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जज्बे को सलाम : दृष्टिहीन छात्रा ने दी PET की परीक्षा, ऐसे खोई थी आंखों की रोशनी

उत्तर प्रदेश में PET की परीक्षा के दौरान एक बेहद ही भावनात्मक दृश्य तब देखने को मिला जब एक दृष्टिहीन छात्रा अपने गृह जनपद रायबरेली में परीक्षा केंद्र न होने की वजह से अमेठी के उमारमण राजकीय इंटर कालेज परीक्षा केंद्र पर पहुंची। सहयोगी के साथ जब सलोनी साहू परीक्षा देने केंद्र पर पहुंची तो वहाँ पर मौजूद सभी स्टाफ और छात्रों ने उनके जज़्बे को सलाम किया।

रविवार को आयोजित हुई थी PET की परीक्षा

रविवार को आयोजित हुई थी PET की परीक्षा

दरअसल मामला रविवार को उत्तर प्रदेश में आयोजित प्रारम्भिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) का है। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से विभिन्न सरकारी विभागों में समूह 'ग' के पदों पर भर्ती के लिए दो पालियों में परीक्षा हुई। छिटपुट घटनाओं को छोड़ कर परीक्षा शांतिपूर्वक सम्पन्न हुई। इसी परीक्षा में शामिल हुई एक छात्रा सलोनी साहू जो की दृष्टिहीन हैं। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए उन्हें अपने जनपद रायबरेली से काफी दूर सफर कर अमेठी के उमारमण राजकीय इंटर कालेज के परीक्षा केंद्र पर जाना पड़ा। इसमें इन्हे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा जिससे वह काफी आहत दिखीं। हालांकि परीक्षा केंद्र पर मौजूद सभी निरीक्षक और स्टाफ ने पूरा सहयोग किया और दिव्यांग छात्रा ने अपनी परीक्षा पूरी की।

जन्म से नहीं थीं दृष्टिहीन

जन्म से नहीं थीं दृष्टिहीन

बता दें की सलोनी साहू जन्म से नेत्रहीन नहीं थी। 2017 में छात्रा को बुखार आया और इसे सामान्य बुखार समझ उन्होंने अपना इलाज कराया। धीरे धीरे उनकी हालत बिगड़ती गई और सही समय पर सही इलाज न मिलने के कारण उनकी दृष्टि हमेशा के लिए चली गई। ऐसी घटना किसी भी सामान्य इंसान को अंदर से पूरी तरह झंजोड़ कर रख देती है परन्तु सलोनी ने इस दुर्भाग्यपूर्ण स्तिथि को एक चुनौती की तरह स्वीकार किया और जीवन में कुछ कर दिखाने की ठान ली। इसी लिए वह तमाम परेशानियों के बावजूद पीईटी की परीक्षा देने आई। सलोनी का कहना है की वह अपने जीवन में हार नहीं मानेंगी और खुद के पैरो पर खड़े होकर एक मिसाल कायम करेंगी। परीक्षा पास कर वह नौकरी करना चाहती हैं।

दृष्टिहीन कैसे देते हैं परीक्षा ?

दृष्टिहीन कैसे देते हैं परीक्षा ?

दृष्टिहीन छात्र-छात्राएं वैसे ही परीक्षा देते हैं जैसे आम बच्चे बस फर्क यह है कि वह अपनी कॉपियां खुद नहीं लिखते बल्कि उनका मिला हुआ हेल्पर लिखता है। इन नेत्रहीन बच्चों को इनकी कॉपियां लिखने के लिए एक हेल्पर मिलता है। इस हेल्पर की मदद से वह अपनी कॉपियां लिखते हैं। यहां हेल्पर देने में इस बात का ख्याल रखा जाता है कि हेल्पर की शैक्षिक योग्यता परीक्षा दे रहे छात्र-छात्रा से कम ही हो। इसके पीछे मकसद यह होता है कि हेल्पर अपनी तरफ से कुछ भी न लिख पाए। वह उतना ही लिख पाए जितना उसे ब्रीफ किया जाए। नेत्रहीनों की यह परीक्षाएं आमतौर एक बड़े सेंटर में ही आयोजित की जाती है। इसमें शिक्षकों द्वारा ड्यूटी के नियम भी कुछ अलग होते हैं।

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