Bhopal corruption News : गैस पीड़ितों के लिए 3.6 करोड़ से 36 योगा सेंटर बनने थे, लेकिन बने सिर्फ 7 कैंद्र
भोपाल में गैस पीड़ितों की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए करीब 9 साल पहले 3.6 करोड़ रुपए में 36 योगा सेंटर बनाने के लिए राज्य सरकार को केंद्र से बजट मिला था।लेकिन इन 36 सेंटर में से महज 7 योगा सेंटर ही बन पाए। बाकी अब लंबित
दवाओं के साथ योग के जरिए भी गैस पीड़ितों की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए करीब 9 साल पहले 3.6 करोड़ रुपए में 36 योगा सेंटर बनाने के लिए राज्य सरकार को केंद्र से बजट मिला था।लेकिन इन 36 सेंटर में से महज 7 योगा सेंटर ही बन पाए। बाकी अब लंबित है। ये सातों ही योगा केंद्र सिर्फ कागजों में गैस पीड़ितों के लिए दर्ज है। इनमें से ज्यादातर का उपयोग दूसरे कामों में हो रहा है। हाल में सेंट्रल लाइब्रेरी के पास एक केंद्र में आयोजन के बाद जब गैस राहत विभाग से जानकारी ली गई थी, तो उसे भी एमएचआरसी के अधीन बताया गया। बाकी के 6 सेंटरों के संचालन का जिम्मा किसका इसके बारे में अधिकारियों को जानकारी नहीं है। अब इस मामले में रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

ईओडब्ल्यू में भ्रष्टाचार की शिकायत
गैस पीड़ितों के लिए बनने वाले 36 योगा केंद्र में सिर्फ सात सेंटर बनाने में हुए भ्रष्टाचार के मामले की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता रचना धींगरा ने EOW को भी भेजी है। इस शिकायत में बताए गया कि सेंटर बनने के बाद इन पर गैस राहत विभाग ने ध्यान नहीं दिया। बल्कि इन्हें संस्कृति विभाग नगर निगम के हवाले कर दिया। इसका उपयोग योगा केंद्रों के बजाए शादी हॉल के तौर पर हो रहा था। गैस पीड़ित संगठनों के विरोध के बाद इन्हें गैस राहत विभाग ने संस्कृति और नगर निगम से वापस ले लिया, लेकिन अभी भी जिन गैस पीड़ितों के लिए सेंटर बनाए गए थे, उनके बजाए दूसरे लोग उपयोग कर रहे हैं।
बता दे निजी क्षेत्र को पीपीपी मोड पर योगा केंद्र खोलने के लिए गैस राहत विभाग ने नियम व शर्तों का ड्राफ्ट तैयार किया था। इसे परीक्षण के लिए खेल एवं युवक कल्याण विभाग को भी भेजा था। इसके बाद साथ योगा केंद्र तो खुले लेकिन गैस पीड़ितों को इससे कोई लाभ नहीं हुआ। क्योंकि इनका उपयोग कमर्शियल तौर पर हो रहा था।












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