सच्ची कहानी: कभी था क्रिमिनल आज पढ़ाता है पुलिसवालों को

साल 2006 की बात है... शाम के करीब सात बजे, एवी प्रवीण नाम का युवक ड्यूटी से लौटते वक्त अपने दोस्तों से मिला। दोस्तों ने कहा, कि छोटी-मोटी नौकरी में क्या रखा है, चलो बड़ा हाथ मारते हैं। दोनों दोस्त पहले ही एक प्लान बना चुके थे, जिसमें प्रवीण का साथ चाहिये था। बातों ही बातों में प्लान को अंजाम देने का निर्णय लिया गया और महज तीन दिन के अंदर तीनों ने एक बड़ी डकैती को अंजाम दिया।

कुछ दिन फरारी काटने के बाद तीनों पकड़े गये। और तीनों को सजा हो गई। प्रवीण को भी। छह साल पहले जेल की सजा काटने वाला प्रवीण आज उलटा पुलिस वालों को ही पढ़ाता है। शायद आप विश्वास न करें, लेकिन यह सच है और यह कोई पुलिस श‍िक्षक भर्ती घोटाला नहीं, बल्क‍ि व्यक्त‍ि परिवर्तन है, जो प्रवीण में पिछले छह सालों में आया।

कैसे बदली प्रवीण की जिंदगी?

छोटे-मोटे अपराधों को अंजाम देने वाला प्रवीण आज आर्ट ऑफ लिविंग का योगा इंस्ट्रक्टर है और अब तक 1000 से ज्यादा पुलिस के अध‍िकारियों व सिपाहियों को योगा सिखा चुका है। 31 वर्षीय प्रवीण के जीवन में इस बड़े परिवर्तन की शुरुआत तब हुई जब बेंगलुरु के डीसीपी आलोक कुमार ने आर्ट ऑफ लिविंग के डा. नागराज गंगोली को आमंत्रित किया।

यह आमंत्रण था मेडिटेशन और योगा के माध्यम से पुलिसवालों और अपराध‍ियों में परिवर्तन लाने के लिये। उसी वक्त प्रवीण डा. गंगोली के संपर्क में आया। प्रवीण ने योग और ध्यान की कक्षाओं को तनमयता के साथ किया और आगे चलकर अध्ययन भी। देखते ही देखते वह योगा इंस्ट्रक्टर बन गया। मंडया के मूल निवासी प्रवीण अलग-अलग जगहों पर मेडिटेशन कैम्प लगाते हैं। [पढ़ें- एक मंदिर ऐसा जहां की जाती है कुत्ते की पूजा]

कभी कोसता था अपने जीवन को

यही नहीं चिकमंगलुरु में वेदावती नदी को पुनर्जीवित करने का कार्य चल रहा है और प्रवीण उस कार्य का भी एक अहम हिस्सा हैं। प्रवीण बताते हैं कि 2001 में वो बेंगलुरु आये और वहां हेनको फैक्ट्री में काम शुरू किया, उसके बाद एचएएल के साथ काम किया। और उसी वक्त डकैती का प्लान बनाया था। प्रवीण ने ही उस डकैती का प्लान कागज पर तैयार किया था।

अपनी पिछली जिंदगी की तरफ देख कर प्रवीण कहते हैं, "जब मैं जेल में था, उस वक्त मेरी मां बीमार थी, मैंने तभी सोच लिया था कि अब पढ़ाई नहीं करूंगा। लेकिन मेरे माता-पिता आये और मेरी जमानत करवायी। जब पुलिस मुझे कोर्ट तक ले जाती थी, और रिश्तेदार देखते थे, तब बहुत बुरा लगता था। लेकिन मैं महज छह दिन डा. नागराज के साथ रहा और मेरी लाइव पूरी तरह बदल गई। मेरे अंदर एक उम्मीद जागी और मैंने खुद से कहा हां मैं वापस अपनी जिंदगी को अच्छा बना सकता हूं।"

प्रवीण कहते हैं, "अगर मैं डा. नागराज के संपर्क में नहीं आता, तो जेल से छूटने के बाद शायद मैं फिर से अपराध की दुनिया में वापस चला जाता। उस वक्त मेरा नाम राउडी-शीटर्स की लिस्ट में जा चुका था।"

प्रवीण ने और क्या-क्या किया

जीवन में इतना बड़ा परिवर्तन होने के बाद मानो प्रवीण ने अपना जीवन देश और समाज को समर्पित कर दिया। तीन साल तक कर्नाटक के गांव में रह कर शौचालय बनवाये।

यह गांव नक्सलियों का इलाका माना जाता है। श्रिंगेरी के गांव में गांव वालों के लिये पुल बनवाया ओर उन्हें देश की मुख्यधारा से जोड़ा। लक्ष्मीपुरा झील को पुनर्जीवन देने में बड़ी भूमिका निभायी। भागलकोट बाढ़ पीड़‍ितों के लिये मकान बनवाये। बेंगलुरु की झुग्ग‍ियों में रहने वाले बच्चों के लिये स्पोट्स क्लब बनवाया।

प्रवीण आज आर्ट ऑफ लिविंग के ट्रेंड टीचर हैं और अब तक 1000 से ज्यादा पुलिस वालों, ऑटो चालकों, बस ड्राइवरों, अपराध‍ियों, व तमाम लोगों को ध्यान और योग सिखा चुके हैं।

वेदावती नदी को पुनर्जीवन देने के लिये काम कर रही टीम के अहम सदस्य के रूप में कार्यरत प्रवीण की शादी हो चुकी है। बेटे का नाम धनुष है। पत्नी कहती है, "मैं अपने पति के प्रयासों के अच्छे परिणामों का इंतजार कर रही हूं और उस दिन का इंतजार कर रही हूं जब मेरे चिकमंगलुरु में वेदावती नदी का पानी आयेगा और मेरा बेटा उसमें डुबकी लगायेगा।"

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