कांग्रेस नेत्री अदिति सिंह ने कहा- अमेठी आकर गुजरात जैसा घोटाला करना चाहती हैं स्मृति ईरानी
Amethi news, अमेठी। कांग्रेस महिला प्रकोष्ठ महासचिव एवं रायबरेली सदर से पार्टी विधायक अदिति सिंह ने बीजेपी प्रत्याशी स्मृति ईरानी पर बड़े आरोप लगाए हैं। आदिति सिंह ने कहा कि गुजरात में स्मृति ईरानी अपनी निधि में हुए फ्रॉड का रिकॉर्ड नहीं दे पा रही हैं, तो स्मृति ईरानी बताएं कि जहां से सांसद हैं जब वहां इतने घोटाले में फंसी हुई हैं तो अमेठी में आकर क्या करेंगी?

कैग रिपोर्ट के आधार पर स्मृति पर किया हमला
अदिति ने कैग द्वारा जारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि स्मृति ईरानी को राज्यसभा सांसद रहते हुए भाजपा कार्यकर्ता की कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से अपने सांसद क्षेत्रीय विकास निधि के दुरुपयोग का दोषी पाया है। कैग द्वारा जारी रिपोर्ट में साफ तौर पर यह कहा गया है कि स्मृति ईरानी ने सांसद निधि की गाइडलाइन को नजरअंदाज करते हुए 5.93 करोड़ की निधि का दुरुपयोग करते हुए बिना किसी टेंडर प्रकिया के भाजपा कार्यकर्ता की कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से फ्रॉड किया। साथ ही कैग रिपोर्ट के अनुसार गुजरात के आणंद जिले में भी ग्रामीण क्षेत्र के विकास के नाम पर भी 84.53 लाख रुपए का फ्रॉड सामने आया है।
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रिपोर्ट में हुआ फ्रॉड का खुलासा
मंत्रालय के दिशा निर्देश को नजर अंदाज करते हुए सारे काम शारदा मजदूर मंडली के माध्यम से 45.20 लाख रुपए पंचायत भवन की मरम्मत के लिए खर्च किए गए। काफी निधि शमशान घाट, स्कूल्स और अन्य निर्माण कार्यों पर खर्च दिखाया गया, लेकिन रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि वास्तव में जांच के दौरान उन स्थलों से एक ईंट भी नहीं पाई गई और जो भी भुगतान संस्था को किए गए, उनका कोई भी रिकॉर्ड न तो ग्रामसभा के पास न ही नगरपालिका के पास पाया गया। इस पर पीआईएल और इंक्वायरी की गई तो वहां की सरकार ने बताया कि बहुत से काम थे जो इस संस्था के माध्यम से नहीं हुए।

स्मृति ईरानी के इस्तीफे की मांग
उसके बाद तीन अफसरों को इन्होंने चार्जशीट दे दिया। हालांकि, इस संस्था को काम देने के लिए स्मृति ईरानी का आर्डर आया था। तो अगर अफसरों को चार्जशीट किया तो मंत्री पर क्यों नहीं कर रहे। मेरा और कांग्रेस पार्टी की उनसे मांग है कि उनको नैतिकता के आधार पर रिजाइन कर देना चाहिए, क्योंकि उन्होंने फ्रॉड किया है। अदिति सिंह ने स्मृति ईरानी के 2004 और 2014 के नामांकन के दौरान दाखिल किए गए हलफनामे में दर्ज उनकी शिक्षा के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि जब उन्होंने 2004 के चुनाव में दाखिल हलफनामे में यह दर्ज किया कि सन 1996 में दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्राचार माध्यम से बीए किया था तो 2014 के चुनाव के हलफनामे में उन्होंने 1994 में दिल्ली विश्वविद्यालय के ओपन यूनिवर्सिटी से बीकॉम 1st ईयर कर रखा है। यह विसंगति उनकी शिक्षा को लेकर क्यों है। अमेठी की जनता से आखिर कब तक झूठ बोलती रहेंगी।












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