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फूलपुर सीट से योगेश मौर्य के चुनाव लड़ने की चर्चा, डिप्टी सीएम के बेटे ने ट्वीट कर किया खंडन

प्रयागराज। फूलपुर संसदीय सीट से भाजपा अपने उम्मीदवार को लेकर सस्पेंस अभी खत्म नहीं कर रही है। वहीं, सोशल मीडिया पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के पुत्र योगेश मौर्य को फूलपुर संसदीय सीट से भाजपा उम्मीदवार बनाने संबंधित पत्र वायरल हो रहा है। बता दें कि पत्र के वायरल होने के बाद मंगलवार की देर शाम योगेश मौर्य ने ट्वीट कर इसका खंडन कर दिया है। योगेश ने लिखा है कि यह अधिकारिक घोषणा नहीं है। लोग अफवाहों पर ध्यान न दें।

 उपचुनाव में भी थी मांग

उपचुनाव में भी थी मांग

आपको बता दें कि फूलपुर सीट से 2014 के लोकसभा चुनाव में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जीत हासिल की थी। हालांकि, उपचुनाव में केशव मौर्य के बेटे योगेश मौर्य को टिकट दिए जाने की आवाज भी उठी थी और जगह जगह पोस्टर भी लगा दिये गये थे। लेकिन तब भारी दबाव के चलते खुद केशव मौर्य ने बेटे के नाम को पीछे कर लिया था। हालांकि इस बार उसी तरह का माहौल फिर से बन गया है और योगेश मौर्य को टिकट दिये जाने की मांग ने सोशल मीडिया पर जोर पकड़ लिया है। इसी माहौल के बीच वायरल हुये फर्जी सूची वाले विज्ञप्ति ने आग में घी डालने का काम किया और अब बीजेपी के लिय ही इस सीट पर मुश्किल बढ़ रही है।

क्या है वायरल सूची

क्या है वायरल सूची

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के पुत्र योगेश मौर्य को फूलपुर संसदीय सीट से भाजपा उम्मीदवार बनाए जाने के पीछे वायरल एक वायरल सोशल मीडिया पर उनकी उम्मीदवारी की घोषणा से संबंधित पत्र वायरल हो गया है। जो हूबहू उसी तरह का है जैसा अन्य प्रत्याशियों के लिए बीजेपी ने जारी किया था। सूची जगत प्रकाश नड्डा की ओर से 2 अप्रैल को जारी की गयी है। जिसमें सिर्फ फूलपुर सीट से ही यानी एक ही उम्मीदवार की घोषणा की गई है। हालांकि, देर शाम योगेश ने ट्विट करके इसका खंडन कर दिया। योगेश ने लिखा है कि यह अधिकारिक घोषणा नहीं है। लोग अफवाहों पर ध्यान न दें।

क्यों घोषित नहीं हो रहा प्रत्याशी

क्यों घोषित नहीं हो रहा प्रत्याशी

बीजेपी चाहती है कि पहले सपा-बसपा गठबंधन अपना प्रत्याशी घोषित इस सीट पर घोषित कर दे। ताकि उन्होंने अपने प्रत्याशी को उतारने में आसानी हो। हालांकि इसी रणनीति पर गठबंधन भी काम कर रहा है और इस चक्कर में दोनों दलों के प्रत्याशी का नाम सामने नहीं आ पा रहा है। हालांकि पहले प्रत्याशी आने से माहौल बनाने में भी मदद मिलती है, लेकिन अगर बाद में आया उम्मीदवार अधिक प्रभावशाली निकला तो माहौल बदलने में भी देर नहीं लगती।

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