Bhopal: सतपुड़ा आगजनी के बाद एक्शन में प्रशासन, हमीदिया समेत 250 हॉस्पिटल में फायर सेफ्टी सिस्टम दुरुस्त नहीं

Bhopal News: राजधानी भोपाल में सतपुड़ा भवन में आग लगने के बाद ऐसे सरकारी और प्रायवेट संस्थानों पर भी सवाल खड़े होने लगे है, जहां आग बुझाने के पर्याप्त उपकरण और स्टाफ नहीं है। अभी कुछ माह पहले नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मिलकर सरकारी व प्रायवेट अस्पतालों का निरीक्षण किया था। इसमें हमीदिया जेपी समेत ढाई सौ अस्पतालों को लिस्टेड किया था। इनमें फायर सेफ्टी सिस्टम दुरुस्त नहीं मिले थे और कई अस्पतालों के पास फायर एनओसी भी नहीं थी।

इन अस्पतालों में पहले हो चुकी हैं आगजनी की घटनाएं

भोपाल के हमीदिया हॉस्पिटल में आग लगने से बच्चों की मौत हो चुकी है। बता दे हमीदिया हॉस्पिटल कैंपस स्थित कमला नेहरू बिल्डिंग में नवंबर 2022 को आग लग गई थी इससे कई नवजात बच्चों की मौत हो गई थी जिस बिल्डिंग में घटना हुई वहां आग बुझाने के माकूल इंतजाम नहीं थे। इस कारण नवजात बच्चों को बचाया नहीं जा सका था।

Administration in action after Satpura arson, fire safety system not proper in 250 hospitals including Hamidia

जबलपुर के तीन मंजिला अस्पताल में आग से 8 लोगों की हुई थी मौत

मध्यप्रदेश के जबलपुर में 1 अगस्त को तीन मंजिला न्यू लाइफ मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के एंट्रेंस पर जनरेटर में शार्ट सर्किट की वजह से आग लगी थी हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा कई प्रायवेट हॉस्पिटलों में भी आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी है।

कार्रवाई के नोटिस थमाएं

आग से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं होने की वजह से मरीजों समझ स्टाफ की जान भी असुरक्षित है। इन अस्पतालों को चयनित कर नोटिस भेजा गया था। इन सभी अस्पतालों को फायर सेफ्टी सिस्टम की खामियों को दूर करने के लिए 1 साल का वक्त दिया गया था। यदि 1 साल के भीतर सिस्टम को ठीक नहीं किया जाता तो इन अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पिछले 4 माह से नहीं हुई चेकिंग

6 महीने के भीतर हर हस्पताल में चेकिंग की जाती है। अगस्त 2022 में चेकिंग हुई थी पिछले 4 माह से फिर कोई चेकिंग नहीं हुई है। 50 से ज्यादा बिस्तर वाले अस्पतालों को नगर निगम फायर सेफ्टी का सर्टिफिकेट देता है, सर्टिफिकेट रिन्यू ना कराने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई की जाती है। इस मामले में फायर ब्रिगेड अधिकारी साजिद खान का कहना है कि शहर के सभी अस्पतालों और नर्सिंग होम का निरीक्षण कर ढाई सौ अस्पतालों को नोटिस दिया गया था ज्यादातर अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम अपडेट नहीं थे या बदले नहीं गए थे अस्पताल के स्टाफ को भी फायर सेफ्टी सिस्टम चलाने की ट्रेनिंग नहीं दी गई।

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