बरेली: ग्रामीणों को नहीं मिली कांवड़ निकालने की परमिशन, धर्म परिवर्तन-पलायन की दी धमकी
बरेली। यूपी के बरेली में सावन शुरू होते ही साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने लगा है। बरेली के मिल्क पिछोड़ा गांव में मुसलमानों के उत्पीड़न से तंग आकर हिन्दुओं ने धर्म परिवर्तन और गांव से पलायन का फैसला किया है। गांव में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, जबकि मुस्लिम बहुसंख्यक हैं। वहीं, इस मामले में एसएसपी मुनीराज का कहना है कि ग्रामीण नया मंदिर बनाना चाहते हैं, जो नियम विरुद्ध है।

क्या है पूरा मामला
बरेली जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूरी पर स्थित है मिल्क पिछौड़ा गांव। ये गांव वरुण गांधी के संसदीय क्षेत्र पीलीभीत की बहेड़ी विधानसभा में आता है। इस गांव में करीब 150 हिन्दू हैं, जबकि 1000 मुसलमान हैं। गांव के हिन्दू पक्ष का आरोप है कि ग्राम समाज की जमीन पर पिछले 70 वर्षों से एक छोटा सा मंदिर है, जिसका ग्रामीण निर्माण करवाना चाहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मुस्लिम समुदाय के लोग उन्हें मंदिर में न तो पूजा करने देते और न ही मंदिर का निर्माण कराने देते हैं। गांव के हिन्दुओं का कहना है कि वो लोग जब भी पूजा करने जाते है तो मुस्लिम समुदाय के लोग हाथों में लाठी डंडे और ईंट पत्थर लेकर आ जाते हैं और मारपीट करते हैं।

नहीं दी गई कांवड़ निकालने की परमिशन
ग्रामीणों का कहना है कि मोदी और योगी की सरकार में भी उनका उत्पीड़न हो रहा है। वे न तो मंदिर में पूजा कर सकते हैं और न ही कांवड़ निकाल सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें कांवड़ निकालने की परमीशन भी नहीं दी गई है। गांव में मुस्लिम समुदाय के लोग लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़खानी करते हैं और जान से मारने की धमकी देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी हालत में अब गांव में रहना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब मोदी योगी की सरकार में भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही तो वो लोग धर्म परिवर्तन कर गांव से पलायन कर देंगे। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन पर भी इकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुलिस ने हिन्दू समाज के सैकड़ों लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और सभी को मुचलका पाबंद भी किया गया है।

क्या कहते हैं एसएसपी
भाजपा नेता डोरीलाल शर्मा का आरोप है कि उनकी सरकार में भी हिन्दुओं की कोई सुनवाई नहीं हो रही, इसलिए वो धर्म परिवर्तन करेंगे। वहीं, इस मामले में एसएसपी मुनीराज का कहना है कि ग्रामीण नया मंदिर बनाना चाहते हैं, जो नियम विरुद्ध है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार किसी नए धर्मिक स्थल का निर्माण नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि कांवड़ यात्रा की नई परम्परा को परमिशन नहीं दी गई है और विवाद करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। गांव में एहतियात के तौर पर पुलिस तैनात कर दी गई है।












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