बढ़ते संक्रमण से बचने के लिए AIIMS की विशेष सलाह, जानिए डेंगू, टाइफाइड और त्वचा रोगों से कैसे रहें सुरक्षित
Bhopal AIIMS News: मानसून का मौसम बारिश की फुहारों के साथ ताजगी लाता है, लेकिन इसके साथ ही जलजनित और संक्रामक रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। नमी, गंदा पानी, और मच्छरों की बढ़ती तादाद डायरिया, टाइफाइड, हैजा, मलेरिया, डेंगू, और त्वचा संक्रमण जैसी बीमारियों को न्योता देती है। ऐसे में भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने नागरिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य सलाह जारी की है, ताकि वे इस मौसम में स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें।
AIIMS भोपाल के कार्यपालक निदेशक अजय सिंह के मार्गदर्शन में तैयार ये सलाहें न केवल सरल हैं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से अपनाई जा सकती हैं। अजय सिंह ने कहा, "मानसून में थोड़ी सी सतर्कता और स्वच्छता आपको और आपके परिवार को गंभीर बीमारियों से बचा सकती है।"

बीमारियों का बढ़ता खतरा
मानसून के दौरान भोपाल में भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात ने स्वास्थ्य समस्याओं को और गंभीर बना दिया है। भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में डेंगू और मलेरिया के मामले बढ़ रहे हैं, क्योंकि पानी के ठहराव ने मच्छरों के प्रजनन को बढ़ावा दिया है। AIIMS भोपाल की विशेषज्ञ टीम ने बताया कि नमी और गंदे पानी के कारण डायरिया, टाइफाइड, और हैजा जैसी जलजनित बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। इसके अलावा, गीले कपड़ों और नमी से फंगल इन्फेक्शन और त्वचा रोग भी आम हो गए हैं।
अजय सिंह ने कहा, "मानसून में बच्चों और बुजुर्गों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। डायरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियां बच्चों में तेजी से फैलती हैं, और थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हो सकती है।" भोपाल के सरकारी अस्पतालों में पिछले दो हफ्तों में डेंगू के 50 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जबकि वायरल बुखार के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।
AIIMS भोपाल की विशेष सलाह: स्वच्छता और सतर्कता
AIIMS भोपाल ने मानसून में स्वस्थ रहने के लिए कुछ सरल और प्रभावी सलाहें जारी की हैं, जो आम लोगों के लिए आसानी से लागू करने योग्य हैं। ये सलाहें न केवल बीमारियों से बचाव करती हैं, बल्कि परिवारों को सुरक्षित और स्वस्थ रखने में भी मदद करती हैं।
1. हाथों की स्वच्छता: पहला कदम
AIIMS की विशेषज्ञ टीम ने जोर देकर कहा कि हाथों की स्वच्छता मानसून में सबसे बड़ा हथियार है। प्रो. अजय सिंह ने बताया, "हाथ धोने की आदत डायरिया, टाइफाइड, और हैजा जैसी बीमारियों को 50% तक कम कर सकती है।" AIIMS ने कुछ खास मौकों पर साबुन से 20 सेकंड तक हाथ धोने की सलाह दी है:
- शौचालय जाने के बाद
- खाना बनाने या खाने से पहले
- बच्चों का मल साफ करने के बाद
- बच्चों को खाना खिलाने से पहले
- कूड़ा, जानवर, या गंदी सतह को छूने के बाद
2. साफ पानी: जलजनित बीमारियों का काल
मानसून में गंदा पानी डायरिया, टाइफाइड, और हैजा का सबसे बड़ा कारण बनता है। AIIMS ने सलाह दी कि केवल उबला हुआ या RO/फिल्टर किया हुआ पानी ही पिया जाए। प्रो. अजय सिंह ने कहा, "मानसून में नल का पानी या खुले स्रोतों का पानी बिना शुद्धिकरण के पीना खतरनाक हो सकता है।"
AIIMS ने सुझाव दिया कि पानी को कम से कम एक मिनट तक उबालें और ठंडा होने के बाद ही पिएं। इसके अलावा, बोतलबंद पानी खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और सील की जांच करें।

3. मच्छरों से बचाव: डेंगू और मलेरिया पर प्रहार
मच्छरों का प्रकोप मानसून में डेंगू और मलेरिया का सबसे बड़ा कारण है। AIIMS ने घर और आसपास पानी जमा न होने देने की सलाह दी है। विशेषज्ञों ने कहा:
- कूलर की सफाई: हर हफ्ते कूलर का पानी बदलें और साफ करें।
- गमले और टायर: इनमें जमा पानी को हटाएं, क्योंकि ये मच्छरों के प्रजनन स्थल बनते हैं।
- मच्छरदानी और रेपेलेंट: रात में मच्छरदानी का उपयोग करें और मच्छर भगाने वाली क्रीम या कॉइल का इस्तेमाल करें।
4. बच्चों और बुजुर्गों की विशेष देखभाल
AIIMS ने बच्चों और बुजुर्गों को मानसून में विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। प्रो. अजय सिंह ने कहा, "इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए इन्हें भीड़-भाड़ और संक्रमित क्षेत्रों से दूर रखें।" विशेषज्ञों ने सुझाव दिया:
पौष्टिक आहार: बच्चों और बुजुर्गों को विटामिन C और जिंक युक्त भोजन, जैसे संतरा, नींबू, और दालें, दें।
गर्म कपड़े: गीले कपड़ों से बचें और सूखे, गर्म कपड़े पहनाएं।
टीकाकरण: सुनिश्चित करें कि बच्चों का नियमित टीकाकरण अपडेट हो।
5. त्वचा की देखभाल: फंगल इन्फेक्शन से बचाव
मानसून की नमी फंगल इन्फेक्शन और त्वचा रोगों को बढ़ावा देती है। AIIMS ने सलाह दी कि गीले कपड़े न पहनें और त्वचा को सूखा रखें। "नहाने के बाद त्वचा को अच्छी तरह सुखाएं और ढीले, सूती कपड़े पहनें। फंगल इन्फेक्शन के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।" इसके अलावा, जूतों और मोजों को नियमित रूप से सुखाएं और गंदे पानी में चलने से बचें।
6. ताजा भोजन: स्ट्रीट फूड से परहेज
AIIMS ने खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचने की सलाह दी। विशेषज्ञों ने कहा कि मानसून में स्ट्रीट फूड बैक्टीरिया और कीटाणुओं का घर बन जाता है। घर पर बना ताजा और गर्म भोजन ही खाएं।
भोपाल में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान
संस्थान ने मोबाइल मेडिकल वैन शुरू की हैं, जो बाढ़ प्रभावित और स्लम क्षेत्रों में जाकर मुफ्त जांच और दवाइयां बांट रही हैं। इसके अलावा, AIIMS ने स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों में जागरूकता शिविर आयोजित किए, जहां बच्चों और अभिभावकों को स्वच्छता और मच्छरों से बचाव के तरीके सिखाए गए।
प्रो. अजय सिंह ने कहा, "हमारा लक्ष्य हर परिवार तक स्वास्थ्य सलाह पहुंचाना है। मानसून में बीमारियां तेजी से फैलती हैं, लेकिन सही जानकारी और सावधानी से इनका मुकाबला किया जा सकता है।" AIIMS की मेडिकल वैन ने कोलार और बैरसिया जैसे क्षेत्रों में 500 से अधिक लोगों की जांच की।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. संजय वर्मा ने कहा, "AIIMS की सलाहें सरल और प्रभावी हैं। अगर लोग इनका पालन करें, तो डेंगू और डायरिया जैसे मामलों में 30-40% की कमी आ सकती है।" सामाजिक कार्यकर्ता रीना शर्मा ने कहा, "बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष शिविर और जागरूकता कार्यक्रम और बढ़ाए जाने चाहिए।"












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