'विपक्ष के नेता के बिना शीतकालीन सत्र में नहीं होंगे शामिल', कर्नाटक BJP विधायकों का पार्टी को अल्टीमेटम
Karnataka BJP MLA: कर्नाटक विधानसभा चुनाव में करारी हार के गम से शायद बीजेपी अभी तक उभर नहीं पाई है। ऐसा इसलिए क्योंकि चुनाव के 6 महीने के ज्यादा के वक्त के बाद भी भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष यानी विपक्ष का नेता (एलओपी) नियुक्ति नहीं किया गया है, जिसके चलते अब पार्टी के विधायकों ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में हिस्सा नहीं लेने का अल्टीमेटम दिया है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी विधायकों ने कांग्रेस के ताने का हवाला देते हुए बेलगावी में आगामी शीतकालीन सत्र को छोड़ने की धमकी दी है, अगर पार्टी ने तब तक विपक्ष का नेता नियुक्त नहीं किया तो।

रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक विधानसभा चुनाव होने के लगभग छह महीने बाद भी भाजपा विधायकों ने पार्टी के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा की अध्यक्षता में हुई एक आंतरिक बैठक के दौरान पार्टी द्वारा विपक्ष के नेता (एलओपी) की नियुक्ति नहीं किए जाने पर निराशा और हताशा व्यक्त की। इसी के साथ विधायकों ने एलओपी की नियुक्ति नहीं होने पर बेलगावी में आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र में भाग नहीं लेने की भी धमकी दी।
सूत्रों के हवाले से बताया गया कि बेंगलुरु में हुई आंतरिक बैठक के दौरान भाजपा विधायकों ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का नाम नहीं बताए जाने को लेकर कांग्रेस के लगातार हमलों से वे शर्मिंदा हैं और उनके पास देने के लिए कोई जवाब नहीं है।
पार्टी के एक विधायक ने येदियुरप्पा से कहा कि वे नेता प्रतिपक्ष के बिना शीतकालीन सत्र में शामिल नहीं होंगे। वहीं इस पूरे मामले पर पूर्व सीएम येदियुरप्पा ने भरोसा दिलाया कि भाजपा बेलगावी में शीतकालीन सत्र के दौरान एक नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के लिए सभी प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि निर्णय पार्टी आलाकमान पर छोड़ दिया गया है।
कांग्रेस उड़ा रही बीजेपी का मजाक
कांग्रेस लगातार इस मामले को लेकर बीजेपी पर तंज कस रही है। बीजेपी की आंतरिक स्थिति को लेकर कांग्रेस कटाक्ष कर रही है। कहा जा रहा है कि राज्य के राजनीतिक इतिहास में ऐसी स्थिति कभी नहीं रही। कांग्रेस नेता दिनेश गुंडू राव ने कहा, "लगभग छह महीने हो गए हैं और वे (भाजपा) विधानसभा और विधान परिषद में एक नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति भी नहीं कर सकते। यह कर्नाटक भाजपा विधायकों के लिए शर्मनाक स्थिति है। यह खराब स्थिति को दर्शाता है।"
आपको बता दें कि 10 मई को हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया और 135 सीटें जीतकर सरकार बनाई। वहीं भाजपा 66 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही और जद (एस) सिर्फ 19 सीटों पर सिमट गई।












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