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खुशखबरी! यूपी में अब 12वीं के बाद बन सकेंगे युवा टीचर, इंटर पास के बाद सीधे कीजिए बीएड

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में अब इंटर पास के बाद भी युवा टीचर बन सकेंगे, उन्हें किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से संबंधित विषय में स्नातक की उपाधि हासिल करनी की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि इसके लिये उन्हें बीएड कोर्स करना होगा और इस कोर्स को करने के लिये होने वाली शैक्षणिक योग्यता में बड़ा बदलाव किया गया है। यूपी में अब 12 वीं पास छात्र बिना स्नातक के ही बीएड कर सकेंगे। हालांकि बीएड का यह कोर्स चार साल का होगा, जो स्नातक करने के बाद 2 साल का होता है। लेकिन इस तरीके से युवाओं का लगभग 1 साल तो बचेगा ही और वह तेजी के साथ अपने कैरियर की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। इस बावत एनसीटीई ने भी अपनी मंजूरी दे दी है और अगले शैक्षणिक सत्र से यह विशेष तौर पर एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम शुरू होगा।

बदल जायेगी प्रक्रिया

बदल जायेगी प्रक्रिया

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने अभी तक स्नातक होने के बाद ही किसी अभ्यर्थी को बीएड, बीटीसी व अन्य शिक्षक प्रशिक्षण वाले कोर्स करने के लिये नियम बनाये थे। जिसके कारण अभ्यर्थी को शिक्षक बनने के लिये शैक्षणिक योग्यता में न्यूनतम स्नातक की पढ़ाई पूरी करनी होती थी और उसके बाद बीएड जैसे प्रशिक्षण कोर्स से टीचर बना जाता था। यूपी में टीईटी परीक्षा में बैठने के लिये भी प्रशिक्षण कोर्स व स्नातक होना अनिवार्य था और उसके बाद ही शिक्षक भर्ती में अभ्यर्थी शामिल हो सकता था। लेकिन अब नये बदलाव के तहत एनसीटीई ने चार वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति दे दी है। इससे टीचर बनने की पूरी प्रक्रिया ही बदल जायेगी और कम उम्र में ही युवा टीचर बन सकेंगे।

सभी जगह होगा कोर्स

सभी जगह होगा कोर्स

उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इस बावत आदेश जारी कर दिया गया है और सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों को निर्देशित किया गया है कि चार वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम का यह नया कोर्स वह अपने यहां नये सत्र से शुरू करें। नये सत्र के अनुसार यह कोर्स 2020-21 के सत्र से लागू होगा और इसके चलते पांच साल की बजाय 4 साल में ही अभ्यर्थी टीचर बनने के लिये तैयार हो जायेंगे।

कला व विज्ञान वर्ग दोनों में करें कोर्स

कला व विज्ञान वर्ग दोनों में करें कोर्स

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की ओर से दी गयी जानकारी के अनुसार यह चार वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कोर्स कला व विज्ञान दोनों वर्गो के लिये उपलब्ध होगा। अभ्यर्थी अपनी रुचि के अनुसार इसका चयन कर सकेंगे। हालांकि यह हर कॉलेज में कोर्स नहीं उपलब्ध होगा। बल्कि मौजूदा समय में जिन विद्यालयों के पास बीए व बीएससी के कोर्स चल रहे हैं, वहीं पर इनकी शुरुआत की जायेगी। संभावना है कि अपने पहले ही सत्र में इस कोर्स के लिये निर्धारित सभी सीटे भर जायेंगी। क्योंकि कैरियर के हिसाब से यह कोर्स बेहद ही प्रभावशाली साबित होने वाला है।

करना होगा ऑनलाइन आवेदन
डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को यह कोर्स शुरू करने के निर्देश दे दिये गये है। यह नया कोर्स जिन विद्यालयों को अपने यहां चलाना होगा, उन्हें इसके लिये ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिये एनसीटीई की वेबसाइट पर आवेदन लिंक जारी कर दिया गया है और 31 जुलाई तक आवेदन किया जा सकेगा। इस कोर्स को चलाने के लिये वही मानक तय किये गये हैं जो बीए व बीएससी के लिऐ कॉलेज में उपलब्ध होने चाहिये। हालांकि मानक की जांच के बाद ही कॉलेजों को कोर्स चलाने की अनुमति दी जायेगी। फिलहाल कानपुर यूनिवर्सिटी से लेकर इलाहाबाद स्टेट यूनिवर्सिटी, लोहिया अवध विश्वविद्यालय, लखनऊ यूनिवर्सिटी समेत सूबे के अन्य विष्वविद्यालयों ने अपने संबद्ध कॉलेजों को नए कोर्स की जानकारी दे दी है और नये सत्र से इस कोर्स का लाभ वह उठा सकेंगे।

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