साहित्यकार पद्मश्री शम्सुर रहमान फारुकी का निधन, 85 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
Shamsur Rahman Faruqi Passed Away: प्रयागराज। साहित्यकार पद्मश्री शम्सुर रहमान फारुकी (Shamsur Rahman Faruqi) का 85 साल की उम्र में निधन हो गया है। शुक्रवार 25 दिसंबर की सुबह करीब 11 बजे उन्होंने प्रयागराज (Prayagraj) स्थित अपने घर में अंतिम सांस ली। फारुकी के निधन से न सिर्फ प्रयागराज बल्कि, पूरे देश साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। दास्तानगोई कलेक्टिव नाम के एक ट्वीटर हैंडल के जरिए जानकारी दी गई कि फारुकी साहब को इलाहाबाद के अशोकनगर के नेवादा कब्रिस्तान में शाम 6 बजे दफनाया जाएगा। 2009 में भारत सरकार ने फारुकी को पद्मश्री से सम्मानित किया था।
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उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में 1935 में जन्मे शम्सुर रहमान फारुकी ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से इंग्लिश में मास्टर्स (एमए) करने के बाद 1960 से लिखना शुरू किया। पिता देवबंदी मुसलमान थे, जबकि मां का घर काफी उदार था। उनकी परवरिश उदार वातावरण में हुई, वह मुहर्रम और शबे बारात के साथ होली भी मनाते थे। करियर के शुरुआत में वह पोस्टल सर्विस में रहे। इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिल्वेनिया में बच्चों को पढ़ाया। साहित्यिक पत्रिका शबखून के संपादक रहे।
शम्सुर रहमान फारुकी कवि, उर्दू आलोचक और विचारक के रूप में प्रख्यात हैं। फारुकी को उर्दू आलोचना के टीएस इलिएट के रूप में माना जाता है। यही नहीं उन्होंने साहित्यिक समीक्षा के नए प्रारूप भी विकसित किए हैं। फारुकी द्वारा रचित एक समालोचना तनकीदी अफकार के लिए उन्हें सन् 1986 में साहित्य अकादमी पुरस्कार (उर्दू) से भी सम्मानित किया गया है। साल 1996 में उन्हें अठारहवीं शताब्दी के प्रमुख कवि मीर तकी मीर पर अध्ययन के लिए सरस्वती सम्मान से पुरस्कृत किया गया था। 2009 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।












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