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MP News Indore: रानीपुरा में दर्दनाक हादसा, जर्जर पांच मंजिला बिल्डिंग भरभराकर गिरी, 9 घायल अस्पताल पहुंचे

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में सोमवार रात को एक बड़ा हादसा हो गया। शहर के व्यस्त इलाके रानीपुरा के कोष्टी मोहल्ले में स्थित एक पुरानी पांच मंजिला आवासीय बिल्डिंग अचानक भरभराकर गिर गई। यह घटना करीब रात 9:30 बजे हुई, जब आसमान पर काले बादल छाए हुए थे और हल्की फुहारें पड़ रही थीं।

शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, बिल्डिंग में करीब 15 लोग मौजूद थे, जिनमें से 9 को घायल अवस्था में निकालकर महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (एमवाय) अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन दर्दनाक बात यह है कि मलबे के नीचे अभी भी कम से कम 6 लोगों के दबे होने की आशंका बनी हुई है।

Accident Indore Ranipura dilapidated five-story building collapses 9 injured rushed to hospital

बचाव दल, फायर ब्रिगेड, पुलिस और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) की टीमें रातभर मलबा हटाने में जुटी रहीं, लेकिन सुबह तक कोई नया अपडेट नहीं आया है।

घटना की सूचना मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग चीख-पुकार मचाने लगे, और आसपास की सड़कें जाम हो गईं। बिल्डिंग के मालिक शंभू भाई की यह संपत्ति 3-4 परिवारों को किराए पर दी गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण बिल्डिंग की नींव कमजोर हो चुकी थी, और दीवारों में गहरी दरारें पड़ गई थीं। गनीमत रही कि हादसा रात के शुरुआती समय हुआ, जब ज्यादातर लोग डिनर के बाद बाहर घूमने या बाजार गए हुए थे। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर यह हादसा देर रात के 11-12 बजे होता, तो भारी संख्या में जानें जा सकती थीं।

Accident Indore Ranipura dilapidated five-story building collapses 9 injured rushed to hospital

हादसे की पूरी कथा: कैसे हुई यह त्रासदी?

रानीपुरा इंदौर का एक पुराना और घनी आबादी वाला इलाका है, जहां जवाहर मार्ग पार्किंग के पास स्थित यह बिल्डिंग दशकों पुरानी थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह इमारत 1980 के दशक में बनी थी और समय के साथ इसकी मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। पिछले हफ्ते से इंदौर में मानसून की वापसी के साथ भारी बारिश हो रही थी, जिससे शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई थी। सोमवार को भी दिनभर हल्की-फुल्की बारिश जारी रही, और शाम होते-होते बिल्डिंग की दीवारों में दरारें दिखाई देने लगीं।

रात करीब 9:30 बजे अचानक एक जोरदार धमाका-सा हुआ, और पूरी बिल्डिंग ताश के पत्तों की तरह ढह गई। मलबा चारों तरफ बिखर गया, जिसमें कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़े और लोहे की छड़ें शामिल थीं। बिल्डिंग के अंदर मौजूद लोग-जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे-मलबे के नीचे दब गए। शुरुआती बचाव में स्थानीय लोग और 'बदलाव दल' (एक स्थानीय स्वयंसेवी संगठन) ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने हाथों से मलबा हटाया और घायलों को बाहर निकाला। एक प्रत्यक्षदर्शी, मोहल्ले के रहने वाले रामेश्वर लाल ने बताया, "हम लोग पास की दुकान पर चाय पी रहे थे। अचानक जोरदार आवाज आई, और देखते ही देखते बिल्डिंग गायब हो गई। हम दौड़े और दो-तीन लोगों को बाहर निकाला। लेकिन अंदर चीखें आ रही थीं।"

पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह और कलेक्टर शिवम वर्मा घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे। मेयर पुष्यमित्र भार्गव भी रात में ही वहां पहुंचे और बचाव कार्यों का जायजा लिया। फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां, एनडीआरएफ की एक टीम और जेसीबी मशीनें तैनात की गईं। बिजली की लाइनें काट दी गईं ताकि कोई और हादसा न हो, और आसपास की इमारतों को खाली कराने का काम शुरू हो गया। सेंट्रल कोतवाली थाने के प्रभारी संजू कांबले ने बताया, "यह बिल्डिंग पहले से ही जर्जर हालत में थी। हम रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। अभी तक 9 घायलों को अस्पताल भेजा गया है, लेकिन मलबे में और लोग फंसे हो सकते हैं।"

घायलों की हालत: एमवाय अस्पताल में भर्ती, कोई मौत की पुष्टि नहीं

एमवाय अस्पताल में भर्ती 9 घायलों में ज्यादातर मामूली चोटें हैं-जैसे सिर में चोट, पैरों में मोच और कटाव। लेकिन दो-तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है, जहां फ्रैक्चर और आंतरिक चोटों का इलाज चल रहा है। अस्पताल के डीन डॉ. एचके मिश्रा ने कहा, "सभी घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया है। उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन निगरानी में रखा गया है।" घायलों के नामों में से कुछ-जैसे रमेश पटेल, सीता बाई और छोटू लाल-की पुष्टि हुई है, लेकिन बाकी की जानकारी इकट्ठा की जा रही है।

मलबे में दबे 6 लोगों की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। एनडीआरएफ की टीम डॉग स्क्वायड के साथ काम कर रही है, जो आवाजों और गंध से लोगों की तलाश कर रही है। सुबह तक बचाव कार्य तेज हो गया, और जेसीबी से मलबा हटाने की कोशिश जारी है।

स्थानीय निवासियों का गुस्सा: "बार-बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं"

आसपास के निवासियों ने मीडिया से बातचीत में गुस्सा जाहिर किया। एक बुजुर्ग निवासी, लक्ष्मी देवी ने कहा, "यह बिल्डिंग सालों से खतरनाक थी। दीवारें झुक रही थीं, छत से पानी टपक रहा था। हमने नगर निगम को कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसे खाली कराने की मांग उठ चुकी थी।" एक अन्य निवासी, अजय वर्मा ने बताया, "अगर हादसा रात 12 बजे होता, तो सारे परिवार सो रहे होते। कम से कम 20-25 लोग मर जाते। सौभाग्य से ज्यादातर बाहर थे।" स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुरानी इमारतों पर निगम की नजर ही नहीं है, और अवैध निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है।

जांच के आदेश: जिम्मेदारी तय होगी, क्या है बिल्डिंग को गिरने का मुख्य कारण?

जिला प्रशासन ने हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा, "हम पूरी घटना की गहन जांच कराएंगे। बिल्डिंग की निर्माण गुणवत्ता, मालिक की लापरवाही और निगम की भूमिका सबकी पड़ताल होगी। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।" प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बारिश के कारण मिट्टी का कटाव हुआ, जिससे नींव कमजोर हो गई। लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि क्या निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ था? इंदौर नगर निगम (आईएमसी) ने बताया कि बिल्डिंग को खतरे की सूची में शामिल करने की कोई पूर्व चेतावनी नहीं मिली थी, लेकिन अब आसपास की 10 पुरानी इमारतों का सर्वे शुरू हो गया है।

यह घटना इंदौर के पुराने इलाकों में जर्जर भवनों की समस्या को फिर से उजागर करती है। पिछले साल शहर में कई ऐसी इमारतें ढह चुकी हैं, जिनमें से कुछ अवैध निर्माण थीं। मई 2025 में आईएमसी ने एक अवैध चार मंजिला बिल्डिंग को विस्फोट से गिराया था, लेकिन ऐसी कार्रवाइयां अपर्याप्त साबित हो रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट और सख्ती की जरूरत है।

उम्मीद की किरण, लेकिन समय के खिलाफ जंग

सुबह 8 बजे तक बचाव कार्य तेज गति से चल रहा था। एनडीआरएफ के कमांडो मलबे में उतरकर तलाश कर रहे हैं, जबकि फायर ब्रिगेड पानी और धूल को नियंत्रित कर रही है। पुलिस ने इलाके को सील कर दिया है, और ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया है। मेयर भार्गव ने कहा, "हम हर संभव कोशिश कर रहे हैं। घायलों के परिवारों को हर सहायता दी जाएगी।" स्थानीय विधायक और सांसद भी मौके पर पहुंचे, जहां उन्होंने प्रभावित परिवारों से बात की।

यह हादसा न सिर्फ रानीपुरा के लिए, बल्कि पूरे इंदौर के लिए एक सबक है। पुरानी इमारतों की अनदेखी जानलेवा साबित हो रही है। प्रशासन ने सभी जोनों में जर्जर भवनों की सूची तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं। फिलहाल, मलबे में दबे लोगों की सुरक्षित निकासी की दुआ की जा रही है। सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने और बाकी लोगों के बचने की कामना के साथ, शहर एकजुट होकर इस संकट से निपटने को तैयार है।

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