकन रोके जाने का दावा

Bhander Tehsildar: दतिया जिले के भांडेर तहसील में राजस्व विभाग के कार्यों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। तहसीलदार सुनील भदौरिया पर सीमांकन (नाप), नामांतरण और बंटवारे जैसे मामलों में खुलेआम पैसे मांगने का आरोप लगा है।

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता और पूर्व पार्षद जगदीश पाराशर ने सोमवार (23 फरवरी 2026) दोपहर एसडीएम सोनाली राजपूत के कार्यालय पहुंचकर इस संबंध में एक लिखित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप है कि तहसीलदार द्वारा काम के बदले मोटी रकम की मांग की जाती है, और पैसे न देने पर फाइलें जानबूझकर अटका दी जाती हैं। इससे क्षेत्र में जमीन विवाद बढ़ते जा रहे हैं और अवैध कब्जों की समस्या गंभीर रूप ले रही है।

Bhander Tehsildar faces bribery charges claims 50 demarcations were stopped

जगदीश पाराशर ने ज्ञापन में विस्तार से आरोप लगाए हैं कि भांडेर और आसपास के गांवों में 50 से 60 से अधिक सीमांकन के मामले जानबूझकर रोके गए हैं। सीमांकन के बदले मोटी राशि मांगी जाती है, और राशि नहीं मिलने पर पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक (आरआई) को जमीन नापने से रोक दिया जाता है। इसी तरह कई मामलों में दो-दो साल से नामांतरण, फौती नामांतरण और बंटवारे के प्रकरण लंबित पड़े हैं। आरोप है कि जब तक लेन-देन तय नहीं हो जाता, तब तक फाइल दर्ज तक नहीं की जाती। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि समय-सीमा की बाध्यता न आए और सौदा तय होने के बाद ही कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए।

ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि फरियादियों से बातचीत के दौरान तहसीलदार अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं और साफ शब्दों में कहते हैं कि "रुपए आए बिना काम नहीं होगा।" क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण से जुड़ी शिकायतों का भी लेन-देन के आधार पर निपटारा किए जाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। कांग्रेस नेता का कहना है कि इन कारणों से भांडेर क्षेत्र में जमीन विवाद तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त है और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

तहसीलदार का पक्ष: आरोप निराधार

इन गंभीर आरोपों पर जब तहसीलदार सुनील भदौरिया से बात की गई, तो उन्होंने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताया। तहसीलदार का कहना है कि उनके कार्यालय में सभी काम नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कोई भी फाइल बिना वजह नहीं अटकाई जाती और राजस्व कार्यों में कोई भेदभाव नहीं किया जाता। फिलहाल, उन्होंने इस मामले पर कोई विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

प्रशासनिक हलकों में हलचल, जांच की मांग

ज्ञापन एसडीएम सोनाली राजपूत को सौंपे जाने के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। एसडीएम कार्यालय से इस मामले की जांच शुरू करने या उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजने की संभावना जताई जा रही है। क्षेत्र के लोग और कांग्रेस कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि तत्काल जांच हो और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए। जगदीश पाराशर ने कहा कि यदि प्रशासन कार्रवाई नहीं करता, तो वे उच्च स्तर पर शिकायत करेंगे और आंदोलन की रणनीति बनाएंगे।

यह मामला मध्य प्रदेश में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठा रहा है, जहां पटवारी, आरआई और तहसीलदार स्तर पर रिश्वत के आरोप अक्सर सामने आते रहे हैं। भांडेर जैसे छोटे तहसील क्षेत्र में यह घटना स्थानीय स्तर पर बड़ी बहस का विषय बन गई है। फिलहाल, सभी की नजरें एसडीएम और जिला प्रशासन की ओर टिकी हैं कि इस ज्ञापन पर क्या कार्रवाई होती है।

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