BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने नहीं मांगी मुस्लिम कर्मियों से कोई माफी, जानें बेंगलुरु बेड्स घोटाले का पूरा मामला

BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने नहीं मांगी मुस्लिम कर्मियों से कोई माफी, जानें बेंगलुरु बेड्स घोटाले का पूरा मामला

बेंगलुरु, 07 मई: बेंगलुरु दक्षिण से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद और युवा नेता तेजस्वी सूर्या इन दिनों विवादों में घिरे हुए हैं। बीजेपी के बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या पर बेंगलुरु बेड्स घोटाले में सांप्रदायिक ऐंगल देने का आरोप लग रहा है। लेकिन बेंगलुरु बेड्स घोटाला मामले में उस वक्त एक बड़ा ट्वविस्ट आया जब कई लीडिंग मीडिया हाउस ने ये खबर चलाई कि तेजस्वी सूर्या 6 मई को बेंगलुरु दक्षिण जोन के कोविड-19 वॉर रूम में गए और वहां काम करने वाले 200 कर्मचारियों से माफी मांगी। जबकि तेजस्वी सूर्या ने शुक्रवार (07 मई) को ट्वीट कर माफी मांगने वाली बात से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने माफी मांगने वाली खबर को एक फर्जी खबर बताया है। असल में तेजस्वी सूर्या विधायक सतीश रेड्डी, रवि सुब्रमण्या और उदय गरुडचर के साथ 4 मई को बेंगलुरु दक्षिण जोन के कोविड-19 वॉर रूम में गए थे। जहां उन्होंने काम कर रहे 16 मुस्लिम कर्मचारियों के नाम लेते हुए उनपर कोविड बेड ब्लॉकिंग घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया था।

Tejasvi Surya

बेंगलुरु बेड्स घोटाले में माफी मांगने वाली खबर से तेजस्वी सूर्या का इनकार

द न्यूज मिनट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि भाजपा बेंगलुरु दक्षिण के सांसद तेजस्वी सूर्या गुरुवार (6 मई) को शाम लगभग 7 बजे बेंगलुरु दक्षिण कोविड-19 वॉर रूम की फिर से समीक्षा की और वहां काम कर रहे 200 लोगों से माफी मांगी।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि तेजस्वी सूर्या ने माफी मांगते हुए कहा, ''मुझे माफ कीजिएगा, यह मेरी ही गलती थी। मुझे एक सूची दी गई और मैंने उसे बस पढ़ दिया था। मुझे पता है कि कोविड वॉर रूम के कर्मचारी इससे बहुत प्रभावित हुए हैं।''

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हालांकि तेजस्वी सूर्या ने इन खबरों को गलत बताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, ''जब इन लोगों के पास कोई खबर नहीं होती है तो ये फेक न्यूज बनाते हैं।''

रिपोर्ट में क्या-क्या दावे किए गए हैं?

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तेजस्वी सूर्या ने अपनी सफाई में कहा, उन्होंने बस सूची में दी गई नामों को पढ़ा था। दावा किया गया है कि तेजस्वी सूर्या ने वॉर रूम के सदस्यों को यह नहीं बताया कि उन्हें इस तरह के नामों की सूची कहां से मिली थी। तेजस्वी सूर्या ने 4 मई को नाम पढ़कर आरोप लगाने वाले दिन भी इस बात की जानकारी नहीं दी थी कि उन्हें नामों की लिस्ट कहां से और कैसे मिली और इसे सत्यापित कैसे किया गया है।

तेजस्वी ने सफाई में कहा, ''मेरा सांप्रदायिक होने का कोई इरादा नहीं था और ना ही नामों को पढ़ते वक्त मैंने ये ध्यान दिया कि लिस्ट में दिए गए सारे नाम एक ही समुदाय से थे।'' तेजस्वी सूर्या ने दावा किा कि उन्होंने ये नहीं देखा कि क्या यह हिंदू है या मुस्लिम।

तेजस्वी सूर्या के आरोप लगाने के बाद कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर किया गया परेशान

बताया जा रहा है कि जिन 16 मुस्लिम कर्मचारियों पर तेजस्वी सूर्या ने कोविड-19 बेड ब्लॉकिंग घोटाले का आरोप लगाया था, उनका सोशल मीडिया पर काफी उत्पीड़न किया गया है। सिर्फ 16 मुस्लिम कर्मचारियों को ही नहीं बल्कि वॉर रूम में काम करने वाले 212 लोगों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भद्दे-भद्दे कमेंट किए गए। उनके नाम और नंबर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लीक भी हो गए हैं।

जिन कर्मचारियों के नाम लेकर आरोप लगाए गए, उनका क्या कहना है?

नाम ना उजागर करने की शर्त पर वॉर रूम में काम करने वाले एक (जिसका नाम तेजस्वी सूर्या ने लिया था) शख्स ने एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए कहा, ''हम लोग बेहद निचले स्तर पर कार्यरत हैं। हम ये तय नहीं करते हैं कि बेड किसे मिलना चाहिए। शिफ्ट में मौजूद डॉक्टर हमें जो निर्देश देते हैं, हम वही करते हैं। हम सिर्फ फोन कॉल लेते हैं और फिर हमें डॉक्टर बताते हैं कि बेड के लिए बुकिंग लेनी है या नहीं।''

एक अन्य शख्स ने कहा, ''हम लोगों को यहां काम पर एक निजी कंपनी ने रखा है। हमें कहा गया था कि वॉर रूम में काम करना है। हमें तो 2 महीने में पहली बार 12 हजार रुपये मिले हैं।''

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