शहीद का परिवार बना पूरी फौज: 16 साल पुराने वादे को निभाने पहुंचे 26 जवान, बेटी की शादी में बने पिता
राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले में एक अनोखी शादी देखने को मिली, जहां पिता की कमी को पूरा करने के लिए भारतीय सेना के जवान आगे आए। यह सिर्फ एक शादी नहीं थी, बल्कि यह सेना के उस वादे की गूंज थी, जो उन्होंने 16 साल पहले अपने साथी से किया था।
फौज बनी परिवार, निभाई हर रस्म
शहीद सूबेदार कंवरपाल सिंह ने 2009 में जम्मू-कश्मीर के राजौरी में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए बलिदान दिया था। तब उनकी यूनिट के जवानों ने वादा किया था कि जब उनकी बेटी की शादी होगी, तो वे पिता की भूमिका निभाएंगे। 5 मार्च 2025 को इस वादे को निभाने के लिए 26 जवान वर्दी में पहुंचे और शादी की हर रस्म को पूरी श्रद्धा से निभाया।

विदाई तक रहे साथ, दिया पिता का आशीर्वाद
ग्रेनेडियर रेजिमेंट की 14वीं यूनिट और 39 राष्ट्रीय राइफल (RR) के जवानों ने बेटी बबली कंवर को आशीर्वाद दिया, रस्में निभाईं और डोली को स्टेज तक ले गए। शहीद के बड़े भाई कौशल सिंह ने कहा, "आज हमें कंवरपाल की कमी महसूस नहीं हुई, क्योंकि पूरी फौज परिवार की तरह खड़ी थी।"
शहीदों के परिवार अकेले नहीं
गांववालों ने कहा कि जब लोग अपने रिश्तों से मुंह मोड़ लेते हैं, तब सेना के जवानों ने दिखाया कि असली परिवार क्या होता है। यह सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि सेना की अटूट परंपरा का प्रतीक था-जहां हर शहीद का परिवार पूरी फौज का परिवार बन जाता है।
यह घटना सिर्फ एक वादा पूरा करने की नहीं, बल्कि उस भावना की मिसाल है, जो भारतीय सेना को बाकी सबसे अलग बनाती है-"एक सैनिक कभी अकेला नहीं होता, न जिंदगी में, न उसके बाद।"












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