MP News: भोपाल में बांग्लादेशी अब्दुल कलाम कैसे बना नेहा किन्नर, फर्जी दस्तावेजों का खेल व चौंकाने वाला खुलासा
Bhopal news: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बुधवारा इलाके से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां बांग्लादेशी नागरिक अब्दुल कलाम वर्षों से 'नेहा किन्नर' बनकर अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे उसने न केवल भारतीय नागरिकता का दावा किया, बल्कि विदेश यात्राएं भी कीं। भोपाल पुलिस ने उसे हिरासत में लिया है, और अब केंद्रीय जांच एजेंसियां भी इस मामले की तह तक जाने में जुट गई हैं। आइए, जानते हैं इस चौंकाने वाले मामले की पूरी कहानी।

अब्दुल का भारत आगमन और नेहा बनने की शुरुआत
जांच के अनुसार, अब्दुल कलाम करीब 25 साल पहले, वर्ष 2000 के आसपास, मात्र 17 साल की उम्र में बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत आया था। उसने पहले पश्चिम बंगाल और असम में कुछ समय बिताया, फिर महाराष्ट्र पहुंचा। इसके बाद वह भोपाल के मंगलवारा और बुधवारा इलाकों में आकर बस गया। यहां उसने अपनी पहचान 'नेहा किन्नर' के रूप में स्थापित की और स्थानीय किन्नर समुदाय के बीच घुलमिल गया। उसने न केवल अपने हावभाव और बोलचाल को किन्नर समुदाय के अनुरूप ढाला, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय नागरिकता का झूठा प्रमाण भी तैयार किया।
अब्दुल ने बताया कि उसने एजेंट्स की मदद से फर्जी परिचय पत्र बनवाया, जिसके आधार पर आधार कार्ड, वोटर आईडी, और यहां तक कि पासपोर्ट भी हासिल कर लिया। इन दस्तावेजों के सहारे वह न केवल भारत में बेरोकटोक रह रहा था, बल्कि बांग्लादेश सहित अन्य देशों की यात्राएं भी कर चुका था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उसने भोपाल में पिछले 10 सालों में अलग-अलग घरों में रहते हुए अपनी असल पहचान को पूरी तरह छिपाए रखा।
फर्जी दस्तावेजों का जाल
अब्दुल उर्फ नेहा ने फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में कुछ एजेंट्स की मदद ली थी। उसने पुलिस को दो व्यक्तियों के नाम बताए हैं, जिनके खिलाफ भोपाल पुलिस ने पूछताछ शुरू कर दी है। ये दोनों पुराने भोपाल में रहते हैं और इन पर फर्जी दस्तावेज बनाने में संलिप्तता का संदेह है। पुलिस अब इन आरोपों की तस्दीक कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन शामिल हो सकता है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि अब्दुल ने सबसे पहले फर्जी परिचय पत्र बनवाया, जिसके आधार पर उसने अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार किए। इन दस्तावेजों की मदद से उसने न केवल स्थानीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित की, बल्कि सामाजिक गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। यह मामला भारतीय सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, क्योंकि इतने लंबे समय तक वह बिना किसी संदेह के भोपाल में रहता रहा।
लिंग परीक्षण की तैयारी
पुलिस अब अब्दुल उर्फ नेहा का लिंग परीक्षण कराने की तैयारी में है, ताकि यह साफ हो सके कि क्या वह जन्म से किन्नर है या केवल पहचान छिपाने के लिए किन्नर के भेष में रह रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अब्दुल जैविक रूप से पुरुष है, लेकिन उसने अपनी आवाज, हावभाव, और पहनावे को इस तरह बदला कि वह पूरी तरह से किन्नर समुदाय का हिस्सा लगे। इस वजह से उसकी निगरानी के लिए तलैया थाने में दो महिला आरक्षकों को तैनात किया गया है।
किन्नर समुदाय की चुप्पी
दैनिक भास्कर के संवाददाता ने उस किन्नर टोली से संपर्क करने की कोशिश की, जिसके साथ नेहा रहती थी। लेकिन उसके साथी किन्नरों ने इस मामले पर कोई भी जानकारी साझा करने से साफ इनकार कर दिया। इससे यह सवाल उठता है कि क्या समुदाय को उसकी असल पहचान के बारे में कोई जानकारी थी या वह पूरी तरह से अपनी बनावटी पहचान में घुलमिल गया था।
आपराधिक पृष्ठभूमि और जांच
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि अब्दुल उर्फ नेहा की आपराधिक पृष्ठभूमि रही है। वर्ष 2019 में एमपी नगर थाने में उसके खिलाफ एक मामला दर्ज हुआ था। इसके अलावा, पांच साल पहले एक अन्य किन्नर, काजल मुंबईया, के साथ उसका झगड़ा हुआ था, जिसके चलते एमपी नगर थाने में एक केस दर्ज किया गया था। इस मामले की सुनवाई जल्द ही कोर्ट में होनी है, और तब तक उसे डिपोर्ट नहीं किया जाएगा।
पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड्स, और चैट्स की गहन जांच कर रही है। साइबर क्राइम टीम की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि क्या उसका किसी संदिग्ध गतिविधि या सीमा-पार नेटवर्क से कोई संबंध था। केंद्रीय जांच एजेंसियों को भी इस मामले की जानकारी दे दी गई है, और वे अब्दुल से गहन पूछताछ कर रही हैं।
पुलिस की गोपनीयता और सियासी बवाल
एडिशनल डीसीपी जोन-3 शालिनी दीक्षित ने बताया कि यह मामला अत्यंत गंभीर है, और इसलिए पूरी कार्रवाई को गोपनीय रखा गया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि अब्दुल भोपाल में कब से रह रहा था और क्या वह किसी संदिग्ध गतिविधि में शामिल था। हालांकि, अब तक उसके खिलाफ कोई औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, जो इस मामले को और रहस्यमय बनाता है।
इस मामले ने सियासी तूल भी पकड़ा है। कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने इसे जांच एजेंसियों की नाकामी करार देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की राजधानी में एक बांग्लादेशी नागरिक इतने सालों तक फर्जी पहचान के साथ रह रहा था, यह सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाता है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की गहन जांच होनी चाहिए।
डिपोर्टेशन की प्रक्रिया
भोपाल पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा के अनुसार, शहर में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए विशेष सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद अब्दुल उर्फ नेहा को बांग्लादेश डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि, कोर्ट में लंबित मामले के कारण इसमें कुछ समय लग सकता है।
यह मामला न केवल भोपाल, बल्कि पूरे देश में अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क की गंभीरता को उजागर करता है। अब्दुल कलाम उर्फ नेहा किन्नर की कहानी यह दर्शाती है कि कैसे एक व्यक्ति वर्षों तक अपनी पहचान छिपाकर सामाजिक और कानूनी व्यवस्था को धोखा दे सकता है।
पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियां अब इस मामले की हर कड़ी को खंगाल रही हैं, ताकि ऐसे अन्य मामलों को रोका जा सके। भोपाल पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि शहर में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।












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